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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मनमोहन-ली वार्ता से नहीं निकला सीमा विवाद का हल

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Published: Mon, 20 May 2013 07:50 AM (IST)Updated: Mon, 20 May 2013 10:33 PM (IST)

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लद्दाख में हालिया सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के प्रधानमंत्रियों के बीच सोमवार को ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लद्दाख में हालिया सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के प्रधानमंत्रियों के बीच सोमवार को हुई बातचीत भी सीमा विवाद के समाधान का कोई नया फार्मूला तय करने में नाकाम रही। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके चीनी समकक्ष ली कछ्यांग के बीच भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यह सहमति जरूर बनी कि मुद्दे पर बातचीत जारी रहेगी और वार्ता के मौजूदा तंत्र ज्यादा मजबूत किए जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी जल से लेकर व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के आठ समझौतों पर दस्तखत के साथ संयुक्त बयान जारी कर रिश्तों के व्यापक विस्तार का एलान किया।

वार्ता के बाद मनमोहन सिंह ने लद्दाख का नाम लिए बिना बताया कि कछ्यांग से पश्चिमी सेक्टर [लद्दाख] में हुई घटना से मिले सबक पर बातचीत हुई है। हमने अपने विशेष प्रतिनिधियों को सीमा पर शांति बनाए रखने के जरूरी उपायों पर विचार करने के लिए कहा है। वहीं, साझा मंच से चीनी प्रधानमंत्री कछ्यांग ने कहा कि सीमा मामले पर बातचीत की मौजूदा व्यवस्थाओं को अधिक मजबूत करने और प्रभावी बनाने की जरूरत है। दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि सीमा मामले के समाधान का खाका तय करने के लिए जल्द मिलेंगे। सीमा मामलों पर अब तक विशेष प्रतिनिधि स्तर पर बातचीत के 15 दौर हो चुके हैं। हालांकि, समाधान का कोई ठोस ढांचा अब तक तय नहीं हो सका है।

चीन में भारत के राजदूत ध्रुव जय शंकर ने बताया कि वार्ता के दौरान लद्दाख में हुई सैन्य गतिरोध की हालिया घटना और सीमा मामले पर काफी बात हुई। इस दौरान चीन की ओर से प्रस्तावित नए रक्षा सहयोग समझौते पर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने बताया कि चीन ने अपना प्रस्ताव 4 मार्च को भेजा था। वहीं भारत ने इस संबंध में अपने सुझाव 10 मई को दिए हैं। लिहाजा, इस मुद्दे पर अभी विचारमंथन जारी है। ली-मनमोहन वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर संवाद और मेलजोल बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान तक सरहदों पर शांति बनाए रखने पर रजामंदी जताई है।

तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे ली कछ्यांग और मनमोहन सिंह के बीच रविवार व सोमवार को हुई दो मुलाकातों में दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों के पानी, व्यापार घाटे तथा आपसी आर्थिक रिश्तों के साथ ही क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात हुई। वार्ता के बाद भारत-चीन रिश्तों की मजबूती के लिए आठ समझौतों पर किए गए दस्तखत में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर आंकड़े साझा करने का चीन ने भरोसा दिया है। कछ्यांग का कहना था कि भारत की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए चीन ब्रह्मपुत्र पर आपसी बातचीत का स्तर बढ़ाने को तैयार है। गौरतलब है कि तिब्बत में चीनी बांध परियोजनाओं को लेकर भारत की चिंताएं हैं। भारत ने इसके लिए एक संयुक्त निगरानी तंत्र का प्रस्ताव दिया है।

मानसरोवर यात्रा में सहूलियतें बढ़ाएगा चीन

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सहयोग बढ़ाने का एलान किया है। दोनों देशों के बीच हुए नए समझौते के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साथ ही उन्हें मोबाइल सिम कार्ड व संचार सुविधाएं उपलब्ध करने में भी चीन सहयोग करेगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री ली कछ्यांग के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों में हुए समझौते के तहत चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सुविधाओं की स्थिति सुधारेगा।

हर साल मई से सितंबर तक होने वाली कैलाश मानसरोवर की बेहद कठिन यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बेहद दुर्गम पहाड़ी चढ़ाई के दौरान श्रद्धालुओं को चिकित्सा व संचार में भी खासी असुविधाएं पेश आती हैं। समझौतों की कड़ी में चीन हर साल पहली जून से 15 अक्टूबर के बीच दिन में दो बार ब्रह्मपुत्र नदी के जल बहाव पर सुबह आठ से रात आठ बजे [बीजिंग समयानुसार] के बीच के आंकड़े भारत को मुहैया कराएगा। इसके अलावा दोनों देश सहोदर शहर [सिस्टर सिटी] व प्रांतों को चिह्नित करने पर भी राजी हुए हैं। दोनों पक्षों ने पानी के बेहतर उपयोग वाली सिंचाई तकनीक व कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी करार किया है।

भारत और चीन ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए प्रतिष्ठित व समकालीन साहित्यिक रचनाओं के अनुवाद को भी बढ़ावा देने का करार किया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए भी सहमति जताई है। भारत और चीन के प्रधानमंत्रियों की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान के मुताबिक भारतीयों को चीनी सिखाने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड [सीबीएसई] चीनी एजेंसी हानबान के साथ मिलकर काम करेगा। दोनों मुल्कों के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए पारस्परिक मीडिया संपर्को व युवाओं के एक-दूसरे के मुल्क में आने-जाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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आठ समझौतों पर हुए हस्ताक्षर निम्न हैं :-

1. कैलाश-मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने एवं मार्ग में सुविधाएं बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता।

2. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा संयुक्त आर्थिक समूह के तहत तीन कार्यसमूहों का गठन।

3. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण प्राधिकरण के अंतर्गत मांस, मत्स्य उत्पादों एवं चारा व चारा सामग्री, समुद्री उत्पादों का एक-दूसरे देशों में निर्यात को बढ़ावा देने का समझौता।

4. शहरी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट के क्षेत्र में एवं अन्य आपसी हित के मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ अनुभव का आदान-प्रदान करना।

5. जल के कुशल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना। 6. किताबों के अनुवाद एवं प्रकाशन के क्षेत्र में समझौता।

7. नदियों को लेकर हाइड्रोलॉजिकल डाटा को एक-दूसरे से साझा करने को लेकर समझौता।

8. भारत और चीन के शहरों व प्रांतों के लोगों के बीच आपसी सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौता।

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