यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मिस्ड कॉल से बने दोस्त, शादी के लिए कर दिया कत्ल!
वे अपना घर बसाने के लिए इतने जुनूनी हो चले थे कि गृहस्थी उजाड़ने में भी उनके हाथ नहीं कांपे। ...और पढ़ें

अलीगढ़, [योगेश शर्मा]। वे अपना घर बसाने के लिए इतने जुनूनी हो चले थे कि गृहस्थी उजाड़ने में भी उनके हाथ नहीं कांपे। दो-दो बार शादी करके 'लाश' पर भी अपना घरौंदा बसाया। इसी शादी और हनीमून के लिए उन्हें पैसा चाहिए था। सो, रिटायर्ड प्रोफेसर दंपति के घर को निशाना बनाया। डॉ. सांध्य प्रभा ने शोर मचाया तो गला घोंट दिया। प्रेम की खातिर जिस रास्ते वे बढ़े, वो खोखले वादों और झूठे सपनों पर बनी थी। तीन महीने पहले मिस्ड कॉल से संपर्क हुआ, अब हवालात में हैं।
नौकरानी के नाबालिग होने की कानूनी बंदिश के कारण हम उसकी पहचान तो नहीं बता सकते, लेकिन उसकी दिलचस्प प्रेम कहानी जरूर सुना रहे हैं। बकौल नौकरानी, तीन महीने पहले की बात है। मिस्ड कॉल के जरिए नौकरानी का संपर्क सराय रहमान के युवक से हुआ। कच्ची उम्र की बातचीत मुहब्बत लगने लगी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर रहा है। सो, दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की तैयारी कर ली। इसके लिए पैसा कहां से आता? किशोरी की मानें तो दो महीने पहले ब्वायफ्रेंड ने कुछ पैसे मांगे थे। सो, दीदी के सोने के कंगन ही उसे सौंप दिए थे। जब शादी के लिए कहा तो उसने पैसों का रोना रोया। पैसों के जुगाड़ के लिए नौकरानी ने महिला प्रोफेसर का घर बताया। प्रेमी को यह सुझाव पसंद आ गया।
मामा ने दिया धोखा
प्रेमी काविश की मानें तो लूटे गए जेवर सराय रहमान निवासी दूसरे मामा को सौंप दिए थे। लूटे 25 हजार रुपये लेकर मथुरा भाग गए। निकाह करके उसने हनीमून के लिए जेवर बेचकर पैसा भिजवाने को कहा तो उसने कह दिया कि जेवर तो सोने के हैं ही नहीं। मामा की बात हजम नहीं हुई तो 10 दिन बाद वह अलीगढ़ आया। उसे आर्टिफिशियल जेवर दे दिए।
काश, प्रेमिका मान जाती
ब्वायफ्रेंड का कहना है कि शादी के लिए प्रेमिका डेढ़ साल रुक जाती तो ये दिन नहीं देखना पड़ता। उसी के कहने पर लूट की। आरोपी काविश के पिता सराय रहमान में गाड़ियों के मिस्त्री हैं, जबकि मामा एक कारखाने में काम करता है।
