यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
वसुंधरा-गहलोत के बीच तीसरा मुकाबला
राजस्थान विधानसभा चुनाव निकट आने के साथ ही प्रदेश में चला रहा राजनीतिक संघर्ष का परिदृश्य अब घमासान में बदल ...और पढ़ें

जयपुर, जागरण संवाद केंद्र। राजस्थान विधानसभा चुनाव निकट आने के साथ ही प्रदेश में चला रहा राजनीतिक संघर्ष का परिदृश्य अब घमासान में बदल जाएगा। राजनीतिक हलकों में प्रदेश में अब तक के इतिहास के हिसाब से मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होना माना जा रहा है।
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प्रदेश में यह तीसरा विधानसभा चुनाव होगा जिसमें कांग्रेस से अशोक गहलोत [मुख्यमंत्री] और भाजपा से पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे के बीच राजनीतिक वर्चस्व की जंग होगी। अब तक दो मुकाबलों में दोनों को स्कोर एक-एक अंक के साथ बराबर पर है।
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वर्ष 2003 में राजे ने गहलोत से सत्ता छीनी तो 2008 में गहलोत ने मुकाबला बराबरी पर लाते हुए राजे को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया। प्रदेश के इस चुनाव में मुद्दे भी वहीं हैं और दोनों दलों में मुख्य भूमिका में रहने वाले नेताओं के नाम भी सामने है। भाजपा में चुनाव के मुद्दे भी वहीं रहने वाले है जिन्हें लेकर वसुंधरा राजे ने अपनी सुराज संकल्प यात्रा में कांग्रेस पर हमला बोला। चुनाव में भाजपा पानी, बिजली, सड़क, अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव, भ्रष्टाचार और राज्य सरकार के विवादित मंत्रियों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलेगी। भाजपा पिछड़ी अगड़ी जातियों को आरक्षण जैसा मुद्दा भी चुनाव में उछाल सकती है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ कांग्रेस भाजपा के हमलों का मुकाबला करने के लिए रिफाइनरी, मेट्रो, मुफ्त दवा, मुफ्त जांच, विद्यार्थियों से लेकर वृद्धजनों को दी गई सुविधाओं को ढाल बनाएगी। साथ ही पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर हमला बोलेगी। चुनाव माथे पर आने के बावजूद भी दोनों ही दलों की आंतरिक फूट की स्थिति एक जैसी है।
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भाजपा में जहां संघ पृष्ठभूमि के माने जाने वाले नेताओं और राजे समर्थकों के बीच खाई है। दूसरी तरफ कांग्रेस में गुटबाजी की समस्या चरम पर है। मोटे रूप से पार्टी मुख्यमंत्री गहलोत समर्थकों और पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.पी. जोशी के बीच बंटी दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। लेकिन भाजपा से बागी दौसा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। समीकरण ठीक बैठे तो सत्ता तक का सफर इन दोनों पार्टियों की मदद से ही तय हो सकेगा।
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