यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 14, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गठबंधन बचाए रखने की औपचारिकता दिखा रही भाजपा
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भाजपा और जदयू को पूरा अहसास है कि दोनों दलों के बीच अब कुछ घंटों या ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भाजपा और जदयू को पूरा अहसास है कि दोनों दलों के बीच अब कुछ घंटों या दिनों की ही दोस्ती बाकी है। ऐसे में भाजपा पूरे जोर-शोर से गठबंधन बचाए रखने की औपचारिकता दिखा रही है। दरअसल, भाजपा जदयू से अलगाव की जिम्मेदारी किसी शर्त पर अपने सिर लेना नहीं चाहती है। लिहाजा, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से लेकर सुषमा स्वराज और उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी तक यह दोहराने से नहीं चूक रहे कि गठबंधन की एकता जरूरी है।
जदयू को इसकी याद भी दिलाई जा रही है कि जनता ने गठबंधन को मत दिया था न कि अलग-अलग पार्टी को। वहीं, जदयू अध्यक्ष शरद यादव अब तक इस बात पर डटे हैं कि फिलहाल राजग गठबंधन बरकरार है। बिहार में जदयू और भाजपा नेताओं के बीच भले ही जुबानी जंग तेज हो, केंद्रीय स्तर पर इसका राजनीतिक नफा नुकसान आंक कर नेता संयमित हैं।
राजनाथ ने कहा कि जदयू के साथ हमारा 17 साल पुराना रिश्ता है। हम नहीं चाहेंगे कि वह रिश्ता टूटे। वहीं, शरद यादव ने कहा कि हमने भाजपा के सामने कोई अल्टीमेटम नहीं रखा है और राजग बरकरार है। कोई भी फैसला बैठक के बाद ही होगा। सुषमा ने ट्वीट पर कांग्रेस की हार के लिए विपक्षी एकता की याद दिलाई, तो नकवी ने पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए एकजुट रहने की आशा जताई।
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