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अजब-गजब हैं हमारे ये गांव, कुछ आपको हंसाएंगे तो कुछ पर होगा गर्व

Publish Date:Thu, 18 May 2017 10:16 PM (IST) | Updated Date:Sat, 20 May 2017 04:44 PM (IST)
अजब-गजब हैं हमारे ये गांव, कुछ आपको हंसाएंगे तो कुछ पर होगा गर्वअजब-गजब हैं हमारे ये गांव, कुछ आपको हंसाएंगे तो कुछ पर होगा गर्व
आइए भारतीय गांवों की कुछ रोचक बातों से आपको रूबरू कराते हैं।

[सीमा झा], नई दिल्ली। गांव से जुड़ा ये लेख देश के सबसे समृद्ध शहरों में से एक दिल्ली में बैठकर लिख रहा हूं। मेरे जैसे न जाने और कितने होंगे जिन्हें अपने गांव पसंद तो खूब आते होंगे लेकिन मौकों की तलाश में वहां से पलायन करना उनकी या उनके परिवार की मजबूरी बन गई। आज बेशक हम वहां नहीं है लेकिन अपने गांव आज भी देश का वो हिस्सा हैं जो न सिर्फ देश की सर्वाधिक आबादी (68.84%, 2011 की जनगणना) को समाए हुए हैं बल्कि कई दिलचस्प पहलु तक आज भी जीवित रखे हुए हैं। आइए कुछ ऐसी ही रोचक बातों से आपको भी रूबरू कराते हैं।

- अजब-गजब नाम

बेशक भारत के गांवों की पहचान आज भी वही है जिसे हम पहले देखा या पढ़ा करते थे। खेल-खलिहान, भागते-दौड़ते गिल्ली-डंडा खेलते व पहिया घुमाते बच्चे, मवेशियों की भीड़, झूलती तारों के बीच कच्चे मकान, कुएं से पानी भरते हुए लोग और न जाने क्या-क्या हमारे गांवों की पहचान बन गई। इसी इतिहास के बीच समय के साथ-साथ तमाम गांवों के नाम भी बदलते रहे जबकि कुछ नाम आज भी कायम हैं। हर नाम अपने साथ एक कहानी समेटे हुए है। कुछ गुदगुदाते हैं तो कुछ आपको अतीत से जोड़ते हैं। आमतौर पर गांवों के नाम प्रकृति से प्रेरित होकर या उस व्यक्ति के नाम पर रखे जाते थे जिसने गांव को बसाने की शुरुआत की थी। कुछ अजीब नाम हैं जैसे मुक्तसर स्थित 'कुत्तेयांवाली', फिरोजपुर का गांव 'मज्जियां' (पंजाब में भैंस को मज्ज कहते हैं), मोगा के पास 'शेरपुर' गांव, जालंधर स्थित जंडियाला के पास का एक गांव 'चूहेकी' भी कई लोगों के हंसने पर मजबूर कर देता है। जालंधर जिले में एक गांव है जहां कभी काफी गीदड़ हुआ करते थे और जंगल से निकलकर गांव में आकर बैठा करते थे, फिर क्या था, इस गांव का नाम 'गिद्दड़पिंडी' पड़ गया। मुक्तसर के गांव कुत्तेयांवाली गांव के लोग तो एक समय अपने गांव के नाम को लेकर इतना शर्मिंदा हो गए कि उन्होंने गांव का नाम बदलने की गुजारिश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी थी।

कुछ गांव पहले कस्बे की सूरत में उभरते नजर आए और फिर शहर बनकर भी निखरे। इनमें मौजूद बस्तियां या मुहल्लों के नाम भी अजीबोगरीब ही रहे। लखनऊ को ही ले लीजिए। यहां के करीब गांव-मुहल्लों के नाम कम अनोखे नहीं हैं। जैसे- टकड़ी, टकीला, सप्पा रौस, झपझाली टोला, घड़ियाली बेगम का अहाता, टेढ़ी बाजार, चोर घाटी, झंवाई टोला..वगैरह।

- कुछ गांव गर्व भी महसूस कराते हैं

सिर्फ गुदगुदाने वाले नाम या विकास से दूर रहना ही हमारे ग्रामीण इलाकों की हकीकत नहीं है। देश के कई गांव ऐसे भी हैं जो हमे गर्व महसूस करने का मौका देते हैं। 'कौन बनेगा करोड़पति' के पहले सीजन में एक सवाल पूछा गया था कि एशिया का सबसे शिक्षित गांव कौन सा है? जवाब था अलीगढ़ का 'धौर्रा माफी' गांव। इस गांव को 2008 में सबसे शिक्षित गांव के रूप में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली थी। इस गांव की गलियां प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर व एनआरआइ से गुलजार है। 1970 के करीब इस गांव की आबादी 10 हजार थी जबकि आज ये 30 हजार पार है। गांव के कई लोग अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में प्रोफेसर-डॉक्टर हैं। पिछले 12 सालों से यहां के ग्राम प्रधान मुहम्मद नुरुल भी पेशे से एक डॉक्टर हैं। नुरुल कहते हैं, 'धौर्रा माफी' गांव एक मॉडल के रूप में ख्याति पाए, बस यही मेरी ख्वाइश है।'

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का गांव 'गहमर' को दुनिया का सबसे बड़ा गांव माना जाता है। आप जानकर चकित होंगे कि इस गांव के हर परिवार के लोग भारतीय सेना में हैं। बिहार के सहरसा जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित 'बनगांव' भी मिसाल पेश करता है। यहां से तकरीबन हर वर्ष भारतीय प्रशासनिक सेना व भारतीय पुलिस सेवा में अधिकारी चुने जाते हैं। इसके अलावा भारतीय सेना में भी इस गांव के तकरीबन 100 सैनिक हैं।  

- परंपराएं, कुछ हंसाने वाली तो कुछ प्रेरित करने वाली

कुछ गांव ऐसे भी हैं जो अपनी परंपराओं के लिए चर्चित हैं। भारत में ऐसे कई गांव हैं जहां उनकी परंपराएं वहां के लोग दशकों से निभा रहे हैं। कुछ गांवों की परंपराएं आपको हंसने पर मजबूर कर देंगी। जैसे उत्तर प्रदेश का एक अनोखा गांव है बामनौली जहां पर इंसान के नाम के पीछे यदि आप कुत्ता, बिल्ली या भेड़िया लगा दें तो कोई बुरा नहीं मानता। यहां के लोग सालों से एक-दूसरे को पशु-पक्षियों के नाम से पुकारते हैं और इस परंपरा पर गर्व भी महसूस करते हैं। गांव की मुखिया निशा देवी कहती हैं, 'बुरा तो लोग तब मानें जब उन्हें जानबूझकर ऐसा कहा जाए। किसी को जानबूझकर जानवर के नाम से पुकारो तो वो उसे निश्चित तौर पर गाली समझेगा लेकिन हमारे गांव में तो ये पुरानी परंपरा है जिसे लोग सालों से शिद्दत से निभाते चले आ रहे हैं।' वैसे ये गांव उतना ही आधुनिक भी है। यह भारत के उन चुनिंदा गांवों में से है जिसकी अपनी वेबसाइट है। वहीं, बागपत के खेकड़ा गांव के 'जमाईपुरा' मुहल्ले की परंपरा भी अजीब है। कहते हैं कि एक जमाना था जब परिवारों में घरजमाई भी होते थे लेकिन आज यही जमाईपुरा की विशेषता बन गई है। उधर, देशों और बड़े शहरों के नाम से उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में बसे गांवों के लोग गुमान कर सकते हैं। उनके लिए कई देश और बड़े शहर इसलिए दूर नहीं हैं। दरअसल, 'मलेशिया' और 'अरब' नाम जैसे तमाम गांव यहीं बसा लिए गए हैं। 

वहीं, कुछ ऐसे भी गांव हैं जिनकी परंपरा देशवासियों को गर्व महसूस करने का मौका देते हैं। जैसे बिहार का धरहरा गांव, जो कि बेटी के जन्म पर पेड़ लगाने की अनूठी परंपरा को लेकर विख्यात है। इस गांव में तकरीबन 60 घर हैं और हर परिवार सालों से इस परंपरा को निभाता चला आया है। बाद में उन्हीं पेड़ों पर लगने वाले फलों के जरिए गरीब बेटियों की शिक्षा का खर्च पूरा किया जाता है। भारत के गांव खुद में इतिहास, परंपरा और संस्कृति का एक अनोखा मिश्रण हैं, अब बस देखना ये होगा कि आधुनिकता के इस नए दौर में ग्रामीण जीवन आगे किस राह पर कब पहुंचता है। 

लेखक दैनिक जागरण में पत्रकार हैं

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Web Title:Villages of India and thier names and history(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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