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    हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Sat, 15 Oct 2016 12:51 PM (IST)

    शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुबह उठकर व्रत करके अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए। इंद्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर, गंध पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए।

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    15अक्टूबर 2016 शरद पूर्णिमा विशेष...

    शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुबह उठकर व्रत करके अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए। इंद्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर, गंध पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए।

    ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

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    व्रत की महत्वपूर्ण बातें

    - इस व्रत को मुख्य रूप से स्त्रियों द्वारा किया जाता है।

    - उपवास करने वाली स्त्रियां इस दिन लकड़ी की चौकी पर सातिया बनाकर पानी का लोटा भरकर रखती हैं।

    - एक गिलास में गेहूं भरकर उसके ऊपर रुपया रखा जाता है और गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कहानी सुनी जाती है।

    - गिलास और रुपया कथा कहने वाली स्त्रियों को पैर छूकर दिए जाते हैं।

    ज्योतिष और शरद पूर्णिमा

    मीन राशि के चंद्र और कन्या राशि पर वृहस्पति गोचर में संचरण कर रहे हैं, जिसके कारण चं. और गुरू परस्पर में शुभ दृष्टि होने के कारण 'गजकेसरी योग' बन रहा है।

    चंद्र जहां सौभाग्य का प्रतीक ग्रह होकर महिलाओं को 'अखण्ड सौभाग्य' प्रदान करेंगे वहीं गुरू सुख, समृद्धि की वर्षा करेगें। अत: कफ, वात दोनों रोग से पिड़ीत जनों के लिए आज के दिन औषधी ग्रहण करना बेहद लाभकारी सिद्ध होगा।

    साथ ही समुद्र के देवता वरुण के साथ लक्ष्मी, कुबेर का पूजन करना धन, समृद्धि के साथ दामपत्य जीवन के संबंधों में प्रेमामृत की भरपूर पूर्ति करेगा। अत: आज की रात्रि बेहद शुभकारक है।

    शरद पूर्णिमा का महत्व

    शरद पूर्णिमा जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं।

    यूं तो हर माह में पूर्णिमा आती है लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है।

    ज्योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दी धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्री कृष्ण ने महारास रचा था। शरद पूर्णिमा से जुड़ी कई मान्यताएं हैं।

    मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है और उसके बाद उस खीर का सेवन किया जाता है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक रूप से खीर का प्रसाद भी वितरण किया जाता है।