Dainik Jagran Hindi News

www.jagran.com
April 27,2015

साहित्य

1 | 2 | 3 | 4 | 5 | Next »

khatti meethi

सबसे भले विमूढ़...

Updated on: Fri, 27 Mar 2015 03:44 PM (IST)

यह अलग बात है कि अपने को मूर्ख कहा जाना कोई पसंद नहीं करता, लेकिन इस दुनिया में जो कुछ भी थोडी-बहुत खुशी है वह मूर्खों के ही कारण है। क्या कभी आपने सुना है कि कोई किसी की बुद्धिमानी पर हंस रहा हो? मूर्खता के अलावा शायद ही क... और पढ़ें »

जिंदगी है यहां

story- zindaagi hai yaha

Updated on: Thu, 26 Feb 2015 12:56 AM (IST)
        

बरसों से विदेश की धरती पर रहने वाला बलजीत का परिवार भारतीय मूल्यों और संस्कारों से दूर हो गया था। मगर जब उसके माता-पिता बेटे-बहू और बच्चों से मिलने पहुंचे तो उन्होंने अपने प्यार से चंद ही दिनों में सब कुछ बदल दिया। यहां तक कि दादा-दादी से चिढऩे वाली... और पढ़ें »

दायरा रिश्तों का

Story- Dayra Rishton ka

Updated on: Mon, 02 Feb 2015 11:17 AM (IST)
        

हमेशा सहारे की जरूरत क्यों पडे स्त्री को? क्या जरूरी है कि किसी बडे ताकतवर पेड की छांह में वह सुरक्षित रहे? वह खुद भी तो पेड बन कर दूसरों को छांव दे सकती है...। बरसों पति की छत्रछाया में रहने के बाद जीवन की चुनौतियों का अकेले सामना करने की हिम्मत ... और पढ़ें »

हाय रे एक छुट्टी

Khatti Meethi

Updated on: Wed, 28 Jan 2015 12:49 AM (IST)
        

कुछ लोग वक्त-जरूरत पर छुट्टी लेते हैं तो कुछ मौज-मजे के लिए। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो बात-बेबात छुट्टी लेते रहते हैं और कुछ ऐसे भी जो ले ही नहीं पाते। ऐसे लोगों के लिए मुसीबत छुट्टी के आगे-आगे चलती है। आपसे क्या बताएं कि इस जमाने में एक छुट्टी कित... और पढ़ें »

कांटा

Story- Kanta

Updated on: Tue, 27 Jan 2015 02:21 PM (IST)
        

बच्चों की परवरिश में मां दिन-रात एक करती है। बच्चा छोटा हो तो उसका रोना तक बर्दाश्त नहीं कर पाती। उसकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतती है। मगर ममता कई बार मां को वहमी बना देती है। वह दूसरों पर भरोसा नहीं कर पाती और इस क्रम में कई गलतियां भी ... और पढ़ें »

नए साल में नया क्या है?

Khatti Meethi

Updated on: Mon, 22 Dec 2014 03:46 PM (IST)
        

नया साल आने के महीने भर पहले से ही उसके स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। एक त्योहार जैसा माहौल बन जाता है। पहले यह त्योहार केवल महानगरों तक सीमित था, पर अब छोटे शहरों और कस्बों से होते हुए इसका असर गांवों तक भरपूर देखा जाता है। नए साल के नएपन प... और पढ़ें »

सभ्य मुखौटे

Story- Decent Masks

Updated on: Mon, 22 Dec 2014 03:01 PM (IST)
        

कलिका हतप्रभ सी एक हॉल जैसे कमरे में बैठी थी, दिलोदिमाग्ा में अजब सी हलचल लिए। अपनी नए जॉब को लपकने कलिका वर्मा घंटे भर पहले यहां आई थी। मशहूर ब्रैंड 'गोल्डन प्लेनेट के भव्य शो-रूम में फाइनेंस मैनेजर की नौकरी थी यह। पुराने मैनेजर बढती उम्र और स्वास्... और पढ़ें »

नई राह

?? ???

Updated on: Mon, 22 Dec 2014 02:49 PM (IST)
        

प्लेटफॉर्म पर इक्का-दुक्का लोग ही दिख रहे थे। छोटा स्टेशन होने के कारण गाडी आने के समय ही यहां भीडभाड होती है। इस स्टेशन पर रुकने वाली अधिकतर गाडिय़ां सुबह और शाम के समय का अनुसरण करती चलती हैं। अगली गाडी आने में अभी एक घंटा बाकी है। गाडी के अकसर लेट... और पढ़ें »

गरिमा बारात की

Khatti Meethi

Updated on: Fri, 21 Nov 2014 10:41 AM (IST)
        

विवाह के पक्ष-विपक्ष में तर्क चाहे कितने ही क्यों न कर लिए जाएं, लेकिन है यह जीवन का ध्रुवसत्य। ज्ञानीजन बताते हैं कि इससे बचा नहीं जा सकता और बारात के बगैर इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता। चूंकि बारात की गरिमा ही बारातियों से तय होती है, इसलिए बार... और पढ़ें »

मैं कासे कहूं पीर...

Story- Mai kase kahu peer

Updated on: Thu, 20 Nov 2014 04:24 PM (IST)
        

न जाने कौन सा जादू था मां के हाथों में कि उनके छूने भर से खाने की लज्ज्ात बढ जाती। ख्ाास मौकों पर लोग उन्हें बुलावा भेजते। लंबा सा घूंघट काढे मां लाल मलमल की थैली में बंद पिटारी लेकर चली जातीं। इसी में छुपा था वह रहस्य जो स्वाद-ग्रंथियों को रस से भर... और पढ़ें »

झुमका गिरा रे!

Khatti meethi

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 03:31 PM (IST)
        

हमें बचपन से पढाया गया - हमारा देश कृषिप्रधान देश है। इस देश का किसान खेतों में सोना उपजाता है। और कई बार वरदानों का अभाव किसानों की मेहनत पर पानी फेर देता है। मुझे पिछले दिनों हुई बारिश का समाचार याद हो आया - वरदान की कमी से बारिश में कई क्विंटल गेह... और पढ़ें »

चंदरू की दुनिया

Chandru ki dunia

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 03:30 PM (IST)
        

कराची में भी उसका यही धंधा था और बांद्रे में भी यही। कराची में संधू हलवाई के घर की सीढियों के पीछे तंग-अंधेरी कोठरी में सोता, यहां भी उसे सीढियों के पीछे जगह मिली थी। कराची में मैला-कुचैला बिस्तर, जंग-लगा छोटा सा काला ट्रंक और पीतल का लोटा था। यहां... और पढ़ें »

अभिनेत्री

Abhinetri

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 03:30 PM (IST)
        

अरे यार! ये मेहता भी न बडा बोर आदमी है। क्या बात करूंगा इससे? घंटे भर चिपक जाएगा। कह दो उससे कि कल ऑफिस में मिले मुझसे, अभी मैं सो रहा हूं.., अनुज खीझकर बोला। ऑफिस में तो उनसे रोज ही मिलते हो तुम। कुछ खास काम ही रहा होगा जो इतनी दूर चल कर आपसे मिलने... और पढ़ें »

जुगाड़ चंद की आत्मकथा

khatti meethi

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 11:30 AM (IST)
        

मेरा नाम जुगाड चंद है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मैंने जन्म से पहले ईश्वर के यहां कोई न कोई अमोघ जुगाड जरूर लगाया होगा, तभी उसने मुझे भारत जैसे जुगाड-प्रधान देश में अवतार धारण करने का सुअवसर प्रदान किया। मुझे पता है कि कुछ देशभक्त टाइप मित्रों को म... और पढ़ें »

खोखली मान्यताएं

khokhli manyataye

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 11:29 AM (IST)
        

पिछले दस दिन बडी व्यस्तता और मुश्किलों में बीते। मैं ही क्या, मेरी पुत्रवधू भी इन दिनों व्यस्त रही। उसने ही घर-बाहर का सारा प्रबंध किया था। कितनी बार तो शांभवी के घर खाना बना कर भेजा। जरूरी भी था, शांभवी की मम्मी ममता मेरी बचपन की सहेली जो थी। ममता... और पढ़ें »

सामने वाली

samne wali

Updated on: Mon, 03 Nov 2014 11:29 AM (IST)
        

लगातार बजती डोर बेल की आवाज सुनकर मैं झल्ला कर बुदबुदाई, उफ! ये काम वाली भी न..! सौ बार कहा कि संडे को आठ बजे से पहले मत आया करो, मगर नहीं। गुस्से में दरवाजा खोला तो सामने वाली की बेटी छवि रोते हुए खडी थी, आंटी.. मम्मी.. हॉस्पिटल.. उसकी घबराई हालत... और पढ़ें »

1 | 2 | 3 | 4 | 5 | Next »