यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 18, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रोंगटे खड़े करने वाली है मिड-डे मील की हकीकत
गंदे पानी से धुले बर्तन। आटा गूंथने की चक्की के पास फैली गंदगी। खाना बनाते समय हाथों में दस्ताने नहीं। ...और पढ़ें

नई दिल्ली। गंदे पानी से धुले बर्तन। आटा गूंथने की चक्की के पास फैली गंदगी। खाना बनाते समय हाथों में दस्ताने नहीं। भोजन की गुणवत्ता केवल चखकर जांची जाती है। यह काम रसोइया करता है, विशेषज्ञ नहीं। हम बात कर रहे हैं दिल्ली के स्कूलों में परोसे जाने वाले मिड-डे-मील की। जिसे खाकर बच्चें बीमार नहीं होंगे, तो क्या होंगे।
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दैनिक जागरण की टीम ने बुधवार को मटियाला स्थित एकता शक्ति फाउंडेशन की रसोई का जायजा लिया। यहां एक लाख 32 हजार बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पेश है मिड-डे-मील को लेकर जागरण टीम की लाइव रिपोर्ट।
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कर्मचारी नहीं पहनते दस्ताने
खाना बनाने या पैकिंग करने वाले किसी भी कर्मचारी ने हाथों में दस्ताने नहीं थे। जबकि साफ-सफाई के लिहाज से ऐसा जरूरी है।
जांच भी नहीं होती
रसोई में भोजन की जांच के लिए कोई विशेषज्ञ या डाइटीशियन नहीं है। संस्था से जुड़े लोग ही उसे चखते हैं। वह भी नमक-मिर्च का पता लगाने के लिए।
खाना गर्म रहे, इसकी गारंटी नहीं
खाने की पैकिंग और स्कूलों में परोसे जाने के दौरान एक से दो घंटे का समय लगता है। खाना स्टील के बर्तन में भरा जाता है। केवल पूड़ी की पैकिंग ऐसे बर्तन में की जाती है, जिसमें वह गर्म रहे।
मिलता है कम पैसा
सरकार की तरफ से संस्थाओं को तीन रुपए ग्यारह पैसे (प्राथमिक वर्ग) व चार रुपए 63 पैसे (उच्च प्राथमिक वर्ग) की दर से भुगतान किया जाता है। प्राथमिक वर्ग के बच्चों को 250 ग्राम व उच्च प्राथमिक वर्ग के बच्चों के लिए 375 ग्राम भोजन परोसा जाता है। संस्थाओं को गेहूं व चावल मुफ्त में मिलता है। निगम स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन को बच्चे लगा देते है नालियों में ठिकाने।
नगर निगम के शिक्षा निदेशक सुशील सिंह ने बताया, मैं पिछले 14 दिन से स्कूलों का औचक निरीक्षक कर रहा हूं। प्रत्येक स्कूल में जाकर खाना खा रहा हूं। स्कूलों में उसी समय जाता हूं, जब मिड-डे-मील बांटा जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि सफाई व भोजन का गुणवत्ता को लेकर खामियां मिली हैं। प्रधानाचार्यो को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी मिलने पर उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। कुछ प्रधानाचार्यो को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। हालात में सुधार हुआ है कुछ और होना है।
दक्षिणी महापौर ने किया निरीक्षण
उत्तरी दिल्ली के महापौर आजाद सिंह ने बुधवार सुबह पांच बजे मिड-डे-मील तैयार करने वाली किचन का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ अतिरिक्त आयुक्त (शिक्षा), एम.एस.ए. खान तथा अतिरिक्त निदेशक (शिक्षा), जसराम केम भी थे।
गैर सरकारी संगठनों की बूढ़पुर, अलीपुर, पूठ व रनहौला स्थित रसोइयों में वह गए। भोजन के नमूने श्रीराम प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। महापौर ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय में पांच सदस्यीय समिति द्वारा भोजन की जांच के बाद ही परोसा जाए। काफी कम पैसे में हमें तेल, ईंधन, मसाला, दाल, सब्जी, ढुलाई व परोसने का इंतजाम करना पड़ता है। महंगाई के दौर में यह बड़ी चुनौती है। बावजूद इसके कोशिश होती है कि गुणवत्ता व साफ-सफाई बरकरार रहे।
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