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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पाकिस्तान में हिंदू युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित

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Published: Sat, 20 Jul 2013 06:07 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 20 Jul 2013 07:08 AM (GMT+05:30)

पाकिस्तान में हिंदू युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तैयार की गई रपट के मुताबिक ...और पढ़ें

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हिंदू युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तैयार की गई रपट के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदू युवतियां रेप की सबसे ज्यादा शिकार हो रही हैं। मुल्क में ईसाई, अहमदिया और शिया समुदायों की स्थिति भी बदतर है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गठित अमेरिकी आयोग की रपट के मुताबिक पाकिस्तान में पिछले 18 महीनों में हिंदू युवतियों के साथ रेप की सात घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी दौरान हिंदू समुदाय पर हमले की 16 वारदातों में दो लोगों की मौत हो गई।

अमेरिकी आयोग की रपट के मुताबिक इन 18 महीनों में सिख समुदाय पर भी तीन हिंसक हमले किए गए। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह रपट 'पाकिस्तान धार्मिक हिंसा प्रोजेक्ट' के नाम से तैयार की गई है।

हिंदू समुदाय के बाद सबसे ज्यादा ईसाई युवतियों के साथ रेप की घटनाएं सामने आई हैं। निर्धारित अवधि में पांच ईसाई युवतियों के साथ रेप किया गया। पिछले डेढ़ साल में इस समुदाय पर 37 हमले किए गए, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 36 घायल हो गए। रपट के मुताबिक पिछले 18 महीनों में विभिन्न सामुदायिक गुटों के बीच हिंसा की 203 घटनाएं हुई, जिनमें 717 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में सबसे ज्यादा (635) शिया मुस्लिम थे।

अपहृत हिंदू लड़की बचाई गई

कराची में अपहृत साढ़े तीन साल की एक हिंदू लड़की को छुड़ा लिया गया है। उसके चारों अपहरणकर्ता पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। डॉक्टर दंपति की बेटी माही सचदेव का 13 जुलाई को उसके नौकर रानो ने हॉस्पिटल की डॉक्टर्स मेस से अपहरण कर लिया था। माही को छोड़ने के एवज में अपहर्ताओं ने पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।

महिलाओं के अकेले बाजार जाने पर पाबंदी

पेशावर। पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में महिलाओं के अकेले बाजार जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। उलमाओं की एक समिति ने फरमान जारी किया है कि महिलाएं तभी बाजार जा सकती हैं, जब उनका कोई नजदीकी रिश्तेदार जैसे भाई या बेटा उनके साथ हो। उलमाओं ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से इस फैसले को लागू कराने की भी मांग की है। अधिकारियों ने हालांकि इससे इन्कार कर दिया है।

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