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    22 मई को दो दिवसीय यात्रा पर ईरान जाएंगे पीएम मोदी

    By Manish NegiEdited By:
    Updated: Tue, 17 May 2016 08:36 PM (IST)

    चार वर्षो बाद किसी भारतीय पीएम की ईरान यात्रा होगी। मोदी से पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक में भाग लेने वर्ष 2012 में ईरान गये थे।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय पाबंदी हटने के बाद जिस रफ्तार से भारत और ईरान के रिश्ते प्रगाढ़ हो रहे है वे और बेहतरी की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी अगले रविवार को दो दिवसीय यात्रा पर तेहरान पहुंच रहे हैं। यह चार वर्षो बाद किसी भारतीय पीएम की ईरान यात्रा होगी। मोदी से पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक में भाग लेने वर्ष 2012 में ईरान गये थे। सिंह से एक दशक पहले पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी द्विपक्षीय यात्रा पर ईरान गये थे।

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    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनाई के साथ मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही मोदी की मुलाकात राष्ट्रपति डॉ. रोहानी से भी होगी। दोनों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों के तमाम पहलुओं पर बातचीत होगी। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रिश्ता है। आज भी दोनों देश के आर्थिक व सुरक्षा से जुड़े हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जैसा कि उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा व ढांचागत क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे।

    पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी व ढांचागत विकास में सहयोग करने पर पहले से हो रही बातचीत को और आगे बढ़ाया जाएगा। द्विपक्षीय कारोबार के बारे में दोनों देशों के बीच पहली बार लक्ष्य तय किया जाएगा और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए, इसका भी खाका तैयार होगा। सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर होगा। माना जा रहा है कि इस दौरान चाबहार एयरपोर्ट के विकास और यहां करीब ही भारतीय सहयोग से लगाये जाने वाले विशेष आर्थिक क्षेत्र को लेकर भी मोदी और रोहानी के बीच बातचीत होगी। ईरान के प्रमुख गैस ब्लाक फराजाना में भारतीय तेल कंपनियों के निवेश का रास्ता भी इस यात्रा के दौरान साफ हो सकता है। ईरान सरकार पूरा ब्लाक भारतीय तेल कंपनी को देने को तैयार हो चुकी है।

    मोदी की यात्रा के दौरान भारत और ईरान में तेल खरीद को लेकर नया समझौता भी हो सकता है। सनद रहे कि एक दिन पहले ही भारत ने पूर्व में ईरान से खरीदे गये कच्चे तेल के भुगतान का रास्ता निकाला है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध की वजह से भारत ईरान से लिये गये तेल के बदले 6.5 अरब डॉलर की राशि का भुगतान नहीं कर सका है। बीच में भारत ने ईरान से तेल खरीदना कम कर दिया था लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध समाप्त होने के बाद फिर से तेल लेना शुरु कर रहा है। भारत ने कहा है कि वह रोजाना चार लाख बैरल तेल ईरान से खरीद सकता है। इस तरह से भारत एक बार फिर ईरान के एक प्रमुख तेल खरीददार के तौर पर उभरेगा।

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