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    हंगामे के बीच खाद्य विधेयक पेश

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    Updated: Thu, 08 Aug 2013 01:32 AM (IST)

    रक्षामंत्री के विवादित बयान के बाद संसद में सांसत झेल रही सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक से बाजी पलटने की कोशिश करेगी। इसी के मद्देनजर लोकसभा में विपक्ष के शोर-शराबे के बीच खाद्य मंत्री केवी थामस ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश वापस लेने के बाद विधेयक पेश कर दिया। विपक्षी दल देश की दो तिहाई आबादी को बहुत सस्ता अनाज मुहैया कराने के प्रावधान वाले विधेयक की राह का रोड़ा नहीं बनना चाहेंगे।

    नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। रक्षामंत्री के विवादित बयान के बाद संसद में सांसत झेल रही सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक से बाजी पलटने की कोशिश करेगी। इसी के मद्देनजर लोकसभा में विपक्ष के शोर-शराबे के बीच खाद्य मंत्री केवी थामस ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश वापस लेने के बाद विधेयक पेश कर दिया। विपक्षी दल देश की दो तिहाई आबादी को बहुत सस्ता अनाज मुहैया कराने के प्रावधान वाले विधेयक की राह का रोड़ा नहीं बनना चाहेंगे।

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    कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के इस अतिमहत्वाकांक्षी विधेयक को संसद में पेश करने से पहले पार्टी ने ह्विप जारी कर सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा था। संसद के वर्तमान सत्र में खाद्य सुरक्षा विधेयक पारित कराना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन मंगलवार तक विधेयक का मसौदा पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया था, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने एतराज जताया था। इसीलिए पूरी रात जागकर मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे अंतिम रूप दिया।

    सीमा पर फौजियों की हत्या के मामले में रक्षा मंत्री एके एंटनी के मंगलवार को दिए बयान पर बुधवार को भी दोनों सदनों में हंगामा हुआ। विपक्ष के आक्रामक तेवर देखकर सुबह ही लग गया था कि संसद नहीं चलने वाली। इसके मद्देनजर हंगामे के बीच दोपहर तीन बजे ही खाद्य सुरक्षा विधेयक का मसौदा लोकसभा में रख दिया गया। विधेयक का विरोध करते हुए तमिलनाडु की दोनों प्रमुख पार्टियों अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने इसे खाद्य असुरक्षा विधेयक तक कह डाला।

    कई और मसलों पर संसद में घिरी सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक पर चर्चा शुरू कराने के साथ ही सभी को चुप कराने की सोच रही है। भाजपा समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से कुछ संशोधन जरूर पेश किए जा सकते हैं। सरकार उनमें फेरबदल पर राजी भी हो सकती है। दरअसल, संप्रग विधेयक को गेमचेंजर मान रहा है। उसे उम्मीद है कि 2014 आम चुनाव में विधेयक उसी तरह मुफीद साबित होगा, जिस तरह पिछले चुनाव में मनरेगा हुआ था और पार्टी को अप्रत्याशित जीत हासिल हुई थी।

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