यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कराची हमले में पाक तालिबान के स्लीपर सेल की भूमिका
कराची हवाईअड्डे पर आतंकी हमले से स्पष्ट संकेत मिलता है कि इसमें पाकिस्तानी तालिबान के स्लीपर सेल की भूमिका थी। ...और पढ़ें

इस्लामाबाद। कराची हवाईअड्डे पर आतंकी हमले से स्पष्ट संकेत मिलता है कि इसमें पाकिस्तानी तालिबान के स्लीपर सेल की भूमिका थी। इसकी साजिश उस दौरान रची गई जब उनका केंद्रीय नेतृत्व सरकार के साथ शांति वार्ता में मशगूल था। एक मीडिया रिपोर्ट में बुधवार को यह बात कही गई है।
पर्दे के पीछे दिए साक्षात्कार में मौजूदा और पूर्व खुफिया और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने खुलासा किया कि आतंकियों के खिलाफ वास्तविक सफलता तब तक संभव नहीं है जब तक कि उनके स्लीपर सेल का सफाया नहीं किया जाता। डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये सेल आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार अपने साथियों को आश्रय, हथियार, विस्फोटक, परिवहन और खुफिया जानकारी भी मुहैया कराते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवाईअड्डे पर हमले की साजिश रचने का काम महीनों नहीं तो हफ्तों पहले जरूर शुरू कर दिया गया था। इससे यह प्रतीत होता है कि हवाईअड्डे पर हमले की साजिश को अंतिम रूप देने के लिए युद्धविराम की समयावधि का इस्तेमाल किया गया था। एक अधिकारी का कहना है कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अपने गुर्गो को कराची भेज दिया है। इस एकमात्र लक्ष्य के साथ कि स्थानीय आबादी के साथ घुल मिलकर बगैर संदेह के बस जाएं। टीटीपी ने कराची हवाईअड्डे पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। अधिकारियों ने इस बात से इन्कार नहीं किया है कि तालिबान के कुछ वफादार संवेदनशील स्थानों पर नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे हैं।
