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    जानिए, गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर का पूरा राजनीतिक सफर

    By Monika minalEdited By:
    Updated: Tue, 14 Mar 2017 05:55 PM (IST)

    आइआइटी बांबे से लेकर भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में पर्रीकर का सफर बेहद आकर्षक रहा है और अब फिर से एक बार वे गोवा के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

    जानिए, गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर का पूरा राजनीतिक सफर

    नई दिल्‍ली (जेएनएन)। मनोहर पर्रीकर ने पहले भी गोवा में भाजपा सरकार के नेतृत्‍व का बेहतरीन परिचय दिया है। शायद इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर पर्रीकर के हाथों में गोवा को सौंपना चाहते हैं।

    मनोहर गोपालकृष्‍ण प्रभु पर्रीकर का जन्‍म 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में हुआ। उन्‍होंने अपने स्‍कूल की शिक्षा मारगाव में पूरी की। इसके बाद आइआइटी बांबे से इंजीनियरिंग और 1978 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

    पर्रीकर का राजनीतिक करियर

    आइआइटी की पढ़ाई से गोवा के मुख्‍यमंत्री और रक्षा मंत्री तक का मनोहर पर्रीकर का सफर काफी रोचक रहा। उतार-चढ़ाव वाले इस सफर को पर्रीकर ने अब तक बड़ी समझदारी से पूरा किया है। इनका यह राजनीतिक सफर वर्ष 1994 में शुरु हुआ जब वे गोवा विधानसभा के विधायक चुने गए। 24 अक्‍टूबर 2000 में वे गोवा के मुख्‍यमंत्री नियुक्‍त हुए और 27 फरवरी 2002 तक अपने इस कार्यभार को संभाला। इसके बाद जून 2002 में वे दोबारा राज्‍य के लिए मुख्‍यमंत्री चुने गए।

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    29 जनवरी 2005 को उनकी सरकार अल्‍पमत में चली गयी। लेकिन मनोहर पर्रीकर ने बड़ी ही समझदारी से भाजपा के साथ 24 विधानसभा क्षेत्रों को जीत 2012 के विधानसभा चुनावों में वापसी की। वे 8 नवंबर 2014 तक गोवा के मुख्‍यमंत्री रहे। इसके बाद उन्‍होंने केंद्र में एक महत्‍वपूर्ण पद हासिल किया।

    अब तक इन महत्‍वपूर्ण पदों पर रहे पर्रीकर

    1988: भाजपा से हाथ मिला राजनीति में लिया प्रवेश।

    1994: पहली बार गोवा राज्‍य की दूसरी विधानसभा के लिए निर्वाचित। 2001: गोवा में भाजपा के महासचिव व प्रवक्‍ता।

    24 अक्‍टूबर 2000 से 27 फरवरी 2002: राज्‍य के मुख्‍यमंत्री होने के साथ गृह, वित्‍त, शिक्षा और प्रशासन को संभाला

    5 जून 2002: दोबारा गोवा के मुख्‍यमंत्री बने।

    जून 2002: गोवा राज्य की चौथी विधान सभा में फिर से निर्वाचित।

    जून 2007: गोवा की पांचवीं विधानसभा में फिर से निर्वाचित, बने विपक्ष के नेता।