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July 26,2014

साहित्य

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Gudia

गुडि़या

Updated on: Tue, 01 Jul 2014 07:14 PM (IST)

मिस्टर और मिसेज सुशील चंद्र.. सुशील ने दार्जिलिंग पहुंच कर होटल के रजिस्टर में यही नाम लिखे। मैनेजर ने मुस्कराकर उन्हें देखा और चाबी देते हुए कहा, हनीमून? जी, सुशील ने बनारसी साडी में लिपटी बीवी को प्यार से देखते हुए कहा, ... और पढ़ें »

सिर्फ

Story- Sirf

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

कोई पुरुष कभी समझ पाएगा कि विदाई की बेला में वधू के मन पर क्या गुजर रही होती है! अपना सुरक्षित माहौल और खून के रिश्ते पीछे छोड अनजाने, अपरिचित लोगों के बीच जाकर रहना.. दो-एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए। परायेपन के भय के बीच हलकी सी जो आस की किरण हो... और पढ़ें »

लूजर

Story- Looser

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

बात छोटी सी थी, पर बित्ते भर की बेटी ने पिता हितेष को हिलाकर रख दिया था। शीतल सोलह की ही थी, मगर अपने लिए नई स्कूटी लेने की जिद पकड गई। हितेष ने समझाया भी कि सही वक्त आने पर स्कूटी दिला देगा। लेकिन वह अडी रही। हितेष ने सोचा, पत्नी निशा की वजह से ... और पढ़ें »

सहारा

story - Sahara

Updated on: Sat, 10 May 2014 11:19 AM (IST)
        

जीप की आवाज रात की नीरवता को चीरती आगे बढ रही थी। बिलासपुर शहर की सीमा के बाद जंगल आरंभ हो गया था। रात के बारह बजे रहे थे। प्रदीप ने गाडी रुकवाई। अब तक ड्राइवर के बगल में बैठा प्रदीप पीछे सीट पर चला गया, जहां उसके पैरों के पास नीरा का पार्थिव शरीर ... और पढ़ें »

जी हां, मैं श्रोता हूं

khatti meethi

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:59 PM (IST)
        

सुनने की क्रिया श्रवण है। जो श्रवण करे वह श्रोता। रामायण में एक जगह कहा गया है - सुनि समुझहिं जन मुदित मन मच्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग॥ यानी जो मनुष्य इस संत समाज की वाणी को मन से सुनता और समझता है, वह इस शरीर के रहते... और पढ़ें »

शोभा

Story- Shobha

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:57 PM (IST)
        

शोभा मेरी दोस्त थी। इतनी पक्की कि मेरी कोई बहन होती तो ऐसी ही होती। पर तब तक मैं उसकी असलियत नहीं जानती थी। शोभा और मेरे स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर था। जहां शोभा हंसमुख, खुशदिल और एक्स्ट्रोवर्ट थी, वहीं मैं निराशावादी लडकी थी। कई बार तो मेरा व्यवह... और पढ़ें »

स्वयंसिद्धा

Axiomatic

Updated on: Tue, 01 Apr 2014 05:57 PM (IST)
        

उसके बिना शायद मैं अपना वजूद सोच भी नहीं सकती थी। मेरे परिवार ने उसे मेरे लिए चुना। साथ रहते हुए शायद मन में उसके लिए भावनाएं भी पनपी हों, हालांकि उनका पता मुझे चल नहीं सका। फिर न जाने ऐसा क्या हुआ कि वह मुझसे मानसिक तौर पर जुदा हो गया। उसके बारे में... और पढ़ें »

राधे जी पर व्यंग्य नहीं लिखूंगा

khatti meethi

Updated on: Mon, 03 Mar 2014 03:16 PM (IST)
        

मेरे बच्चे होली से बहुत डरते हैं। खासतौर पर रंग वाले दिन तो घर से बाहर ही नहीं निकलते। बस खिडकियों से गलियारे का कोहराम देख-देख कर दहशत से दुबले होते रहते हैं। बस यों कहिए कि डर के मामले में वे मुझे गए हैं। मोहल्ले के राधे जी को दख-देखकर तो उन्हें ब... और पढ़ें »

एक कतरा आसमान

Story- ek katra aasman

Updated on: Mon, 03 Mar 2014 03:15 PM (IST)
        

आज का ये सो कॉल्ड खास दिन.., महक को वहशत सी हो रही है सोचकर, अंतस की परतों में जमा लावा कुछ इस तरह पिघलने लगा है, जैसे बर्फ के टुकडे डीफ्रॉस्ट किए जाते हों- माइक्रोवेव में रख कर सधे हुए तापमान में, जैसे हिम का विगलन छद्म माहौल में, मन की जकडन भी उसी... और पढ़ें »

झूठ बोले कौआ चूमे

Khatti meethi

Updated on: Sat, 01 Feb 2014 02:19 PM (IST)
        

झूठ बेचारा तो बस यूं ही बदनाम है। वैसे झूठ इतना भी बुरा नहीं है, जितना उसके बारे में अफवाहें उडा दी गई हैं। कहते हैं बद अच्छा बदनाम बुरा। यही बात झूठ के मामले में भी है। बेचारा झूठ बदनाम जरूर है, मगर बद रत्ती भर भी नहीं। झूठ की सबसे पहली खासियत  ... और पढ़ें »

कंगन

Kangan

Updated on: Sat, 01 Feb 2014 02:18 PM (IST)
        

पेरिस के एक डिपार्टमेंटल  स्टोर में खरीदारी कर रही थी कि किसी ने पुकारा, नलिनी जी.. विदेश में अपना नाम सुन कर मैं चौंक पडी। पलट कर देखा तो अधेड उम्र की एक स्त्री खडी थी। पहचाना? पांच सेकंड लगे पहचानने में.., फिर हंसते हुए मैंने कहा, अरे मिनी श... और पढ़ें »

अछूते आम

achoote aam

Updated on: Sat, 01 Feb 2014 02:18 PM (IST)
        

मेरा उपन्यास काफी  समय से अधूरा पडा था। कई बार उसे आरंभ किया और समाप्त भी किया, परंतु वह मेरी पसंद का नहीं बन पाया था। एक और भूल मुझसे यह हुई कि उपन्यास पूरा करने के पूर्व ही उसके बारे में कहीं लिख बैठा था। पाठकों के उत्सुकतापूर्ण पत्रों ने मेरी नाक ... और पढ़ें »

अलविदा

Alvida

Updated on: Sat, 01 Feb 2014 02:18 PM (IST)
        

सुबह का अखबार, दूध के पैकेट्स सब दरवाजे पर ज्यों के त्यों हैं? मंदाकिनी आजकल सोसाइटी के पार्क में टहलने जाती है। उसे ध्यान रखने की जरूरत नहीं होती थी कि कब नंदू जागे और कब उसके प्यारे से पालतू बोबो को वॉक पर ले जाए। वह हर रोज अलस्सुबह बोबो को सैर करा... और पढ़ें »

नए दौर का नाच विमर्श

khatti meethi

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:54 AM (IST)
        

शेक्सपीयर की मानें तो पूरी दुनिया ही रंगमंच है और सभी स्त्री-पुरुष नट-नटिनी। बकौल तुलसीदास सबहिं नचावत राम गोसाई। सूरदास ने भगवान को याद दिलाया कि अब हौं  नाच्यो बहुत गुपाल और मीरा का घुंघरू बांधना तो नाचद्रोहियों को अखर ही गया। सार यह कि नाच विद्या ... और पढ़ें »

मॉर्निग वॉक

Morning walk

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:53 AM (IST)
        

नीरज में आ रहे बदलाव मीरा को हैरान तो कर रहे थे, पर वह चुप्पी साधने को बाध्य थी। नए साल के संकल्प के तौर पर नीरज ने लगभग दस पंद्रह दिनों से मॉर्निग वॉक पर जाना शुरू किया था। उसने मीरा से भी साथ चलने के लिए चिरौरी की, पर मीरा  के पास भला कहां समय था? ... और पढ़ें »

अ‌र्घ्य

story

Updated on: Wed, 01 Jan 2014 12:53 AM (IST)
        

साल भर बाद फिर आ पहुंची शरद ऋतु। कार्तिक का महीना, पर्व त्योहारों की गहमागहमी और उत्सव का माहौल। सब कुछ सुंदर-मनभावन। पर मेरे मन-आकाश में बादल छा जाते हैं। ये कितने काले होते हैं, कैसे उमडते-घुमडते हैं, यह तो मेरा ही मन जानता है। सोचना-कहना नहीं चाहत... और पढ़ें »

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