यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 14, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ये हैं वो तथ्य, जिनके आधार पर दरिंदों को दी गई सजा-ए-मौत
दिल्ली गैंगरेप मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने कई तथ्यों के आधार पर इसे दुर्लभतम अपराध करार दिया है। ये तथ्य इस प्रकार हैं-

नई दिल्ली। दिल्ली गैंगरेप मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने कई तथ्यों के आधार पर इसे दुर्लभतम अपराध करार दिया है। ये तथ्य इस प्रकार हैं-
1. पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत पीड़िता व उसके दोस्त को बस में बैठाया गया।
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2. पीड़िता से गैंगरेप किया गया।
3. पीड़िता के शरीर पर विभिन्न जगहों पर दांतों से काटा गया था। दांतों के काटने के निशान से जाहिर हुआ कि जानवरों जैसा व्यवहार किया।
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4. गैंगरेप के बाद अभियुक्तों ने उसके पेट में रॉड डाली। इससे पीड़िता की आंत कट गई। यह सबसे क्रूर।
5. अभियुक्तों ने पीड़िता के साथ नृशंसता की हद पार करते हुए आंत को बाहर निकाल दिया। यह सबसे अमानवीय था।
6. अभियुक्तों ने पीड़िता को बालों से खींचते हुए चलती बस से कड़ाके की ठंड वाली रात में नग्न अवस्था में सड़क किनारे फेंका। यहां तक कि उन्हें बस के नीचे कुचलने की भी कोशिश की गई।
7. पीड़िता के शरीर में 18 ऐसी आंतरिक गंभीर चोटें अभियुक्तों ने दीं, जिनसे पीड़िता का बचना मुश्किल था। पीड़िता ने मौत से पहले भयंकर दर्द झेला और उसकी दर्दनाक मौत हुई। इसे अदालत ने नृशंस एवं अमानवीय माना है।
8. अभियुक्तों द्वारा अपराध में अपनाया गया सबसे क्रूर, विचित्र, शैतानी, विद्रोही और घोर अमानवीय व्यवहार।
काम नहीं आया मुकेश का इकबालिया बयान :-
अभियुक्त मुकेश ने जुर्म स्वीकार करते हुए कहा था कि वह बस में था और बस चला रहा था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। इसी को आधार बनाकर उसने रहम की अपील की थी। अदालत ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियुक्त मुकेश ने खुद अपने बयान में माना था कि वह घटना के समय बस में था। शायद यह दलील उसने इसलिए दी थी कि उसके प्रति अदालत नरमी बरत ले, क्योंकि परिस्थितिजन्य साक्ष्य उसके खिलाफ जा रहे थे। इसलिए उसने यह विरोधाभासी बयान दिया।
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