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    भूषण और यादव ने अब चला इस्तीफे का दांव

    आम आदमी पार्टी (आप) के विद्रोही नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने भी अब अरविंद केजरीवाल की ही तरह इस्तीफे का दांव चला है। दोनों नेताओं ने पार्टी संयोजक केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा है कि अगर संगठन में आंतरिक लोकतंंत्र बहाल करने के लिए उनके बताए उपाय अपना

    By Sanjay BhardwajEdited By: Updated: Thu, 19 Mar 2015 03:58 AM (IST)

    नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। आम आदमी पार्टी (आप) के विद्रोही नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने भी अब अरविंद केजरीवाल की ही तरह इस्तीफे का दांव चला है। दोनों नेताओं ने पार्टी संयोजक केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा है कि अगर संगठन में आंतरिक लोकतंंत्र बहाल करने के लिए उनके बताए उपाय अपना लिए गए तो वे पार्टी के सभी पद छोडऩे को तैयार हैं। हालांकि, ऐसे किसी पत्र से दोनों ही पक्ष पूरी तरह इन्कार कर रहे हैं।

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    सूत्रों के मुताबिक, सोमवार रात शुरू हुई बातचीत की प्रक्रिया के बाद भूषण और यादव ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाली के लिए विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि पार्टी इस बात को सुनिश्चित करे कि इसकी सभी इकाइयों की नियमित रूप से बैठक हो। राजनीतिक मामलों की समिति से लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद तक के सदस्यों के चयन से लेकर इनके संचालन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। सभी इकाइयों की बैठक के ब्योरे वेबसाइट पर डाले जाएं। पार्टी को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जाए। साथ ही सभी फैसलों में पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए। राज्य इकाइयों को अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता दी जाए। इन्होंने अपने पत्र में पार्टी में महिलाओं को पर्याप्त महत्व दिए जाने की मांग भी की है।

    इस्तीफे की पेशकश से इन्कार

    प्रशांत भूषण ने इस चिट्ठी के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश नहीं की है, बल्कि सिर्फ पार्टी के कुछ लटके हुए पुराने मुद्दों की याद दिलाई है। साथ ही उन्होंने कहा, 'ये वही मुद्दे हैं जिनके बारे में हम बात करते रहे हैं। चिट्ठी में इसको ज्यादा साफ तरीके से रखा गया है।' योगेंद्र यादव ने भी कहा कि उन्होंने या भूषण ने किसी इस्तीफे की पेशकश नहीं की है। इसी तरह पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने भी ऐसे किसी पत्र से पूरी तरह इन्कार किया है। मगर वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि सीधे केजरीवाल को लिखे गए इस पत्र के बारे में पार्टी जान-बूझ कर कुछ नहीं बोलना चाहती। जबकि भूषण और यादव अनुशासन संबंधी नियमों का ध्यान रखते हुए सार्वजनिक तौर पर इसका खंडन कर रहे हैं।

    पार्टी के दोनों खेमों में चल रही बातचीत की प्रक्रिया भी मूल रूप से इन्हीं बिंदुओं पर चल रही है। मंगलवार रात को हुई पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक के बाद योगेंद्र यादव ने इस तरह का संकेत भी दिया। उन्होंने ट्वीट किया कि 'पार्टी के फैसलों में कार्यकर्ताओं को शामिल करने का फैसला पार्टी के अंदरूनी स्वराज का प्रतीक है। इसके विस्तृत कार्ययोजना का इंतजार है।' प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी की पीएसी से तो बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन भूषण अब भी पार्टी की राष्ट्रीय अनुशासन समिति के प्रमुख हैं और यादव मुख्य प्रवक्ता हैं। इसी तरह दोनों राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।

    कैसे आए आंतरिक लोकतंत्र

    1. संगठन की सभी इकाइयों की नियमित बैठक हों।

    2. पदाधिकारियों के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

    3. सभी इकाइयों की बैठक के ब्योरे समय से वेबसाइट पर डाले जाएं।

    4. पार्टी को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जाए।

    5. सभी फैसलों में पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए।

    6. राज्य इकाइयों को अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता दी जाए।

    7. पार्टी में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए।

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