खट्टर के नवरत्न
हरियाणा के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले मनोहर लाल खट्टर के साथ आज छह कैबिनेट और तीन राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। जानिए खट्टर के सभी मंत्रियों के बारे में.. प्रो. रामबिलास शर्मा प्रो. रामबिलास शर्मा का जन्म महेंद्रगढ़ जिले के निकटवर्ती गांव राठीवास में एक गरीब किसान पंडित दयारा
नई दिल्ली। हरियाणा के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले मनोहर लाल खट्टर के साथ आज छह कैबिनेट और तीन राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। जानिए खट्टर के सभी मंत्रियों के बारे में..
प्रो. रामबिलास शर्मा
प्रो. रामबिलास शर्मा का जन्म महेंद्रगढ़ जिले के निकटवर्ती गांव राठीवास में एक गरीब किसान पंडित दयाराम शर्मा के घर सन् 1949 में हुआ। गरीब परिवार में जन्म लेने और आर्थिक अभाव के होते हुए भी रामबिलास ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की, जो अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि थी।
प्रो. रामबिलास शर्मा ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही पूरी की। उनके बारे में एक रोचक तथ्य यह है की कक्षा तीसरी तक उन्होंने रेलगाड़ी नहीं देखी थी, जब पहली बार उन्होंने रेलगाड़ी को देखा तो यह सोच कर भाग खड़े हुए की ये अद्भुत सी दिखने वाली चीज क्या है। उन्होंने अपनी इंटर निकटवर्ती प्रांत माधोपुर से पूरी की। इसके बाद वे अपने बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के लिए महेंद्रगढ़ कॉलेज गए, कॉलेज टाइम में वे राष्ट्रीय सवंसेवक संघ के संपर्क में आए और उसकी विचारधारा से प्रभावित होकर उनके प्रचारक के रूप में काम किया।
उन्होंने हरियाणा प्रांत में होने वाले सभी आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। महेंद्रगढ़ जिले में होने वाले मुलिया बावरिया आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। सन् 1976 में हुए बहुचर्चित जयप्रकाश आंदोलन के दौरान वे डॉ. मंगल सेन जी के संपर्क में आए। प्रो. रामबिलास शर्मा के व्यक्तित्च से प्रभावित होकर डॉ. मंगल सेन जी ने उनसे अध्यापन कार्य छुड़वाया। प्रो. रामबिलास शर्मा जन संघ के कुरुक्षेत्र जिले के संगठन महामंत्री बने। आंदोलनों के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आपातकाल के समय आंदोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लेने के कारण उन्हें गया [बिहार] जेल में डाल दिया गया। वहां पर उन्हें अमानवीय यातना झेलनी पड़ी।
प्रो. शर्मा सन् 1977 में राजनीति में कूद पड़े। उन्होंने अपनी गरीबी को कभी अपने आड़े नहीं आने दिया। उस समय गरीबी और राजनीति का दूर-दूर तक कोई संगम नहीं था। इस तरह राजनीति में आकर उन्होंने गरीब व्यक्ति को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने राजनीति को जनसेवा के रूप में अपनाया। प्रो. शर्मा के जीवन का लक्ष्य लोगों की सेवा था उनके लिए पैसे का कोई मोल नहीं था। वे साधू और संतों के प्रति असीम श्रद्धा रखते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने साधू-संतों के लिए मंदिरों में पानी तथा बिजली की व्यवस्था करवाई।
राव नरवीर सिंह
हरियाणा सरकार में मंत्री कैबिनेट मंत्री बनाए गए बादशाहपुर (गुडगांव) विधान सभा के विधायक राव नरवीर सिंह का परिचय
जन्म व पैतृक गांव: दो अप्रैल 1961 में रेवाड़ी जिले के बूढपुर गांव में जन्म हुआ। बाद में इनका परिवार गुड़गांव के गैरतपुर बांस गांव में रहने लगा था।
वर्तमान निवास - सिविल लाइन गुडगांव
शिक्षा: स्नातक
वर्ष 1983: डायरेक्टर सेंट्रल कापरेटिव बैंक गुडगांव
वर्ष 1983 -निर्विरोध सरपंच गैरतपुर बांस गांव
वर्ष 1984 -चेयरमैन मार्केट कमेटी सोहना
वर्ष 1987 -रेवाड़ी की जाटू शाना से विधायक बन प्रदेश में गृहमंत्री बने थे
वर्ष 1996 - गुडगांव की सोहना सीट से जीते और एवं फूड एंड सिविल सप्लाई, ट्रांसपोर्ट, कापरेटिव मंत्री रहे
वर्तमान -हरियाणा सरकार में मंत्री तथा वाइस प्रेसिडेंट भाजपा हरियाणा
राजनैतिक विरासत: बाबा राव मोहर सिंह संयुक्त पंजाब में एमएलएसी रहे थे, पिता राव महावीर सिंह ने हरियाणा सरकार में कई विभागों में मंत्री पद संभाला था।
कैप्टन अभिमन्यु
1967 में जन्मे कैप्टन अभिमन्यु शिक्षित व प्रगतिशील विचारधारा वाले भाजपा नेता हैं। जाट समुदाय से संबंधित रहने वाले कैप्टन अभिमन्यु हिसार जिले के गांव खांडा खेड़ी के रहने वाले हैं। परिवार का अपना बड़ा कारोबार है। कैप्टन अभिमन्यु ने 1994 में आईएएस भी क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन समाज सेवा और अपने कारोबार को संभालने के लिए इसे जॉइन नहीं किया।
भाजपा में उनका अलग स्थान है और राज्य की राजनीति के साथ-साथ वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। राजनीति में 13 साल के अनुभव के दौरान साल 2005 में हरियाणा भाजपा के महासचिव बनाए गए। साल 2010 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। 2013 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। कांग्रेस के दिग्गज भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ उनके गढ़ रोहतक से संसदीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। कैप्टन अभिमन्यु पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले तीन चुनाव हार चुके हैं।
ओमप्रकाश धनखड़
झच्जर जिले के गांव ढाकला निवासी 53 वर्षीय ओमप्रकाश धनखड़ भाजपा में किसानों की आवाज कहे जाते हैं। धनखड़ दादरी से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन तब उन्हें बुरी पराजय का सामना करना पड़ा था। संगठन पर धनखड़ की मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसी के चलते नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 'स्टेच्यू आफ यूनिटी' का राष्ट्रीय संयोजक बनाया है। रेवाड़ी में हुई मोदी की पहली पूर्व सैनिक रैली के पीछे धनखड़ का ही दिमाग माना जाता है। साधारण परिवार से उठकर दो-दो बार किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंचे धनखड़ की कृषि से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ है। धनखड़ स्नातकोत्तर है व छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हैं।
अनिल विज
61 वर्षीय अनिल विज संघ और पार्टी दोनों मंच पर सक्रिय रहे हैं। अंबाला कैंट से उन्होंने पांचवीं बार चुनावी जीत हासिल की है। इन्हें हुड्डा का कट्टर विरोधी माना जाता है। यह विधानसभा में विधायक दल के नेता हैं और मंत्रिमंडल में अहम पंजाबी चेहरा।
कविता जैन
42 वर्षीय डॉ. कविता जैन टीचर बनना चाहती थीं। जीवीएम गर्ल्स कॉलेज और सीआरए कॉलेज में नौकरी के लिए आवेदन भी किया था। इसी दौरान राजीव जैन से शादी हुई। राजनीति में विशेष परिस्थितियों में प्रवेश हुआ। हालांकि पहले ऐसा माहौल मिला हुआ था, इसलिए परेशानी नहीं हुई। पिता सुरेंद्र जैन रोहतक में डॉ. मंगलसेन का कार्यालय संभालते थे। कविता हुड्डा के गढ़ में अच्छी पैठ रखती हैं। कविता अग्रवाल समुदाय की प्रभावशाली नेता के रूप में जानी जाती हैं।
विक्रम सिंह ठेकेदार
कोसली निवासी विक्रम सिंह ठेकेदार का जन्म गांव शादत्तनगर में किसान परिवार में हुआ था। ठेकेदार का जीवन संघर्ष भरा रहा। शुरूआत में ठेकेदार ने चालक की नौकरी की। अपनी मेहनत के बल पर पहले ट्रांसपोर्ट का काम शुरू किया तथा बाद में ईट भट्ठों का व्यवसाय शुरू किया। यहीं से उनके नाम के साथ ठेकेदार जुड़ गया। बिक्रम शुरू से मेहनती हैं। वे लंबे समय से राव इंद्रजीत सिंह के साथ जुड़े है। ठेकेदार ने वर्ष 2010 में अपनी पत्नी सुरेश देवी को जिला पार्षद के चुनाव मैदान में उतारा। जिला पार्षद के चुनाव में ठेकेदार की मेहनत के कारण सुरेश देवी ने सबसे अधिक वोटों से जीत हासिल की। हालात ने साथ दिया तो सुरेश देवी मिड टर्म में जिला परिषद की चेयरपर्सन बनने में सफल रही। उनकी सबसे बड़ी पहचान राव इंद्रजीत सिंह से उनकी निकटता ही है। कोसली से भाजपा की टिकट भी राव से जुड़ाव का ही परिणाम थी। वर्ष 2012 में जब जिला परिषद में उठापटक का दौर चला तो विक्त्रम सिंह व उनकी धर्मपत्नी सुरेश देवी खुलकर राव इंद्रजीत सिंह के साथ खड़े रहे थे। राव के समर्थन के बाद सुरेश देवी जिला प्रमुख चुनी गई थी। वर्ष 2013 राव इंद्रजीत सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद विक्रम सिंह व सुरेश देवी भी भाजपा में शामिल हो गए थे तथा इंसाफ मंच के साथी रहे।
कर्ण देव कंबोज
कर्ण देव कंबोज का ताल्लुक यमुनानगर से है। 20 फरवरी 1961 को उनका जन्म हुआ था। कर्णदेव कंबोज ने परस्नातक के बाद कानून की डिग्री भी हासिल की है। कंबोज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से 1980 में जुड़े। चार साल एबीवीपी की सेवा करने के बाद भाजपा में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर रहते हुए जिम्मेदारी निभाई।
कर्ण देव पेट्रोल पंप, ईट भट्टा सहित कई अन्य प्रतिष्ठानों के मालिक हैं। बावजूद इसके पार्टी में वह लगातार सक्रिय हैं। कर्ण देव की पहचान जुझारू नेता के तौर पर है।
कृष्ण कुमार बेदी
कृष्ण कुमार बेदी पहली बार विधानसभा चुनाव जीते हैं।
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