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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कानपुर: मोदी की रैली, भाजपा का टोटका

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Published: Fri, 18 Oct 2013 10:28 AM (IST)Updated: Fri, 18 Oct 2013 10:31 AM (IST)

गुजरात के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 1

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कानपुर [प्रवीन शर्मा]। गुजरात के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 19 अक्टूबर को बुद्धा पार्क से हुंकार भरेंगे। लोकसभा चुनाव के लिए 'ऑपरेशन यूपी' का आगाज मोदी कानपुर से ही क्यों कर रहे हैं? यह सवाल उठना जायज है लेकिन कानपुर की सरजमीं पर हुईं ऐतिहासिक रैलियों और उनके परिणाम इस बात की चुगली कर रहे है कि भाजपा 1999 के बाद 2013 में फिर टोटका करना चाहती है।

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उस समय अटल बिहारी बाजपेई की रैली के बाद भाजपा केंद्र की सत्ता में आई थी और मोदी फेस वैल्यू हैं। हालांकि इसे पहले इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी इस टोटके पर खरे उतर चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजनीति में परिवर्तन की बयार जब कभी भी चली, उसमें कानपुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। या यूं कहें कि कनपुरियों ने हमेशा चढ़ते सूरज को सलाम किया।

इसके पुख्ता सुबूत भी हैं। वर्ष 1977 के चुनाव में आपातकाल की छाया इस कदर हावी हुई कि कांग्रेस के पास गंवाने को कुछ नहीं बचा, लेकिन 1980 के चुनाव में कांग्रेस फिर से मजबूती के साथ खड़ी हो गई। तब इंदिरा गांधी ने यहां देर रात तक रोड शो किया था और फूलबाग की रैली भी ऐतिहासिक रही थी। इंदिरा फिर से पीएम की कुर्सी पर विराजमान हुई थीं।

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इंदिरा जी के निधन के बाद वर्ष 1991 में राजीव गांधी ने फिर रात में रोड शो किया और कांग्रेस फिर केंद्र की सत्ता में काबिज हुई। वर्ष 1998 के चुनाव में भाजपा ने अटल बिहारी बाजपेई को प्रोजेक्ट किया। भाजपा को लेकर देश में एक बूम बनी और तब अटल जी ने फूलबाग मैदान से चुनाव का शंखनाद किया। टोटका इस बार भी काम आया और राजग ने केंद्र की सत्ता संभाली।

अटल की इस रैली के 14 साल बाद भाजपा फिर से टोटका करने जा रही है। इस बार चेहरा मोदी है जिन्हें मौजूदा राजनीति में बेहद मजबूत पीएम के रूप में देखा जा रहा है। कानपुर से 'ऑपरेशन यूपी' शुरुआत करने के पीछे राजनीति के जानकार यह भी मानते है कि इससे कानपुर और कानपुर देहात की सीट के अलावा आलू बेल्ट में भी धमक सुनाई देगी, जहां सपा और कांग्रेस का कब्जा रहा है। फरूखाबाद, जालौन, इटावा, एटा, उन्नाव और मैनपुरी में भी भाजपा के लिए माहौल बनेगा। अब देखना यह है कि भाजपा का यह टोटका कितना कारगर साबित होता है। अगर मोदी कनपुरियों को रिझाने में कामयाब हुए तो भाजपा का इस बेल्ट से काफी सफलता मिल सकती है।

एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि मोदी कानपुर से चुनाव लड़ सकते है। इस संबंध में पार्टी स्तर से कवायद भी की गई। इसके अलावा लखनऊ और बनारस से भी लड़ने की चर्चा हैं।

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