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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 13, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीता और चेतक की जगह रूस से मिलकर 200 कामोव हेलीकाप्टर बनाएगा भारत

By kishor joshiEdited By:
Published: Thu, 13 Oct 2016 12:41 PM (IST)Updated: Thu, 13 Oct 2016 01:09 PM (IST)

भारत और रूस इसी सप्ताह के अंत में शुरू होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

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नई दिल्ली (पीटीआई)। भारत और रूस लगभग एक अरब डॉलर वाले सौदे के तहत 200 कामोव 226टी हेलीकाप्टरों का देश में ही उत्पादन करने संबंधी एक समक्षौते पर इसी सप्ताह के अंत तक हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह समझौता 13 से 16 अक्टूबर तक गोवा में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के इतर हो सकता है। इस दौरान भारत के साथ सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग एवं व्यापार संबंधों को मजबूती प्रदान करने के बारे में कई दौर की वार्ता होगी।

रोस्टेक स्टेट कॉरपोरेशन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि केए 226टी हेलीकाप्टरों के उत्पादन के मदेनजर एक संयुक्त उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए एक समक्षौते पर हस्ताक्षर ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान होने की उम्मीद है।

तस्वीरों के जरिए जानें, कामोव केए-226T हेलीकॉप्टर की खासियत

रोस्टेक स्टेट कॉरपोरेशन 700 रूसी कंपनियों का एक संगठन है जिसकी स्थापना 2007 में सैन्य एवं असैन्य उददेश्यों के लिए उच्च प्रौद्योगिकी वाले औद्योगिक उत्पादों के विकास, उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। यह समक्षौता रूस और भारत के बीच हेलीकाप्टर उत्पादन एवं सेवा में सहयोग में अगला बड़ा कदम होगा। रोस्टेक के प्रमुख सर्गेई चेमेजोव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पिछले साल दिसम्बर में एक बैठक हुई थी जिसके बाद प्रारंभिक समक्षौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

इसके अलावा, स्टेट कॉरपोरेशन के प्रमुख रूसी हेलीकाप्टर निर्यात एवं बिक्री के बाद सर्विसिंग पर एक श्रृंखलाबद्ध बातचीत करेंगे। इसी हफ्ते से शुरू होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में चेमेजोव रोस्टेक प्रतिनिधिमंडल का नेतत्व करेंगे।

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चेमजोव ने बताया, "200 केए़़226टी हेलीकाप्टरों के निर्यात एवं संयुक्त उत्पादन का समझौता रूस और भारत के बीच व्यापार एवं औद्योगिक संबंधों के ढांचे की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। हमारी योजना इसे सैन्य प्रौद्योगिकी और असैन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने की हैं।" रोस्टेक की काफी लंबे समय से इस बारे में रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत जारी है।

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