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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 24, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नहीं होगा रुश्दी के उपन्यास पर शोध

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Published: Tue, 24 Apr 2012 10:22 PM (IST)Updated: Tue, 24 Apr 2012 10:56 PM (IST)

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में सलमान रुश्दी, विक्रम सेठ और अमिताव घोष पर होने वाला शोध अब नहीं होगा।

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मेरठ, जागरण संवाददाता। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में सलमान रुश्दी, विक्रम सेठ और अमिताव घोष पर होने वाला शोध अब नहीं होगा।

विवाद के बाद अंग्रेजी विभाग ने शोधार्थी को दी गई सुविधाएं वापस ले ली हैं। इस बारे में कुलपति व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] को अवगत करा दिया गया है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शोधार्थी के लगातार अनुपस्थित रहने और कुछ तकनीकी कारणों से सुविधाएं वापस ली गई हैं। यह भी साफ किया है कि शोध रुश्दी समेत कई अंग्रेजी लेखकों के उपन्यासों के तुलनात्मक अध्ययन के बारे में था न कि सटैनिक वर्सेज के बारे में।

पिछले दिनों यूजीसी ने रुड़की की छात्रा प्रभा परमार को पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप [पीडीएफ] प्रदान की थी। शोध का विषय था, यूज ऑफ मैजिकल रियलिज्म इन द मेजर नॉवेल्स ऑफ सलमान रुश्दी, अमिताव घोष एंड विक्रम सेठ। प्रचारित हो गया कि सलमान रुश्दी के विवादित उपन्यास द सटैनिक वर्सेज पर शोध किया जा रहा है। इसको लेकर देवबंदी उलेमा ने नाराजगी जताई थी।

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