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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तस्करों से मुक्त छह कछुए छोडे़ गए

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Published: Thu, 28 Nov 2013 01:08 AM (IST)Updated: Thu, 28 Nov 2013 01:09 AM (IST)

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जागरण संवाददाता, संबलपुर :

यहां से तस्करी से कोलकाता भेजे जाने के लिए छिपाकर रखे गए छह कछुओं को वन विभाग के अधिकारियों ने मुक्त कराने के बाद हीराकुद बांध के विशाल जलभंडार में विचरने के लिए छोड़ दिया है। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि संबलपुर और इसके आसपास के इलाकों से प्राय: ऐसी तस्करी हो रही है।

इस बारे में जानकारी देते हुए वन विभाग के रेंज अधिकारी सुभाषचंद्र खूंटिया ने बताया है कि कछुआ तस्करी की एक गुप्त सूचना मिलने के बाद सोमवार के दिन, हीराकुद बांध के जलभंडार से सटे पीतापाली गांव निकटस्थ एक स्थान पर औचक छापामारी की गई और वहां तस्करी के लिए छिपाकर रखे गए छह बड़े कछुओं को मुक्त कराया गया। इन कछुओं को प्लास्टिक की रस्सी से बांधकर रखा गया था। डॉ. केसी पटेल ने मुक्त कराए गए कछुओं की जांच करने के बाद उन्हें दवा दी। मंगलवार की शाम कछुओं की हालत सामान्य होने के बाद उन्हें हीराकुद बांध के जलभंडार में छोड़ दिया गया। जलभंडार में पहुंचते ही कछुए तैरते हुए किनारे से दूर पानी की ओर चले गए। बताया गया है कि बाजार में मीठे पानी के कछुओं की काफी मांग है और इसी की खातिर बांध के जलभंडार से कछुओं को पकड़कर विभिन्न स्थानों में बेचा जाता है। कुछ लोग ऐसे कछुओं को पाल लेते हैं तो कुछ लोग अपना निवाला बनाते हैं। कछुआ तस्करी के इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। उधर, धमा इलाके से जब्त चार जंगली वराहों को डेब्रीगढ़ अभयारण्य में छोड़ दिया गया है।

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