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October 01,2014

साहित्य

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khatti meethi

झाड़ू चिंतन

Updated on: Mon, 01 Sep 2014 04:28 PM (IST)

दूसरे की क्या कहूं, अपनी कहूंगा और खुश रहूंगा। दूसरे के बारे में कहने के लिए जिगरा चाहिए। छुट्टी का दिन था। हम पैदल चलते हुए ज्यादा दूर निकल गए। बाजार  की ओर। वहां उन्होंने जिद  पकड ली। कहने लगीं, हमारी कॉलोनी का दुकानदार लुट... और पढ़ें »

फैलते दायरे

Story

Updated on: Sat, 02 Aug 2014 11:35 AM (IST)
        

आज सुबह से ही बडी भागमभाग थी। एक तो रक्षाबंधन का त्योहार, ऊपर से आज ही चित्रा दी की लंदन की फ्लाइट भी थी। दी जल्दी-जल्दी पैकिंग कर रही थीं। अचानक उन्हें याद आया कि कुछ दवाएं नहीं आ पाई हैं, जो साथ ले जानी थीं। मुझे बता कर दी ने जल्दी से ड्राइवर को आव... और पढ़ें »

सेतु

Story- Setu

Updated on: Sat, 02 Aug 2014 11:35 AM (IST)
        

छह महीने में यह दूसरा हादसा था। यूं तो सुरेंद्र कौर, जो मोहल्ले भर में बीजी के नाम से जानी जाती थीं, भली-चंगी थीं। कोई छह माह पूर्व उन्हें हलका सा हार्ट अटैक आया था, मगर जल्दी ठीक हो गई। डॉक्टर ने हिदायतें देते हुए कहा था कि चिंता की कोई बात नहीं है।... और पढ़ें »

गुडि़या

Gudia

Updated on: Tue, 01 Jul 2014 07:14 PM (IST)
        

मिस्टर और मिसेज सुशील चंद्र.. सुशील ने दार्जिलिंग पहुंच कर होटल के रजिस्टर में यही नाम लिखे। मैनेजर ने मुस्कराकर उन्हें देखा और चाबी देते हुए कहा, हनीमून? जी, सुशील ने बनारसी साडी में लिपटी बीवी को प्यार से देखते हुए कहा, हमारी शादी कल ही हुई है। ... और पढ़ें »

दस्तूर

Story- Dastoor

Updated on: Tue, 01 Jul 2014 07:14 PM (IST)
        

कहिए- रजिस्टर में आंकडे दर्ज करती स्त्री ने बिना उसकी ओर देखे हुए कहा। लॉकर ऑपरेट करना है। प्रयोजन बताने के साथ ही सबा उस स्त्री को गौर से देखने लगी। शक्ल जानी-पहचानी सी लगी। वह सोचने लगी, यदि इसकी त्वचा का रंग कुछ सांवला हो जाए, देह का भराव कम... और पढ़ें »

कोपभवन का वास्तु

Khatti meethi

Updated on: Fri, 06 Jun 2014 02:12 PM (IST)
        

कुछ निष्कर्षवादी विद्वानों ने न जाने किस आधार पर धारणा बना दी कि भगवान राम के वनवास और उसके बाद के घटनाक्रम के लिए महाराज दशरथ के राजमहल का वास्तु जिम्मेदार था। उनकी मानें तो महल में न तो कोपभवन होता और न ही भगवान राम को वनवास होता। नतीजा यह हुआ कि ... और पढ़ें »

सुगंध अब फैलेगी

Story

Updated on: Fri, 06 Jun 2014 02:11 PM (IST)
        

घर के हर सामान को इधर-उधर करना, इंटीरियर को नित नया रूप प्रदान करना उसका प्रिय शौक था। कुछ-कुछ दिनों पर ऐसा करने से घर को नयापन मिलता था। सीमित और पुराने साधनों से ही कुछ नया करने का प्रयास करती रहती थी, लेकिन कमरे को नया रूप देने के लिए आज उसके घर म... और पढ़ें »

किस्मत के मारे कलाकार

khatti meethi

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:20 AM (IST)
        

बंदे ने भविष्य में क्या-क्या तीर मारने हैं, यह 99.99 प्रतिशत इस पर निर्भर करता है कि उसने कब और कहां जन्म लिया। आप जीवन एक्सप्रेस में कब और किस स्टेशन से चढ रहे हैं, इसी से निर्धारित होता है कि आपको सीट कौन-सी मिलेगी। खिडकी वाली, बीच वाली, या पहले से... और पढ़ें »

सिर्फ

Story- Sirf

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

कोई पुरुष कभी समझ पाएगा कि विदाई की बेला में वधू के मन पर क्या गुजर रही होती है! अपना सुरक्षित माहौल और खून के रिश्ते पीछे छोड अनजाने, अपरिचित लोगों के बीच जाकर रहना.. दो-एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए। परायेपन के भय के बीच हलकी सी जो आस की किरण हो... और पढ़ें »

लूजर

Story- Looser

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

बात छोटी सी थी, पर बित्ते भर की बेटी ने पिता हितेष को हिलाकर रख दिया था। शीतल सोलह की ही थी, मगर अपने लिए नई स्कूटी लेने की जिद पकड गई। हितेष ने समझाया भी कि सही वक्त आने पर स्कूटी दिला देगा। लेकिन वह अडी रही। हितेष ने सोचा, पत्नी निशा की वजह से ... और पढ़ें »

सहारा

story - Sahara

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

जीप की आवाज रात की नीरवता को चीरती आगे बढ रही थी। बिलासपुर शहर की सीमा के बाद जंगल आरंभ हो गया था। रात के बारह बजे रहे थे। प्रदीप ने गाडी रुकवाई। अब तक ड्राइवर के बगल में बैठा प्रदीप पीछे सीट पर चला गया, जहां उसके पैरों के पास नीरा का पार्थिव शरीर ... और पढ़ें »

जी हां, मैं श्रोता हूं

khatti meethi

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:59 PM (IST)
        

सुनने की क्रिया श्रवण है। जो श्रवण करे वह श्रोता। रामायण में एक जगह कहा गया है - सुनि समुझहिं जन मुदित मन मच्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग॥ यानी जो मनुष्य इस संत समाज की वाणी को मन से सुनता और समझता है, वह इस शरीर के रहते... और पढ़ें »

शोभा

Story- Shobha

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:57 PM (IST)
        

शोभा मेरी दोस्त थी। इतनी पक्की कि मेरी कोई बहन होती तो ऐसी ही होती। पर तब तक मैं उसकी असलियत नहीं जानती थी। शोभा और मेरे स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर था। जहां शोभा हंसमुख, खुशदिल और एक्स्ट्रोवर्ट थी, वहीं मैं निराशावादी लडकी थी। कई बार तो मेरा व्यवह... और पढ़ें »

स्वयंसिद्धा

Axiomatic

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:57 PM (IST)
        

उसके बिना शायद मैं अपना वजूद सोच भी नहीं सकती थी। मेरे परिवार ने उसे मेरे लिए चुना। साथ रहते हुए शायद मन में उसके लिए भावनाएं भी पनपी हों, हालांकि उनका पता मुझे चल नहीं सका। फिर न जाने ऐसा क्या हुआ कि वह मुझसे मानसिक तौर पर जुदा हो गया। उसके बारे में... और पढ़ें »

राधे जी पर व्यंग्य नहीं लिखूंगा

khatti meethi

Updated on: Mon, 03 Mar 2014 03:16 PM (IST)
        

मेरे बच्चे होली से बहुत डरते हैं। खासतौर पर रंग वाले दिन तो घर से बाहर ही नहीं निकलते। बस खिडकियों से गलियारे का कोहराम देख-देख कर दहशत से दुबले होते रहते हैं। बस यों कहिए कि डर के मामले में वे मुझे गए हैं। मोहल्ले के राधे जी को दख-देखकर तो उन्हें ब... और पढ़ें »

एक कतरा आसमान

Story- ek katra aasman

Updated on: Mon, 03 Mar 2014 03:15 PM (IST)
        

आज का ये सो कॉल्ड खास दिन.., महक को वहशत सी हो रही है सोचकर, अंतस की परतों में जमा लावा कुछ इस तरह पिघलने लगा है, जैसे बर्फ के टुकडे डीफ्रॉस्ट किए जाते हों- माइक्रोवेव में रख कर सधे हुए तापमान में, जैसे हिम का विगलन छद्म माहौल में, मन की जकडन भी उसी... और पढ़ें »

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