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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 27, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सलाहुद्दीन के बाद हुर्रियत समेत अलगाववादी नेताओं की आएगी शामत

By Lalit RaiEdited By:
Published: Tue, 27 Jun 2017 11:59 AM (IST)Updated: Tue, 27 Jun 2017 06:35 PM (IST)

पीएम मोदी के यूएस दौरे को कामयाब दौरा बताया जा रहा है। आतंकवाद पर अपने संकल्प को दोहराते हुए यूएस ने सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया।

सलाहुद्दीन के बाद हुर्रियत समेत अलगाववादी नेताओं की आएगी शामत
सलाहुद्दीन के बाद हुर्रियत समेत अलगाववादी नेताओं की आएगी शामत

नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा कामयाबी की कई इबारत लिख गया। राष्ट्रपति ट्रंप से औपचारिक मुलाकात के पहले अमेरिका ने कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार हिज्बुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया। अमेरिका ने साफ कर दिया कि अब इस शख्स से किसी तरह का संबंध रखना आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा। इसके अलावा सैयद सलाहुद्दीन की दुनिया भर में जहां-जहां संपत्तियां होंगी, उन्हें जब्त कर लिया जाएगा। हिज्बुल और हुर्रियत नेताओं के रिश्ते का सच जगजाहिर है। कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों को दी जाने वाली वित्तीय मदद उसका एक उदाहरण है। हाल ही में हुर्रियत प्रवक्ता अयाज अकबर के एनआइए के छापे से ये पुष्ट होता है। इन सबके बीच हिज्बुल सरगना और उसके संगठन को आतंकी संगठन घोषित करने के बाद ये सवाल उठता है कि क्या भारत सरकार हुर्रियत पर और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सकेगी। 

 

जानकार की राय

Jagran.com से खास बातचीत में रक्षा मामलों के जानकार पी के सहगल ने कहा कि ट्रंप सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान को जबरदस्त झटका लगा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फैसले को तीन बिंदुओं पर देखने की जरूरत है।

1. कश्मीर में अशांति के लिए सैयद सलाहुद्दीन का संगठन इस समय युनाइटेड जेहाद काउंसिल के जरिए काम कर रहा है। अमेरिकी फैसले के बाद अब सलाहुद्दीन का दूसरे देशों में आना-जाना बहुत कठिन हो जाएगा। इसके अलावा अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जिन जगहों को बेस बनाकर आतंकियों को पाला-पोसा जा रहा है, उस पर अब नजर रखी जाएगी।

2. दोनों देशों के बीच द्विपक्षाय वार्ता में ये साफ किया गया कि पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। आतंकियों पर लगाम कसने के लिए पाकिस्तान को आगे आना होगा। अमेरिका का कहना है कि कश्मीर में आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी जा रही है। 

3. अमेरिका के इस बयान के बाद हुर्रियत को तगड़ा झटका लगा है। हुर्रियत के नेता मंचों से तकरीर करते रहे हैं कि कश्मीर में आजादी की लड़ाई चल रही है। लेकिन अमेरिकी रुख के बाद यह साफ हो चुका है कि हुर्रियत के नेता भारत को अस्थिर करने की कोशिशों में शिद्दत से जुटे हुए हैं। 

 

यूएस स्टेट डिपार्टमेंट अंडर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13324 के तहत सैयद सलाहुद्दीन को स्पेशल डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया गया। इस आर्डर पर सितंबर 2001 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने हस्ताक्षर किए थे। वाशिंगटन के दी विलार्ड होटल में पीएम मोदी और अमेरिका के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री की मुलाकात के बाद ये अधिसूचना जारी की गई।

अमेरिका ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए संगठनों और उससे जुड़े लोगों के संबंध में कई लिस्ट बनायी हैं।

विदेशी आतंकी संगठनों की लिस्ट

इसके जरिए अगर कोई शख्स किसी आतंकी संगठन को किसी रूप में मदद करता है तो उस शख्स के अमेरिका में दर्ज सभी वित्तीय खातों को फ्रीज कर दिया जाएगा।

टेररिस्ट एक्सक्लूजन लिस्ट

आतंकी संगठनों के प्रसार पर रोक लगाता है।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13324

इसके जरिए कोई शख्स या संगठन अगर आतंकी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसकी चल संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा।

सैयद सलाहुद्दीन को आतंकी घोषित किये जाने के बाद भारत की तरफ से अमेरिकी कार्रवाई का स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि इससे पता चलता है कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। कश्मीर को अशांत करने के लिए सीमापार की जमीन इस्तेमाल हो रही है। इससे साफ है कि भारत और अमेरिका दोनों आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। 
 

कौन है सैयद सलाहुद्दीन

-सैयद सलाहुद्दीन को 1990 से पहले कश्मीर में यूसुफ शाह के नाम से जाना जाता था।

-1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के नाम पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।

-इस तरह की खबरें आ रही थीं कि उस चुनाव में जबरदस्त तरीके से धांधली की गई थी।

-अलगाववादी विचारधारा और पाकिस्तान का एजेंडा चलाने की वजह से उसे जेल में बंद किया गया।

-लेकिन जेल से छूटने के बाद वो सुधरने की जगह और खतरनाक हो चुका था।

-5 नवंबर 1990 को यूसुफ शाह, सैयद सलाहुद्दीन बन गया और सीमा पार कर मुजफ्फराबाद पहुंच गया।

-सैयद सलाहुद्दीन ने हिज्बुल मुजाहिद्दीन संगठन बनाकर कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों की शुरुआत कर दी।

-सैयद सलाहुद्दीन ने 2012 में ये माना कि कश्मीर घाटी में लड़ाई के लिए पाकिस्तान हिज्बुल मुजाहिद्दीन का समर्थन करता है।

-सलाहुद्दीन ये भी कहता रहा है कि अगर पाकिस्तान ने हिज्बुल का समर्थन नहीं किया तो वो पाकिस्तान पर ही हमला कर देगा।

-सलाहुद्दीन अपनी तकरीरों में कहता रहता है कि वो कश्मीर को भारत के फौजियों की कब्रगाह बना देगा।

-बताया जाता है कि सलाहुद्दीन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ से पैसा मिलता है।

-पाकिस्तान सरकार ने उसे इस्लामाबाद में रहने के लिए खास जगह दी है।

कश्मीर में आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद देने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने घाटी में 14 और दिल्ली में आठ जगहों पर हाल ही में छापेमारी की थी। एनआइए ने हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर के घर पर छापा मारने के साथ ही लश्कर सरगना हाफिज सईद और हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी के संबंधों की भी जांच कर रही है। हिज्बुल मुजाहिद्दीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन ने ऐलान किया है कि उसका संगठन बुरहान वानी की शहादत की सालगिरह पर एक हफ्ते तक घाटी में प्रदर्शन करेगा। 

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