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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चुनौतियों से विश्वसनीय तरीके से निपटे नेपालः सुषमा

By Sanjeev TiwariEdited By:
Published: Mon, 19 Oct 2015 02:51 AM (IST)Updated: Mon, 19 Oct 2015 03:00 AM (IST)

भारत की यात्रा पर आए नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। भारत की यात्रा पर आए नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। सुषमा के साथ उन्होंने नेपाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

इस दौरान सुषमा ने उनसे कहा कि भारत जल्द ही नेपाल में स्थिति सामान्य होते देखना चाहता है। भारत को उम्मीद है कि नेपाल अपनी चुनौतियों से विश्वसनीय तरीके से निपटने के लिए जल्द-से-जल्द उपयुक्त कदम उठाएगा। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद से दोनों देशों के बीच यह पहली उच्चस्तरीय वार्ता थी। थापा ने भी उम्मीद जताई कि नेपाल मधेशी आंदोलन से पैदा हुई अशांति का जल्द समाधान कर लेगा।

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इस दौरान उन्होंने भारत से जरूरी सामान की आपूर्ति में गतिरोध को लेकर अपनी चिंता से सुषमा को अवगत कराया। सूत्रों के मुताबिक, इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा नेपाल की अपनी अशांति के कारण आ रही है। थापा ने जब उनसे अनुरोध किया कि जिन क्रासिंग प्वाइंट पर कोई गतिरोध नहीं है, वहां से होकर सामान भेजा जा सकता है। इस पर सुषमा ने कहा कि वहां से होकर मौजूदा क्षमता के मुताबिक ही वस्तुओं की आपूर्ति की जा सकती है।

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इससे पहले थापा ने राजनाथ सिंह के साथ अपने देश में मधेशी पार्टियों के बंद से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की। थापा ने नेपाल की वर्तमान स्थिति के बारे में सिंह को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण के मैदानी इलाके में भारतीय मूल के मधेशियों के हिंसात्मक प्रदर्शन के बाद बंद और जाम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रुक गई है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने थापा को मधेशियों को भरोसे में लेने की सलाह दी। मधेशियों के हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए टकराव में 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मधेशी और थारू समुदाय के लोग संविधान में बदलाव की मांग कर रहे हैं। नेपाल को सात प्रांतों में बांटे जाने को भी वे अपने अधिकार का हनन मान रहे हैं।

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