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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ईद-उल-फित्र: मानवता का त्योहार

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Published: Thu, 08 Aug 2013 12:01 PM (IST)Updated: Thu, 08 Aug 2013 12:14 PM (IST)

मानवता का संदेश देने वाला ईद-उल-फित्र का त्योहार सभी को समान समझने और गरीबों को खुशियां देने के लिए हमें ...और पढ़ें

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मानवता का संदेश देने वाला ईद-उल-फित्र का त्योहार सभी को समान समझने और गरीबों को खुशियां देने के लिए हमें प्रेरित करता है..

ईद-उल-फित्र बहुत-सी खुशियों का संग्रह है। मान्यता के अनुसार, रमजान के पवित्र माह में जो लोग अपने सद्व्यवहार और नेकी-भलाई की राह पर चलते हुए रोजा के दौरान अपने हृदय को पवित्र कर लेते हैं, उन्हें अल्लाह तआला ईद (खुशी) के रूप में प्रसन्नता प्रदान करता है।

रमजान माह की इबादतों और रोजे के बाद आने वाला ईद-उल फित्र का त्योहार खुशियों का गुलदस्ता है। यह नेकियों का इनाम है। इसलिए ईद का चांद नजर आते ही माहौल में उत्साह और उल्लास छा जाता है। ईद का दिन खुशियां मनाने का दिन है। इस दिन बच्चे, युवा और बुजुर्ग नए वस्त्र पहनकर ईदगाह की ओर रवाना होते हैं और शुक्राना (अल्लाह को धन्यवाद देना) के रूप में नमाज अदा करते हैं। वे दान करके अपने गरीब और वंचित लोगों की आर्थिक मदद करते हैं, ताकि उन्हें भी सही मायने में ईद की खुशियां मिल सकें।

रोज़ा एक प्रकार से सद्गुणों को अपने भीतर उतारने का 30 दिवसीय प्रशिक्षण होता है। मान्यता है कि इसके सफल होने पर अल्लाह तआला अपने फरिश्तों को संबोधित करके पूछते हैं, मेरे फरिश्ते! इस मजदूर ने अपने हिस्से का काम पूरी जिम्मेदारी से किया है? तो फरिश्ते कहते हैं, हे मालिक, इस मजदूर का इनाम है कि उसे पूरी मजदूरी दी जाए। अल्लाह तआला कहते हैं, फरिश्ते, तुम गवाह हो जाओ कि मैंने रमजान भर रोज़े रखने के बदले में अपने बंदों को खुशियों से नवाज दिया और उनसे पूर्व में हुए गुनाहों से उन्हें मुक्ति दे दी।

ईद के दिन सिवइयों या शीर-खुरमे से मुंह मीठा करने के बाद सभी लोग गले मिलते हैं। छोटे-बड़े, अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन का कोई भेद नहीं रह जाता। चारों तरफ प्रेम ही प्रेम नज़र आता है। प्यार-मुहब्बत की पवित्र खुशी से दमकते सभी चेहरे पूरे माहौल में मानवता का संदेश फैला देते हैं। अल्लाह से दुआएं मांगते व रोजे व इबादत के लिए हिम्मत देने के लिए खुदा का आभार व्यक्त करते हाथ हर तरफ दिखाई पड़ते हैं। यह उत्साह बयान करता है कि- लो ईद आ गई।

खुशियों को ईद कहते हैं और यह इनाम मिलने के दिन को ईद-उल फित्र का नाम दिया गया है। ईद का त्योहार हर इंसान को समान दृष्टि से देखने का नजरिया देता है। सब एक-दूसरे की खुशी में शामिल हों, इसके लिए इस्लाम में ज़कात फित्र का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गरीबों और वंचितों को इतना दे दिया जाता है, ताकि वे ईद की खुशियों से महरूम न रह सकें। यही कारण है कि ईद के दिन हर व्यक्ति अपने-अपने तौर पर खुशियां मनाता है।

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