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    योजना से अंजाम तक निगरानी रखता था यासीन

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    Updated: Thu, 29 Aug 2013 10:47 PM (IST)

    जागरण संवाददाता, मुंबई। यासीन भटकल महाराष्ट्र में हुए कई विस्फोटों की योजना बनाने से लेकर धमाकों तक की निगरानी खुद करता रहा है। इसलिए महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ता (एटीएस) यासीन को हिरासत में लेकर यहां हुए सभी धमाकों के मामले में पूछताछ करना चाहता है। महाराष्ट्र पुलिस को यासीन की तलाश 2006 में हुए लोकल ट्रेन विस्फोटों से

    जागरण संवाददाता, मुंबई। यासीन भटकल महाराष्ट्र में हुए कई विस्फोटों की योजना बनाने से लेकर धमाकों तक की निगरानी खुद करता रहा है। इसलिए महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ता (एटीएस) यासीन को हिरासत में लेकर यहां हुए सभी धमाकों के मामले में पूछताछ करना चाहता है। महाराष्ट्र पुलिस को यासीन की तलाश 2006 में हुए लोकल ट्रेन विस्फोटों से लेकर 13 जुलाई, 2011 को मुंबई में हुए तिहरे धमाके मामलों तक में है।

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    वर्ष 2006 में मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें सीधे यासीन का नाम तो नहीं आया है, लेकिन विस्फोट इंडियन मुजाहिदीन द्वारा कराए जाने के कारण पुलिस उससे पूछताछ करना चाहती है। इसके अलावा 13 फरवरी, 2010 को पुणे के जर्मन बेकरी विस्फोटकांड में पुलिस को उसकी तलाश है। इसमें 17 लोग मारे गए थे। एटीएस के अनुसार जर्मन बेकरी के आसपास से मिले सीसीटीवी फुटेज से यासीन भटकल की तस्वीरें मिली थीं। सूत्रों के अनुसार यासीन की इन तस्वीरों की पहचान उसके भाई समद ने भी की है। समद को जर्मन बेकरी विस्फोटकांड के बाद ही कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। पुणे के ही जंगली महाराज रोड पर पहली अगस्त, 2012 को तीन अलग-अलग स्थानों पर हुए धमाकों के मामले में भी पुलिस को यासीन की तलाश है। इन धमाकों में एक की मौत हुई थी और दो दर्जन से ज्यादा घायल हुए थे।

    इससे पहले 13 जुलाई, 2011 को मुंबई में शाम के समय भीड़-भाड़ वाली तीन जगहों पर सिलसिलेवार धमाकों में भी पुलिस को यासीन की तलाश है। दादर, ओपेरा हाउस और झावेरी बाजार में हुए इन धमाकों में 27 लोग मारे गए थे। यासीन ने इन विस्फोटों को अपनी निगरानी में अंजाम दिलाया था। इसके लिए वह मुंबई के भायखला स्थित एटीएस कार्यालय से कुछ दूरी पर किराए का कमरा लेकर करीब एक महीने रहा था, लेकिन दिल्ली और मुंबई पुलिस की आपसी खींचतान में वह बच निकला था।

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