पर्यावरण रक्षक वाहनों के लिए अथारिटी बनाए सरकार : हाईकोर्ट

Publish Date:Mon, 23 Apr 2012 01:04 AM (IST) | Updated Date:Mon, 23 Apr 2012 01:07 AM (IST)

अमृत सचदेवा, फाजिल्का

फाजिल्का की ईकोकैब पर फिदा अमेरिका ने जहां उसे दुनिया के प्रमुख 15 यातायात प्रोजेक्टों में शामिल किया है, वहीं पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को भी यह प्रोजेक्ट इतना भाया है कि उसने राज्य सरकार को सभी शहरों में ईकोकैब चलाने के निर्देश दे रखे हैं। इस संबंध में 20 अप्रैल को जारी ताजा निर्देशों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नान मोटर व्हीकल अथारिटी गठित करने के लिए नोटिस जारी किया है।

उल्लेखनीय है कि ईको कैब की विशेषताओं जैसे रिक्शा पुलर की कमजोर सेहत के मद्देनजर कम वजन, एफएम रेडियो, पेयजल सुविधा को देखते हुए हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2010 को सुओ मोटो एक्शन के तहत राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में ऐसे रिक्शा चलाने के आदेश दिए थे। इस पर राज्य की चीफ सेक्रेट्री टूरिज्म ने सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों की बैठक बुलाकर हर जिले में ईकोकैब चलाने के निर्देश दिए थे। उसी का नतीजा है कि अब पंजाब के 19 जिलों के प्रमुख 22 शहरों में ईको कैब लांच हो चुकी हैं।

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20 अप्रैल को हाईकोर्ट ने क्या कहा

फाजिल्का: अपने सुओ मोटो एक्शन बारे ताजा निर्देशों में हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को राज्य सरकार को नान मोटर व्हीकल अथारिटी के गठन का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ग्रेजुएट वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव इंजीनियर नवदीप असीजा के सुझाव के अनुसार पुणे की तर्ज पर पंजाब में पैदल या नान मोटर व्हीकल अथारिटी गठित करने का नोटिस जारी किया है। यह अथारिटी सड़क किनारे पैदल या नान मोटर व्हीकल पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करेगी।

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क्यों है अथारिटी की जरूरत

फाजिल्का : परिवहन आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में पंजाब में 52 लाख मोटर व्हीकल हैं। उनमें पांच लाख कारें हैं व शेष बस, ट्रक, तिपहिया व दुपहिया वाहन हैं, जबकि चार करोड़ चार लाख नान मोटर व्हीकल यानी रिक्शा, बैलगाड़ी, साइकिल आदि हैं। उनमें तीन लाख रिक्शा हैं। इनकी सुरक्षा के लिए कोई अथारिटी नहीं है। ऐसे में सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर नान मोटर व्हीकल्स को तेज रफ्तार मोटर व्हीकलों के कारण वह हादसों का शिकार होते हैं। इन हादसों को रोकने के लिए पुणे की तर्ज पर नान मोटर व्हीकल अथारिटी का गठन पंजाब में जरूरी है।

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