यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गुजरात लोकायुक्त: कहानी अब तक
राज्य सरकार के रवैये को वजह बताते हुए पूर्व न्यायाधीश आर ए मेहता ने गुजरात का लोकायुक्त बनने से इन्कार ...और पढ़ें

गुजरात। राज्य सरकार के रवैये को वजह बताते हुए पूर्व न्यायाधीश आर ए मेहता ने गुजरात का लोकायुक्त बनने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने अपनी नियुक्ति के खिलाफ नरेंद्र मोदी सरकार की लंबी और खर्चीली कानूनी लड़ाई को अपने फैसले की वजहों में से एक बताया है।
गुजरात में लोकायुक्त का घटनाक्रम
-नवंबर 2003 में लोकायुक्त एसएम सोनी का इस्तीफा
-जुलाई 2004-नवल किशोर शर्मा राज्यपाल बने
-अगस्त 2006-मुख्य न्यायाधीश ने के आर व्यास का नाम सुझाया
-अगस्त 2007- व्यास महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बने
-नवंबर 2009-डॉ. कमला बेनीवाल ने राज्यपाल का पदभार संभाला
-दिसंबर 2010-डॉ. कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त पर चर्चा शुरू की
-फरवरी 2010-मुख्यमंत्री मोदी ने लोकायुक्त के लिए नाम की सूची दी
-मार्च 2010-नेता विपक्ष ने लोकायुक्त पैनल के नाम ठुकराए
-फरवरी 2011-मुख्यमंत्री ने जे आर वोरा का नाम सुझाया
-जून 2011-मुख्य न्यायाधीश ने आर ए मेहता का नाम रखा
-अगस्त 2011-राज्यपाल ने मेहता को बनाया लोकायुक्त
-सितंबर 2011-राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में लगाई विरोध याचिका
-जनवरी 2012-हाईकोर्ट ने राज्यपाल की नियुक्ति पर लगाई मुहर
-जनवरी 2013-राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में की अपील
-मार्च 2013-सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अपील खारिज
-अप्रैल 2013-गुजरात विधानसभा में लोकायुक्त संशोधन बिल पारित
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