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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मदर टेरेसा को मिलेगी संत की उपाधि, दूसरे चमत्कार को मिली मान्यता

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Sat, 19 Dec 2015 02:55 AM (IST)Updated: Sat, 19 Dec 2015 03:02 AM (IST)

नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को वर्ष 2016 में संत की उपाधि दी जाएगी। यह खबर सबसे पहले 'दैनिक जागरण' ...और पढ़ें

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कोलकाता, जागरण ब्यूरो । नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को वर्ष 2016 में संत की उपाधि दी जाएगी। यह खबर सबसे पहले 'दैनिक जागरण' ने 20 नवंबर को प्रकाशित की थी, जिसकी शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर मिशनरी ऑफ चैरिटी ने मुहर लगा दी। चैरिटी की प्रवक्ता सुनीता कुमार ने कहा- 'हमें वेटिकन चर्च के पोप से आधिकारिक पुष्टि मिल गई है कि मदर को संत की उपाधि दी जाएगी। पोप ने मदर के दूसरे चमत्कार को मान्यता दे दी है।'

मदर को संत घोषित करने के वेटिकन के फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुशी व्यक्त करते हुए मिशनरी ऑफ चैरिटी को बधाई दी। वेटिकन द्वारा संत घोषित करने की जो प्रक्रिया है, उसमें मदर पहले ही धन्य घोषित हो चुकी थी। खबर है कि मदर को यह उपाधि अगले वर्ष चार सितंबर को उनकी 19वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर दी जा सकती है। वेटिकन ने मदर टेरेसा के दूसरे चमत्कार को मंजूरी दे दी है। यह चमत्कार ब्रेन ट्यूमर से पीडि़त ब्राजील के एक शख्स के उपचार से जुड़ा है। गौरतलब है कि मदर टेरेसा का जन्म मेसेडोनिया गणराज्य में हुआ था। वर्ष 1948 में वह भारत आई और यहीं की होकर रह गई। उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। पांच सितंबर, 1997 को उनका निधन हो गया।

इसलिए मिल रही है उपाधि

मदर के निधन के बाद पेट के ट्यूमर से पीडि़त एक महिला की बीमारी उनके चमत्कार से ठीक हो जाने के कारण उन्हें संत की उपाधि से नवाजा जाएगा। बताया जाता है कि महिला का रोग लाइलाज था। तत्कालीन पोप फ्रांसिस ने वर्ष 2002 में ही महिला के इस कथन को सही ठहराया था कि मदर टेरेसा के निधन के एक साल बाद वह उनकी तस्वीर देखकर ठीक हो गई। इस महिला के पेट में गांठ यानी ट्यूमर था। इसके लिए पोप जॉन पॉल द्वितीय ने अक्टूबर, 2003 में मदर को धन्य घोषित किया था।

लंबी है प्रक्रिया

ईसाई धर्म में संत की उपाधि देने के लिए काफी लंबी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके तहत वेटिकन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को मदर टेरेसा के चमत्कार की जांच के लिए ब्राजील के साओ पाउलो भेजा गया था। प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट मिलने के बाद ही उन्हें संत घोषित करने का फैसला किया गया है।

संत घोषित करने का आधार

ईसाई धर्म के अनुसार संत वैसा व्यक्ति होता है, जिसके अंदर दैवीय शक्तियां होती है। ये शक्तियां ईश्वर प्रदत्त होती हैं। संत की उपाधि प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त व्यक्ति के द्वारा कम से कम तीन चमत्कार किए गए हों। संत की उपाधि मिलने का अर्थ होगा कि उसके बाद उनके गुण पूरी दुनिया के कैथोलिक ईसाइयों के लिए श्रद्धा के पात्र होंगे।