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सर्द रात की तकलीफ को करीब से देखने निकले मंत्री

दिल्ली की सड़कों पर खुले आसमान में ठंड में ठिठुरते हुए लोगों की रात कितनी मुश्किल व तकलीफ भरी होती है, इसे महसूस करने के लिए दिल्ली के शहरी विकास मंत्री मनीष सिसोदिया सोमवार रात को सड़कों पर निकल पड़े। कई रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद जब सिसोदिया यमुना बाजार में फ्लाईओवर के नीचे

By Edited By: Published: Wed, 01 Jan 2014 09:18 AM (IST)Updated: Wed, 01 Jan 2014 09:20 AM (IST)
सर्द रात की तकलीफ को करीब से देखने निकले मंत्री

नई दिल्ली [सुधीर कुमार]। दिल्ली की सड़कों पर खुले आसमान में ठंड में ठिठुरते हुए लोगों की रात कितनी मुश्किल व तकलीफ भरी होती है, इसे महसूस करने के लिए दिल्ली के शहरी विकास मंत्री मनीष सिसोदिया सोमवार रात को सड़कों पर निकल पड़े। कई रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद जब सिसोदिया यमुना बाजार में फ्लाईओवर के नीचे पहुंचे तो इससे सटे फुटपाथ पर सो रहे लोगों को देख मन द्रवित हो उठा।

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आसफ अली रोड पर भी खुले बरामदे में लोग सो रहे थे। इसे देख मंत्री महोदय की जुबां से निकला कि क्या यही दिल्ली का विकास है। दिल्ली में एक लाख लोग सड़कों पर सोते हैं। ठंड के दिनों में करवटें बदलते हुए उनकी रात कटती है। इन्हीं में से कई काल के ग्रास बन जाते हैं। कभी मौसम की मार इन पर पड़ती है तो कभी ये वाहनों की भेंट चढ़ जाते हैं। सिसोदिया कहते हैं कि इस हालात को बदलना पड़ेगा। इसके लिए सरकार व समाज को हाथ मिलाना पड़ेगा और सुनिश्चित करना होगा कि एक भी व्यक्ति ठंड के दिनों में खुले आसमान के नीचे न सोए।

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दरअसल मंत्री सोमवार रात को दिल्ली की सड़कों पर खुले आसमान में रात गुजारने वाले लोगों और रैन बसेरों के हालात का जायजा लेने के लिए निकले थे। उनके साथ कुछ अधिकारी भी थे। गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास स्थित चार रैन बसेरों को देखने पर अहसास हुआ कि शायद इस निरीक्षण की भनक रैनबसेरा चलाने वालों को लग गई थी। इस वजह से यहां की स्थिति संतोषजनक लग रही है। अधिकारियों ने मोतिया खान, निजामुद्दीन और आसपास स्थित रैनबसेरों के निरीक्षण की सलाह दी, लेकिन सिसोदिया अचानक रामलीला मैदान स्थित रैनबसेरा पहुंच गए। यहां की दिक्कतों को लेकर अधिकारियों को झाड़ पिलाई। फिर आसफ अली रोड पर दुकानों के बरामदे में सो रहे लोगों की हालत को देखा और निकल पड़े यमुना बाजार। यहां खुले आसमान में फटे कंबल के सहारे काफी लोग फुटपाथ पर लेटे थे। रात को बूंदाबांदी हुई थी, इससे बचने के लिए कुछ लोगों ने पन्नी को कंबल के ऊपर से लपेट लिया। कुछ लोग जाग रहे थे, उनसे सिसोदिया ने पूछा कि यहां क्यों लेट रहे हो, रैनबसेरा में क्यों नहीं जाते, जवाब मिला, रैन बसेरों में जगह ही नहीं मिलती है और कोई उपाय नहीं है।

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