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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिसोदिया ने जारी किया LG से तबादलों का अधिकार छीनने का फरमान

By Rajesh NiranjanEdited By:
Published: Tue, 19 May 2015 08:14 AM (IST)Updated: Tue, 19 May 2015 10:32 AM (IST)

दिल्ली सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उपराज्यपाल से आला अधिकारियों (सुपर टाइम स्केल) के तबादले का अधिकार छीनने के ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, [अजय पांडेय]। दिल्ली सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उपराज्यपाल से आला अधिकारियों (सुपर टाइम स्केल) के तबादले का अधिकार छीनने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए 21 साल पुराने सरकारी फरमान को भी पलट दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा 15 मई को जारी आदेश के अनुसार अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) और दिल्ली अंडमान निकोबार सिविल सर्विसेज (दानिक्स) के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का फैसला अब सेवाएं विभाग संभालने वाले मंत्री ही करेंगे।

चूंकि यह विभाग सिसोदिया के ही पास है लिहाजा उनके आदेश का सीधा तात्पर्य यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति अथवा उनके स्थानांतरण का फैसला उपमुख्यमंत्री ही करेंगे। आपको बता दें कि राजधानी में आला अधिकारियों से लेकर अन्य कर्मचारियों तक की नियुक्ति और उनके तबादलों के अधिकार को लेकर करीब 21 साल पहले 9 मई, 1994 को दिल्ली सरकार के सेवाएं विभाग के सचिव बलबीर सिंह की ओर से आदेश जारी किया गया था।

इसमें स्पष्ट कहा गया था कि सरकार के सचिव और विभागाध्यक्षों के तबादले उपराच्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह से करेंगे। इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया।

उप मुख्यमंत्री द्वारा जारी किए गए आदेश में तबादलों के मामले में उपराच्यपाल को इस दायरे से बाहर कर दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री भी इस प्रक्रिया से अलग कर दिए गए हैं। अब मुख्य सचिव के पास इंट्री लेवल के दानिक्स अधिकारियों के तबादले का अधिकार बच गया है।

सिसोदिया ने अपने इस आदेश को जारी करने के लिए कार्य संपादन नियम (ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल) 1993 की धारा 15 और 16 में सरकार को प्राप्त अधिकारों का हवाला दिया है। समझा जा रहा है कि सरकार ने इसी आदेश के आधार पर सामान्य प्रशासन व सेवाएं विभाग के प्रमुख सचिव अनिंदो मजूमदार को पद से हटाने और उनका कार्यभार मुख्यमंत्री के सचिव राजेंद्र कुमार को सौंपने का फैसला किया।

उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री के आदेश को लेकर राजनिवास और दिल्ली सचिवालय के बीच की लड़ाई और तेज होने की आशंका है। यह भी कहा जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले के आदेश एक मंत्री के माध्यम से जारी किए जाएं, इसे लेकर नौकरशाही को भी भारी आपत्ति हो सकती है। उपराच्यपाल के लिए भी इस आदेश को मानना संभव नहीं है।

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नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली सरकार पर अधिकार को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराच्यपाल नजीब जंग के बीच चल रही लड़ाई अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है। इस संबंध में अपनी बात रखने के लिए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के लिए समय मांगा था। मुख्यमंत्री को मंगलवार शाम को छह बजे का समय दिया गया है।

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