साहित्य

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Phobia

फोबिया

Updated on: Fri, 23 Oct 2015 03:28 PM (IST)

अपने दादा जी के बुज्ाुर्ग मित्रों के सान्निध्य में रहते हुए नन्हा सा बच्चा समय से पहले परिपक्वता की तरफ बढ रहा था। यह देख कर सबको चिंता होने लगी। पोते की हालत देख दादा ने अपनी मित्र मंडली की बातों का रुख्ा बदलने की कोशिश की,... और पढ़ें »

नकल की पर्ची

story-Nakal ki parchi

Updated on: Thu, 24 Sep 2015 02:20 PM (IST)
        

शिक्षक पर छात्रों को पढाने की ही नहीं, उन्हें बेहतर इंसान बनाने की ज्िाम्मेदारी भी होती है। कई मौके ऐसे आते हैं, जब छात्र-हित में फैसला लेना जरूरी होता है। नकल से न सिर्फ एक छात्र, बल्कि पूरे छात्र समुदाय को नुकसान होता है। ऐसे में छात्रों के भविष्... और पढ़ें »

पंख कतरी चिडिय़ा

story- Pankh katri chidiya

Updated on: Wed, 26 Aug 2015 03:07 PM (IST)
        

गृहिणी के कार्यों का मूल्यांकन कभी नहीं किया जा सकता। घर की धुरी है स्त्री, उसके बलिदान को महिमामंडित तो किया गया, मगर उसे उसका हक और सम्मान कभी नहीं दिया जा सका। एक स्त्री जिसे अन्नपूर्णा कह कर उसकी तमाम इच्छाओं को बांध दिया जाता है, क्या उडऩे की ... और पढ़ें »

बराबरी

story- Barabari

Updated on: Wed, 26 Aug 2015 02:54 PM (IST)
        

प्रसिद्ध उर्दू लेखिका नीलोफर इकबाल की कहानियां अपने समय की कहानी बयान करती हैं। इस्लामाबाद (पाकिस्तान) की नीलोफर के 'घंटी और 'सुख्र्ा ढाबे जैसे कहानी संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। समसामयिक शहरी पृष्ठभूमि पर आधारित हैं इनकी कहानियां। सहज-दिलचस्प ढंग से ... और पढ़ें »

अब मेरी बारी है

story- Ab meri baari hai

Updated on: Wed, 26 Aug 2015 02:49 PM (IST)
        

दहेज की मांग के कारण न जाने कितनी लडकियों की बेमेल शादी होती है। कई बार माता-पिता ही बेटियों के साथ ग्ालत कर बैठते हैं। क्या लडकी के लिए शादी इतनी ज्ारूरी है कि किसी के भी साथ सात फेरे लेने को मजबूर होना पडे? शादी के बाद पछतावे से बेहतर है कि अपनी आं... और पढ़ें »

हमें भी चाहिए थोड़ी सी आज़ादी

Khatti Meethi

Updated on: Mon, 27 Jul 2015 03:55 PM (IST)
        

कुछ दिन ही ऐसे होते हैं जो हमें हमारी वस्तुस्थिति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर देते हैं। ऐसा ही एक दिन है स्वतंत्रता दिवस। यह हम सबको सोचने के लिए विवश कर देता है कि क्या हम वाकई स्वतंत्र हैं? हैं तो कितने हैं और जितने हैं, उसमें कितने क... और पढ़ें »

मिर्च-मसाले

story

Updated on: Mon, 27 Jul 2015 03:46 PM (IST)
        

हर रिश्ते में कुछ खट्टा तो कुछ मीठा होता है, मगर सास-बहू के रिश्ते की बात ही अलग है। यहां तो खट्टे-मीठे के अलावा मिर्च-मसाला भी ख्ाूब होता है। जिस तरह सेहत के लिए हर स्वाद ज्ारूरी है, उसी तरह रिश्ते के इस कडवे-तीखे स्वाद के बिना भी ज्िांदगी बेमज्ाा ... और पढ़ें »

एक नए मोड़ की तलाश

story

Updated on: Mon, 27 Jul 2015 02:48 PM (IST)
        

जिंदगी ने उसे बार-बार छला। फिर नियति उसे जहां ले गई, वहां से घर लौटना मुश्किल हो गया। वैभव व ऐश्वर्य उसके कदमों तले था, लेकिन अतीत रह-रह कर कचोटता था। एक दिन हर सुख को ठुकरा कर निचाट एकांत में बसने का निर्णय कर लिया उसने। बारहवीं का अंतिम पेपर दे... और पढ़ें »

अपने-अपने सफाई आंदोलन

Khatti Meethi

Updated on: Thu, 25 Jun 2015 04:48 PM (IST)
        

सफाई बहुत जरूरी है, यह बात अब जनता समझ चुकी है। चाहे कोई आम आदमी हो या ख्ाास, सभी आजकल सफाई को पूरी अहमियत देने लगे हैं। वैसे सफाई के प्रकार कई हैं और कुछ का तो आज के समाज में व्यापक प्रसार भी हो चुका है। कैसे, जानने के लिए पढें आगे। कूडा-करकट को पी... और पढ़ें »

फै सला

story-Faisla

Updated on: Thu, 25 Jun 2015 03:55 PM (IST)
        

स्थितियों को नियति समझ कर स्वीकार कर लेने से कभी-कभी जिंदगी थोडी आसान हो जाती है। मगर जीवन में फैसले लेना इतना आसान नहीं होता। तलाक के एक मामले की पैरवी करते सदाव्रत के लिए भी फैसला लेना मुश्किल था। कलम वादी के पक्ष में फैसला दे रही थी और वह खुद प... और पढ़ें »

हाउस नंबर 302

House no. 302

Updated on: Thu, 25 Jun 2015 03:46 PM (IST)
        

कानों सुनी-आंखों देखी बात भी झूठ हो सकती है। कई बार आंखें कुछ देखती हैं और कुछ व्यक्ति की कल्पना शक्ति काम कर जाती है। ऐसा ही हुआ कहानी के नायक के साथ भी। आंखों ने कुछ देखा और दिमाग ने एक कहानी बुन ली, मगर सच्चाई एक दिन सामने आ गई। नायक को एक बडा सब... और पढ़ें »

लौट आओ शिशिर...

story- Laut aao Shishir

Updated on: Thu, 25 Jun 2015 02:02 PM (IST)
        

जरा सी बारिश ठूंठ को हरा कर देती है, पतझड को बसंत की उम्मीद होती है, मछलियां अपने पानी के सहारे ही जीती हैं, जरा सा प्यार और स्नेह इंसान को बदल देता है, उसे रचनात्मक बना देता है। लेकिन जब वही प्यार खो जाए तो? जल-विहीन मछली सरीखा हो जाता है जीवन..... और पढ़ें »

तीसरा बेटा

third son

Updated on: Sat, 20 Jun 2015 02:48 PM (IST)
        

कई बार थोडी सी मदद भी किसी के सपने साकार कर सकती है। वह तब बच्चा था और उसकी मां दूसरों के घरों में काम करती थी, कभी-कभार मां का हाथ बंटाने वह आ जाता। पढाई के प्रति उसकी लगन देख कर कुछ आर्थिक मदद कर दी तो बच्चे ने दसवीं, बारहवीं की परीक्षा प्रथम श्रे... और पढ़ें »

सिंदूर का सच

Sindoor ka sach

Updated on: Mon, 01 Jun 2015 11:42 AM (IST)
        

स्त्री के लिए शादी करना जितना ज्ारूरी माना जाता है, उससे कहीं ज्य़ादा ज्ारूरी उस शादी को हर कीमत पर बचाए रखना होता है। शादी किसी भी वजह से टूटे, दोष अकसर स्त्री के ही सिर मढ दिया जाता है। इससे बचने के लिए कई बार स्त्रियां सिंदूर के झूठ को आजीवन पहने... और पढ़ें »

सातवां घोड़ा

Seventh Horse

Updated on: Mon, 01 Jun 2015 11:35 AM (IST)
        

लडकी से स्त्री बनने की यात्रा बडी कठिन होती है। कर्तव्यों की लंबी सी सूची पकडा दी जाती है लडकी को। पति को समझते, ससुराल के हर सदस्य का मन जानते-बूझते और सबका अहं तुष्ट करते लडकी मां भी बन जाती है। मगर उसके मन में सपनों से भरी एक लडकी हमेशा ज्िांदा र... और पढ़ें »

झूठ बरोबर तप नहीं...

khatti meethi

Updated on: Mon, 01 Jun 2015 12:59 AM (IST)
        

एक तरफ तो स्कूल की किताबों से लेकर धर्मग्रंथों तक में हर जगह झूठ को पाप बता दिया गया और दूसरी तरफ हर जगह झूठ का ही बोलबाला दिखाई देता है। अब यह कैसे तय हो कि पाप क्या और पुण्य क्या है? मान लिया झूठ बोलना पाप है, परन्तु यह बात आज तक समझ में नहीं आई क... और पढ़ें »

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