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    वेतन आयोग की सिफारिश से अधिक बढ़ सकता है वेतन

    केंद्र सरकार का मानना है कि केंद्रीय कर्मियों को आयोग की सिफारिशों से अधिक वृद्धि की आवश्यकता है।

    By Sanjeev TiwariEdited By: Updated: Fri, 17 Jun 2016 09:27 AM (IST)

    नई दिल्ली [नितिन प्रधान]। सब कुछ ठीक रहा तो तीस लाख केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से अधिक भी बढ़ सकता है। सरकार ने इन सिफारिशों पर विचार के दौरान इस बात का मन बनाया है कि केंद्रीय कर्मियों को आयोग की सिफारिशों से अधिक वृद्धि की आवश्यकता है।

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    यदि वित्त मंत्रालय की तरफ से धनराशि उपलब्ध कराने की कोई दिक्कत नहीं आई तो मूल वेतन में न्यूनतम वृद्धि 2.57 फीसद से बढ़ाकर 2.9 फीसद भी हो सकती है। अगले एक पखवाड़े में केंद्रीय मंत्रिमंडल बदले हुए फार्मूले के साथ वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के प्रस्ताव पर सहमति की मुहर लगा सकता है।

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    सूत्रों के मुताबिक बुधवार को वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में कैबिनेट सचिव के साथ एक अहम बैठक हुई। इसी बैठक में वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर हुए विचार विमर्श में यह प्रस्ताव सामने आया। सूत्र बताते हैं कि अंतिम रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को भेज दी गई है और मंत्रालय से अगले दो हफ्ते में कैबिनेट नोट तैयार कर कैबिनेट के समक्ष रखने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि ऐसा होने के तुरंत बाद कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला ले लेगा।

    चुनाव आयोग ने अपनी सिफारिशों में पेमैट्रिक्स के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन में 2.57 फीसद से 2.72 फीसद वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। इसके मुताबिक कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन 18000 रुपये और अधिकतम 250000 रुपये होगा। लेकिन बैठक के बाद वेतन में 2.9 फीसद न्यूनतम और 3.2 फीसद अधिकतम वृद्धि की सिफारिश की गई है। ऐसा होने पर पेमैट्रिक्स के हिसाब से न्यूनतम मासिक वेतन 23000 रुपये और अधिकतम 325000 रुपये तक पहुंच जाएगा।

    हालांकि सूत्रों का कहना है कि अभी यह प्रस्ताव है। आयोग की सिफारिशों को लागू करने से केंद्र सरकार के खजाने पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बोझ पड़ेगा। लेकिन यदि नई सिफारिशों को स्वीकार किया जाता है तो खजाने का यह बोझ और बढ़ जाएगा। हालांकि यह बोझ कितना होगा इसका आकलन वित्त मंत्रालय कर रहा है। सरकार के इस फैसले का लाभ मौजूदा करीब 47 लाख और 52 लाख रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलेगा।

    छठा वेतन आयोग 1 जनवरी, 2006 से लागू हुआ था और उम्मीद है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू होंगी और कर्मचारियों को एरियर दिया जाएगा। आमतौर पर राज्यों द्वारा भी कुछ संशोधनों के साथ इन्हें अपनाया जाता है। कहा जा रहा है कि नए वेतन ढांचे में सातवें वेतन आयोग ने छठे वेतन आयोग द्वारा शुरू की गई 'पे ग्रेड' व्यवस्था खत्म कर इसे वेतन के मैट्रिक्स (ढांचे) में शामिल कर दिया है और कर्मचारी का ओहदा अब ग्रेड पे की जगह नए ढांचे के वेतन से तय होगा।

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