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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

क्या राहुल दिखा पाएंगे राजीव जैसा साहस

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Published: Tue, 22 Oct 2013 10:13 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 22 Oct 2013 10:15 PM (GMT+05:30)

जयपुर [नरेंद्र शर्मा]। राजस्थान सरकार के कुछ मंत्रियों और विधायकों पर लगे आरोपों को देखते हुए कांग्रेस में इस बार वर्ष 1

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जयपुर [नरेंद्र शर्मा]। राजस्थान सरकार के कुछ मंत्रियों और विधायकों पर लगे आरोपों को देखते हुए कांग्रेस में इस बार वर्ष 1985 का दौर याद किया जा रहा है। उस समय टिकट तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बांटे थे और राजनीति में शुद्धीकरण के नाम पर 58 विधायकों के टिकट काट दिए थे। इनमें 17 मंत्री भी शामिल थे। इस बार उनके बेटे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हाथों में टिकट बंटवारे की कमान है। नजर इस बात पर है कि क्या राहुल वैसा साहस दिखा पाएंगे।

वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में टिकट काटने का फैसला उन सर्वे रिपोर्टो के आधार पर किया गया था, जिनके अनुसार ये विधायक जीतने की स्थिति में नहीं थे। काफी हंगामा मचा था, दिग्गज नेताओं के टिकट कटे थे। कई बागी चुनाव में उतरे। हालांकि बड़े नेताओं में से अधिकतर के रिश्तेदारों को टिकट देकर मनाया गया। इस कवायद का नतीजा भी बहुत बुरा नही रहा। कांग्रेस को 20 सीटें गंवाने पर भी पूर्ण बहुमत मिल गया। कांग्रेस ने 113 सीटों के साथ फिर सरकार बनाई। वोट भी चार प्रतिशत बढ़ा। इस बार टिकट कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बांट रहे हैं। सारी कवायद उन्हीं के निर्देशानुसार चल रही है। उन्होंने ही पर्यवेक्षक भेजे हैं। सर्वे कराए हैं। कांग्रेस के लिए स्थितियां हालांकि 1985 जैसी नहीं है, क्योंकि इस बार 96 सीटें ही है। तब भाजपा का बहुत बड़ा वजूद नहीं था। अब भाजपा की पूरे प्रदेश में मौजूदगी है। ऐसे में सभी की निगाह अब राहुल पर है।

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