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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रामगोपाल के बाद सपा के बाकी नेताओं की भी होगी घर वापसी

By kishor joshiEdited By:
Published: Thu, 17 Nov 2016 09:18 PM (IST)Updated: Fri, 18 Nov 2016 02:29 AM (IST)

रामगोपाल यादव की घर वापसी के बाद सपा से निष्कासित बाकी सपा नेताओं के भी पार्टी में लौटने का रास्ता खुल गया है।

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सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल की घर वापसी के बाद अब सपा के बाकी नेताओं की भी घर वापसी की संभावना बढ़ गई है। यादव परिवार में मची घमासान की चपेट में आकर पार्टी से निकाले गये गये नेताओं के लौटने का रास्ता साफ होने लगा है। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने सभी निष्कासित नेताओं को जोड़ेगी।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी की केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में अपने नेताओं व कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर जोर दिया गया। इसी दौरान निष्कासित नेताओं को पार्टी में लौटाने का मुद्दा भी नेताजी के समक्ष रखा गया। इस पर अपनी टिप्पणी में मुलायम सिंह ने कहा कि उन्हें अपनी गलती के लिए माफी मांगनी पड़ेगी। नेताजी के इस सकारात्मक रुख से निकाले गये निष्कासित नेताओं के पार्टी से फिर से जुड़ जाने का रास्ता बनने लगा है।

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समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल और मुख्यमंत्री अखिलेश के बीच की लड़ाई में गुटबंदी के शिकार विधान परिषद के कई सदस्यों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसी तरह पार्टी युवा ब्रिगेड व कई तरह के प्रकोष्ठ अध्यक्षों पर अनुशासन का डंडा चलाया गया था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन युवा नेताओं की राजनीतिक व चुनावी काबिलियत देखते हुए उन्हें जल्दी ही पार्टी में जगह मिल जायेगी।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि निकाले गये नेताओं में दोनों नेताओं अखिलेश और शिवपाल यादव के समर्थक ही है। लेकिन निष्कासित नेताओं में एक दो नेताओं को लेकर पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह की गहरी नाराजगी है, जिन्होंने नेताजी पर व्यक्तिगत हमला किया था। ऐसे नेताओं को पार्टी में लौटना आसान नहीं होगा। लेकिन उनकी पार्टी में वापसी के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे अथवा पार्टी के बड़े नेताओं को नेताजी से सिफारिश करनी होगी।

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पार्टी मुखिया मुलायम सिंह की इस उदारता से पार्टी को एकजुट करने में मदद मिलेगी। पार्टी में अंदरुनी कलह को सुलझाने को लेकर पार्टी नेतृत्व बहुत सतर्क व सावधान है। राज्य के बदले सियासी हालात में पार्र्टी को मजबूती से खड़े होने के लिए अपने आजमाये लोगों को जोड़ना उसकी मजबूरी है।