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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मुख्यमंत्री के सामने 'दुर्गा' मामले पर बिफर पड़े स्वास्थ्य मंत्री हसन

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Published: Tue, 06 Aug 2013 08:30 PM (IST)Updated: Tue, 06 Aug 2013 08:35 PM (IST)

लखनऊ [जाब्यू]। मौका 5

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लखनऊ [जाब्यू]। मौका 590 करोड़ रुपये की डेरी व पशुधन विकास की योजनाएं लागू किए जाने का था परन्तु यहां निलंबित आइएएस दुर्गा शक्ति नागपाल का मसला ही हावी रहा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में दुर्गा प्रकरण को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन बुरी तरह बिफरे। दुर्गा नागपाल के अलावा केंद्र सरकार, आइएएस एसोसिएशन और मीडिया स्वास्थ्य मंत्री के निशाने पर रहे। उन्होंने मीडिया को दुर्गा फोबिया का शिकार बताते हुए निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मीडिया बिना सच्चाई जाने ही दुर्गा नागपाल मामले को तूल दे रहा है जबकि उसे मौके पर जाकर तहकीकात करनी चाहिए।

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स्वास्थ्य मंत्री ने दुर्गा नागपाल को नासमझ एसडीएम बताया जो अपनी डयूटी को ईमानदारी से अंजाम नहीं दे रही थी। उन्होंने कहा कि नागपाल के कारण आइएएस कैडर की गरिमा भी गिरी है। उनकी नाराजगी का इजहार यहीं नहीं थमा, उन्होंने नागपाल के परिवार का सच बताने की चेतावनी देते हुए कहा कि असल सच्चाई जानकर सबको हैरानी होगी। अहमद हसन ने मस्जिद की दीवार गिराए जाने पर दुर्गा नागपाल से माफी मांग लेने को कहा।

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नागपाल के बाद मीडिया पर बरसते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पत्रकारों में से पांच प्रतिशत सरकार को बदनाम करने में लगे हैं। उन काली भेड़ों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा ये वो लोग है जो पिछली सरकारों में अधिकारियों के तबादले कराने में लगे रहते थे। उन्होंने मीडिया कर्मियों को सेक्युलर होने की सलाह देते हुए कहा कि दुर्गा नागपाल की लोकप्रियता की तुलना अमिताभ बच्चन से करना अति है।

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आइएएस एसोसिएशन को निशाने पर लेते हुए अहमद हसन ने अधिकारियों से अपनी डयूटी के बजाए सियासत न करने की सलाह दी और बसपा शासन में एक नॉन आइएएस अधिकारी द्वारा किए गए दु‌र्व्यवहार को याद दिलाया। उन्होंने अपने 35 साल के सेवाकाल में कोई दाग न लगने का जिक्र करते हुए कहा कि एक आइएएस को अपनी गरिमा और मर्यादा का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। आइएएस एसोसिएशन के रवैये पर एतराज जताते वक्त वहां एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक रंजन भी मौजूद थे।

नाराज स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार को भी लपेटा और असहयोग करने का आरोप लगाया। 108 नंबर वाली एम्बुलेंस सेवा की धनराशि रोक लेने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जरूरी बजट मुहैया न कराते तो गरीबों की चिकित्सा सुविधा देने में बाधा आती है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के असहयोगात्मक रवैये के चलते उन्हें गरीबों की मदद करने में जूझना पड़ रहा है।

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