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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन के बयान पर भड़का भारत, गिफ्ट के तौर पर नहीं चाहिए NSG की सदस्यता

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Thu, 19 Jan 2017 05:23 PM (IST)Updated: Thu, 19 Jan 2017 10:17 PM (IST)

इससे पहले अमेरिका ने भी माना कि चीन भारत की राह पर रोड़े अटका रहा है। एनएसजी के मसले पर अमेरिका भारत के समर्थन में है।

चीन के बयान पर भड़का भारत, गिफ्ट के तौर पर नहीं चाहिए NSG की सदस्यता
चीन के बयान पर भड़का भारत, गिफ्ट के तौर पर नहीं चाहिए NSG की सदस्यता

नई दिल्ली,एनएनआई । एनएसजी की सदस्यता को लेकर चीन के बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत एनएसजी की मेंबरशिप गिफ्ट के तौर पर नहीं बल्कि परमाणु अप्रसार के लिए किए गए अपने प्रयासों के बल पर पाना चाहता है।

इससे पहले अमेरिका ने भी माना कि चीन भारत की राह पर रोड़े अटका रहा है। एनएसजी के मसले पर अमेरिका भारत के समर्थन में है।

ये था चीन का बयान

गौरतलब है कि भारत को एनएसजी का सदस्य बनने पर लगातार बाधा खड़ी करनेवाले चीन ने अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत ना करनेवाले देश को एनएसजी का सदस्य बनाकर उसे बराक ओबामा का फेयरवेल गिफ्ट नहीं दिया जा सकता है। चीन का यह बयान ओबामा प्रशासन की तरफ से दिए उस बयान के बाद आया है जिसमें उसने भारत को एनएसजी का सदस्य बनने में चीन को सबसे बड़ा अवरोधक करार दिया था।

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अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा का कार्यकाल पूरा होने वाला है। इससे पहले ओबामा प्रशासन ने कोशिश की थी कि भारत को इसमें प्रवेश मिल सके। अमेरिकी दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों की सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिसवाल ने भी कहा कि एनएसजी में भारत की सदस्यता में रोड़े अटकाने वाला एकमात्र चीन है।

बिसवाल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था, ‘एनएसजी की सदस्यता दोनों देशों के लिए फेयरवेल गिफ्ट जैसा नहीं है जिसका आपस में लेन-देन कर लें और नॉन-एनपीटी देशों की इस ग्रुप में प्रवेश को लेकर चीन अपने बयान पर कायम है।‘ चीन के अनुसार बिना परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर किए किसी भी देश की इस समूह में प्रवेश नहीं मिल सकता है। चीन का कहना है कि भारत के आवेदन के बारे में सोचने से पहले चीन को नॉन-एनपीटी देशों के बारे में एक सामान्य रवैया अपनाना होगा।

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