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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 09, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हमले के 14 मिनट की पूरी कहानी, जिससे थर्राया पूरा देश

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Published: Sat, 09 Feb 2013 08:09 AM (IST)Updated: Sat, 09 Feb 2013 12:55 PM (IST)

सूत्रों के मुताबिक आज सुबह 7.30 बजे संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु को फांसी दे दी गई। आतंकी ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। शनिवार सुबह 8.00 बजे संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु को फांसी दे दी गई। आतंकी अफजल को तिहाड़ में फांसी दे दी गई। गृहसचिव आर के सिंह ने पुष्टि की है। चलिए हम उस काले दिन की कहानी बताते हैं। कब और क्या हुआ।

दिन 13 दिसंबर 2001.समय सुबह 11.25.जगह संसद भवन.गोलियों की तड़तड़ाहट और हैंडग्रेनेड ने सबको हक्का-बक्का कर दिया था। जी हां, देश के दुश्मन दहशतगर्दों ने लोकतंत्र के मंदिर को लाल कर दिया।

आम दिनों की तरह उस दिन भी संसद की कार्यवाही चल रही थी। दोनों सदन गोलीबारी से कुछ देर पहले ही स्थगित हुए थे। इसी बीच सुबह ग्यारह बजकर पच्चीस मिनट पर एके-47 बंदूकों और हैंड ग्रेनेड से लैस पांच आतंकियों ने हमला बोल दिया। देश को दहलाने वाले ये आतंकी गृह मंत्रालय का स्टीकर लगाकर लालबत्ती वाली कार से आए। जैश-ए-मुहम्मद के पाचों आतंकी पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाकर गोलिया बरसा रहे थे। सभी आतंकियों के हाथ में एके 47 रायफलें थीं और उनकी पीठ पर बैग था। एक आतंकी ने हमले के दौरान अपने शरीर पर रखे बम को विस्फोट कर उड़ा दिया था।

गोलियों की आवाज और पाकिस्तान के पक्ष में लग रहे नारों से सुरक्षाकर्मियों का खून खौलने लगा। संसद के सुरक्षा स्टाफ ने मुख्य इमारत को फौरन चारों तरफ से बंद कर दिया। सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों, बम निरोधक दस्ते और पुलिस ने मोर्चो संभाल लिया, ताकि एक भी आतंकी मनमानी न कर सके और भाग कर जाने भी न पाए।

करीब 14 मिनट तक चले इस मुकाबले के बाद हमला नाकाम कर दिया गया और पाचों आतंकी मारे गए, जबकि नौ जाबाज जवान शहीद हो गए।

हमले के दौरान देश के कई बड़े नेता और सासद संसद भवन के परिसर में ही थे और सभी सुरक्षित थे। उस समय राजग सरकार सत्ता में थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। इस हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते काफी खराब हो गए थे। दोनों देश युद्ध के करीब आ गए थे।

हमले के बाद ढेर सारे सवाल सुरक्षा को लेकर उठने लगे थे। उस वक्त दिल्ली पुलिस कमिश्नर रहे अजय राज शर्मा के मुताबिक संसद गेट पर मौजूद गार्ड ने थोड़ी सावधानी बरती होती हो यह हादसा रोका जा सकता था। एक टीवी चैनल से बातचीत में शर्मा ने कहा था कि आतंकियों की कार पर गृह मंत्रालय का स्टीकर लगा था, लेकिन उस पर कुछ अपशब्द भी लिखे थे जिसे संसद भवन के गेट पर मौजूद गार्ड नहीं नोटिस कर सके। यदि उन्होंने इसे नोटिस किया होता तो कार को घुसने से रोक सकते थे।

उस वक्त तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और सोनिया गाधी संसद भवन से बाहर निकल चुकी थीं लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित अधिकतर नेता संसद में ही मौजूद थे। हालाकि सुरक्षाकर्मियों ने सदन के सभी दरवाजे बंद कर दिए थे।

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