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March 28,2014

साहित्य

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khatti meethi

राधे जी पर व्यंग्य नहीं लिखूंगा

Updated on: Mon, 03 Mar 2014 03:16 PM (IST)

मेरे बच्चे होली से बहुत डरते हैं। खासतौर पर रंग वाले दिन तो घर से बाहर ही नहीं निकलते। बस खिडकियों से गलियारे का कोहराम देख-देख कर दहशत से दुबले होते रहते हैं। बस यों कहिए कि डर के मामले में वे मुझे गए हैं। मोहल्ले के राधे जी... और पढ़ें »

कंगन

Kangan

Updated on: Sat, 01 Feb 2014 02:18 PM (IST)
        

पेरिस के एक डिपार्टमेंटल  स्टोर में खरीदारी कर रही थी कि किसी ने पुकारा, नलिनी जी.. विदेश में अपना नाम सुन कर मैं चौंक पडी। पलट कर देखा तो अधेड उम्र की एक स्त्री खडी थी। पहचाना? पांच सेकंड लगे पहचानने में.., फिर हंसते हुए मैंने कहा, अरे मिनी श... और पढ़ें »

नए दौर का नाच विमर्श

khatti meethi

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:54 AM (IST)
        

शेक्सपीयर की मानें तो पूरी दुनिया ही रंगमंच है और सभी स्त्री-पुरुष नट-नटिनी। बकौल तुलसीदास सबहिं नचावत राम गोसाई। सूरदास ने भगवान को याद दिलाया कि अब हौं  नाच्यो बहुत गुपाल और मीरा का घुंघरू बांधना तो नाचद्रोहियों को अखर ही गया। सार यह कि नाच विद्या ... और पढ़ें »

मॉर्निग वॉक

Morning walk

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:53 AM (IST)
        

नीरज में आ रहे बदलाव मीरा को हैरान तो कर रहे थे, पर वह चुप्पी साधने को बाध्य थी। नए साल के संकल्प के तौर पर नीरज ने लगभग दस पंद्रह दिनों से मॉर्निग वॉक पर जाना शुरू किया था। उसने मीरा से भी साथ चलने के लिए चिरौरी की, पर मीरा  के पास भला कहां समय था? ... और पढ़ें »

अ‌र्घ्य

story

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:53 AM (IST)
        

साल भर बाद फिर आ पहुंची शरद ऋतु। कार्तिक का महीना, पर्व त्योहारों की गहमागहमी और उत्सव का माहौल। सब कुछ सुंदर-मनभावन। पर मेरे मन-आकाश में बादल छा जाते हैं। ये कितने काले होते हैं, कैसे उमडते-घुमडते हैं, यह तो मेरा ही मन जानता है। सोचना-कहना नहीं चाहत... और पढ़ें »

उसका सुख

Story

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:53 AM (IST)
        

बस की प्रतीक्षा में काफी समय गुजर  गया। धीरे-धीरे भीड जमा होती गई और अब तो इतनी भीड हो गई कि दो बसें भी एक साथ आ जाएं तो बात न बने। कुछ देर बाद ही जंगल के बीच तीखे मोड और पुलियों को लांघती बस की आवाज कानों में पडने लगी। वह संगीता से बोला, तुम्हारा... और पढ़ें »

चोरी होने का सुख

Khatti meethi

Updated on: Tue, 03 Dec 2013 01:02 PM (IST)
        

चोरी से सुख का क्या संबंध! किसी के घर चोरी हो और खुशियां मनाई जाएं? लेकिन ये कलियुग है जनाब। चोरी, डाका, दलाली, घोटाले और भ्रष्टाचार ही ख्ाुशियों के कारण बने हैं। पिछले दिनों शर्मा जी के घर चोरी हुई। पडोस के लोग दुखी थे। कुछ कैश और जेवरात चोरी हुए थे... और पढ़ें »

..उम्र-ए-दराज चार दिन

Updated on: Tue, 03 Dec 2013 01:01 PM (IST)
        

अफसोस, एक निश्चित उम्र के बाद हर शख्स अपने चेहरे के लिए खुद  जिम्मेदार होता है। अल्बर्ट कामू, फ्रेंच लेखक 50  की उम्र में हर शख्स  को वही चेहरा मिल जाता है, जिसका वह हकदार होता है। जॉर्ज ओरवेल,  भारत में जन्मे ब्रिटिश लेखक बुजुर्ग जो सोचते हैं,... और पढ़ें »

अनवांटेड

Unwanted

Updated on: Tue, 03 Dec 2013 01:00 PM (IST)
        

भोर में ही उठ गए दत्ता साहब। वैसे भी रात भर जागते ही रहे थे। बैठे-बैठे कभी झपकी आती, फिर अगले ही पल नींद खुल जाती। बनारस के जाने-माने सी.ए. हैं, पैसे की कमी नहीं है, पर दम लेने को फुर्सत नहीं। पॉश  इलाके में भव्य कोठी है, गाडियां हैं। बेटी है 19 वर्ष... और पढ़ें »

खुद्दार

Story-Khuddar

Updated on: Tue, 03 Dec 2013 01:00 PM (IST)
        

क्या भूख या गरीबी किसी को अनैतिक बना सकते हैं? ऐसा माना तो जाता है, लेकिन कई बार यह धारणा व्यर्थ साबित होती है। पैसे से बहुत कुछ खरीदा जा सकता है, मगर किसी मेहनतकश इंसान का जमीर नहीं। मेहनत को सम्मान चाहिए-दया नहीं, यही संदेश देती है प्रस्तुत कहानी। ... और पढ़ें »

आराम हराम है

Khatti meethi

Updated on: Fri, 01 Nov 2013 02:46 PM (IST)
        

नेहरू जी सिर्फ स्वप्न-दृष्टा ही नहीं, देश की वास्तविकता से भी जुडे हुए महापुरुष हैं। तभी तो उन्होंने आराम हराम है की गुहार लगाई। संभव है, उनका आशय मुल्क के रचनात्मक विकास में जुडे अफसर-इंजीनियरों से रहा हो। पर कोई भी युगपुरुष जो सोचता है, वह पूरे दे... और पढ़ें »

दीवाली के तीन दीये

Diwali ke teen Diye

Updated on: Fri, 01 Nov 2013 02:45 PM (IST)
        

उर्दू लेखक व फिल्म निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास का जन्म 7 जून 1914 को पानीपत में हुआ। उन्होंने डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी, श्री चार सौ बीस,बॉबी और मेरा नाम जोकर जैसी फिल्मों की कहानियां, स्क्रीन प्ले और संवाद लिखे। दो बूंद पानी, सात हिंदुस्तानी व हव... और पढ़ें »

अंत‌र्द्र्वद्व

Story: Antardwand

Updated on: Thu, 03 Oct 2013 11:21 AM (IST)
        

कहानियां बहुत पढी और सुनी हैं। कुछ सच्ची होती हैं तो कुछ काल्पनिक। कुछ बन जाती हैं तो कुछ बुनी हुई होती हैं। कहानियां राजा और रानी की हों तो बहुत पसंद की जाती हैं। बचपन में सुना करते थे, एक राजा था-एक रानी, दोनों मिल गए खत्म  कहानी। एक कहानी जो बन... और पढ़ें »

तलाश एक संस्मरण की

Khatti meethi

Updated on: Thu, 03 Oct 2013 11:21 AM (IST)
        

कविता, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य आदि पर जोर आजमाने और वीरतापूर्वक हार जाने के बाद मैंने सोचा, क्यों न एकाध संस्मरण ही लिख डालूं। मैंने कई रोचक संस्मरण पढ रखे थे, जैसे- मैं और खूंखार शेरनी, दुर्गम घाटी की यात्रा या बचपन का रोचक संस्मरण। बस मैंने संस्मरण... और पढ़ें »

अटल निश्चय

Atal nischay

Updated on: Thu, 03 Oct 2013 11:21 AM (IST)
        

नमिता के मन में आज अजीब सी शांति थी, हालांकि विचारों का झंझावात थम नहीं रहा था। जिन बच्चों के लिए उसने पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उन्हीं ने ऐसी ठेस पहुंचाई कि आज उसे यह कठोर फैसला लेना पड रहा था। अपनी ममता के खिलाफ जाकर निर्णय लेना मां के जीवन की सबस... और पढ़ें »

हांके हुए अल्फाज

Khatti Meethi

Updated on: Mon, 02 Sep 2013 11:47 AM (IST)
        

कौन नहीं जानता कि हर शब्द का, भले ही वह अपशब्द क्यों न हो, कोई न कोई अर्थ जरूर होता है। भाषा विज्ञान के धुरंधर फरमा गए हैं कि शब्द और अर्थ का रिश्ता आशिक-माशूक जैसा होता है। जैसे प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है, वैसे ही शब्द और अर्थ के नैन कब, कहां ... और पढ़ें »

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