सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगान पर गेंद सरकार के पाले में डाली
जब सरकार ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के आदेश में बदलाव न करने का आग्रह किया तो कोर्ट ने कहा कि सरकार इस पर पालिसी क्यों नहीं बनाती।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने पर गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। कोर्ट ने कहा कि ये मुद्दा कार्यपालिका के कार्यक्षेत्र में आता है। सरकार नीति बनाकर फ्लैग कोड में बदलाव करने पर विचार कर सकती है। हालांकि देश भर के सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने और उस दौरान दर्शकों के खड़े होकर सम्मान प्रकट करने का आदेश फिलहाल लागू रहेगा। कोर्ट ने अपने उस आदेश में सोमवार को कोई बदलाव नहीं किया।
कोर्ट इस मामले में 9 जनवरी को फिर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर व न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ये बात सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के आदेश में बदलाव करने की मांग अर्जी पर सुनवाई के दौरान की। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख जरा बदला नजर आया। वैसे तो सीधे तौर पर कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के अपने आदेश में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन कोर्ट की टिप्पणियों और रुख से ऐसा लग रहा था कि आगे चल कर आदेश में बदलाव हो सकता है और अनिवार्यता की जगह मनमर्जी या इच्छा ले सकती है।
जब सरकार ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के आदेश में बदलाव न करने का आग्रह किया तो कोर्ट ने कहा कि सरकार इस पर पालिसी क्यों नहीं बनाती।
— Mala Dixit (@mdixitjagran) October 23, 2017
कोर्ट की टिप्पणियां तब सामने आयीं जब केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि विभिन्नता वाले भारत देश में सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के आदेश से राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत होती है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 51ए के प्रावधानों का भी पालन होता है। इस पर पीठ के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अटार्नी जनरल से कहा कि सरकार इस संबंध में क्यों नियम नहीं संशोधित करती। कोर्ट क्यों सरकार का भार वहन करे। लोग सिनेमाघर मनोरंजन के लिए जाते हैं उन्हें वहां बिना किसी रुकावट के मनोरंजन मिलना चाहिए।
#NationalAnthem सुप्रीमकोर्ट ने राष्ट्रगान पर गेंद सरकार के पाले में डाली कहा सरकार पालिसी बना कर तय करे कि कहां राष्ट्रगान बजे और कहां नही
— Mala Dixit (@mdixitjagran) October 23, 2017
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कल कोई कह सकता है कि लोग हाफ पैंट टीशर्ट में राष्ट्रगान गाते हैं इससे राष्ट्रगान का अपमान होता है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति का क्या पैमाना हो इसके लिए कोई रेखा तो तय होनी चाहिए। हम यहां मोरल पुलिसिंग के लिए नहीं हैं। हम राष्ट्रभक्ति का दिखावा क्यों करें। पीठ ने कहा कि कहां राष्ट्रगान बजना चाहिए और कहां नहीं इस बारे में केन्द्र सरकार को एक समान नीति बनाकर तय करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस बारे में निर्णय लेकर उचित अधिसूचना जारी कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट में मामले पर अगली सुनवाई के लिए 9 जनवरी की तिथि तय कर दी। इससे पहले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के कोर्ट के गत वर्ष नवंबर के आदेश में बदलाव की मांग कर रहे फिल्म सोसाइटी की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस संबंध में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए था। ये सरकार के कार्यक्षेत्र में आता है और 2005 से इस बारे में नियम बने हुए हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।