भारत में आतंक का पर्याय है इंडियन मुजाहिदीन
पिछले आठ वर्षो से इंडियन मुजाहिदीन भारत में आतंक का पर्याय बना हुआ है। कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर यह अब तक पांच सौ से ज्यादा बेगुनाहों की जान ले चुका है। पहले आतंकी हमला और फिर अपनी घिनौनी करतूत की जिम्मेदारी ईमेल के जरिए लेना, ये है इंडियन मुजाहिदीन का तरीका। इस आतंकी संगठन के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं।
नई दिल्ली। पिछले आठ वर्षो से इंडियन मुजाहिदीन भारत में आतंक का पर्याय बना हुआ है। कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर यह अब तक पांच सौ से ज्यादा बेगुनाहों की जान ले चुका है। पहले आतंकी हमला और फिर अपनी घिनौनी करतूत की जिम्मेदारी ईमेल के जरिए लेना, ये है इंडियन मुजाहिदीन का तरीका। इस आतंकी संगठन के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं।
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इंडियन मुजाहिदीन को प्रतिबंधित सिमी और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर का मुखौटा माना जाता है। दिल्ली, मुंबई, यूपी और बैंगलोर के कई ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन का नाम शामिल रहा है। सरकार ने इंडियन मुजाहिदीन को गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में डाला है। 23 फरवरी 2005 को वाराणसी ब्लास्ट के बाद सबसे पहली बार इस आतंकी संगठन का नाम सामने आया था। वर्ष 2010 में भारत सरकार ने इसको प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।
जानकारों के मुताबिक इंडियन मुजाहिदीन पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के हाथों की कठपुतली है और आमिर रजा खान नाम का आतंकी इंडियन मुजाहिद्दीन के संस्थापक सदस्यों में से एक है। कर्नाटक का रहने वाला रियाज भटकल भी इसकी कमान संभालने वालों की फेहरिस्त में शामिल है।
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पिछले कुछ सालों में इंडियन मुजाहिदीन सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाला आतंकी संगठन बनकर उभरा है। दिल्ली, मुंबई, पुणे, बिहार, बेंगलुरू, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के जयपुर में इस आतंकी संगठन ने कई बम धमाकों को अंजाम दिया है। इस वर्ष जुलाई में महाबोधि मंदिर में हुए धमाके में भी इसी आतंकी संगठन का नाम सामने आया था।
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