यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्रत्याशी उतारने में सबसे आगे आप
संगठन के नाम पर चंद बड़े शहरों तक सिमटी आम आदमी पार्टी [आप] ने उम्मीदवार खड़े करने में सत्तारुढ़ कांग्रेस ...और पढ़ें

नई दिल्ली , [मुकेश केजरीवाल]। संगठन के नाम पर चंद बड़े शहरों तक सिमटी आम आदमी पार्टी [आप] ने उम्मीदवार खड़े करने में सत्तारुढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया है। अब तक 432 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर चुकी [आप] में अभी अच्छे लोगों' की तलाश जारी है। जबकि दोनों बड़ी पार्टियां अब तक सवा चार सौ के आस-पास ही अटकी हुई हैं। चुनाव लड़ने को लेकर इसका यह जोश तब है, जबकि चंदे की तंगी की वजह से अधिकांश उम्मीदवार बुरी तरह परेशान हैं। इसी वजह से अब तक कई ने अपनी उम्मीदवारी भी छोड़ दी है।
कांग्रेस द्वारा बुधवार को उत्तराखंड की तीन और उम्मीदवारों के ऐलान के साथ ही पार्टी के प्रत्याशियों की संख्या 423 पर पहुंच गई है। भाजपा भी ठीक इतनी ही सीटों पर अब तक अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। लेकिन नई-नवेली आम आदमी पार्टी इनसे भी आगे निकलते हुए 432 सीटों पर लोगों को झाड़ू पकड़ा चुकी है। लोकसभा की 543 सीटों के लिए हो रहे इन चुनाव में कांग्रेस ने अब तक आंध्र प्रदेश के उम्मीदवारों के नाम तय नहीं किए हैं। इसी तरह भाजपा भी अभी एक दर्जन सीटों पर अपने उम्मीदवार और उतार सकती है। 'आप' में अब भी दर्जनों आवेदनों पर विचार जारी है।
खास बात है कि नौ चरणों में हो रहे चुनाव के अंतिम चरण के लिए भी 24 अप्रैल तक ही नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। यानी उम्मीदवारों के एलान के लिए पार्टियों के पास अब बहुत कम समय बचा है। अधिक सीटों पर लड़ने की एक वजह यह भी है कि आप का किसी भी राज्य में किसी पार्टी से समझौता नहीं है।
'दैनिक जागरण' ने दो जनवरी को प्रकाशित खबर में ही सबसे पहले बता दिया था कि यह नवजात पार्टी देश की अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हालांकि, तब पार्टी को लोगों से जोरदार आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के सौ करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले बुधवार तक सिर्फ 24.5 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। चंदे की कमी की वजह से कई उम्मीदवार जहां अब तक प्रचार से दूर ही हैं, वहीं कई ने तो बाकायदा टिकट लौटा दी हैं।
फरुखाबाद से विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के खिलाफ चुनाव लड़ रहे पूर्व पत्रकार मुकुल त्रिपाठी ने तो अपनी उम्मीदवारी वापस लेते हुए साफ तौर पर चंदे की कमी का हवाला दिया ही था। एटा, जालंधर, अजमेर और चंडीगढ़ के उम्मीदवारों के टिकट लौटाने के मामले में भी यह कारण अहम रहा है।
