माल्या की हेराफेरी पर सियासी जोरा-जोरी, सांसदी रद करने की उठी मांग
नौ हजार करोड़ रुपये की देनदारी को भूल फरार शराब किंग विजय माल्या जहां विदेश में अपनी फार्मूला 1 रेस कंपनी के प्रचार में जुटे हैं। वहीं भारत में उनकी फरारी को लेकर राजनीतिक जोरा-जोरी चरम पर पहुंच गई है।
नई दिल्ली। नौ हजार करोड़ रुपये की देनदारी को भूल फरार शराब किंग विजय माल्या जहां विदेश में अपनी फार्मूला 1 रेस कंपनी के प्रचार में जुटे हैं। वहीं भारत में उनकी फरारी को लेकर राजनीतिक जोरा-जोरी चरम पर पहुंच गई है।
अपनी संप्रग सरकार के ही कार्यकाल में माल्या को राहत पहुंचाने वाली कांग्रेस ने अब मोदी सरकार पर हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने सीधा आरोप लगाया कि माल्या की फरारी एक 'आपराधिक षड़यंत्र' है। वहीं केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस को बोफोर्स दलाली से जुड़े क्वात्रोची की याद दिलाते हुए पूछ लिया है कि उसे किसने भगाया था? जेटली ने यह भी याद दिलाया कि माल्या को ऋण संप्रग काल में दिया गया था और राजग सरकार उससे पूरी वसूली के लिए कदम उठा रही है।
पिछले सप्ताह ही ब्रिटेन फरार हो चुके माल्या को लेकर गुरुवार को संसद का दोनों सदन गर्म था। क्वात्रोची और उससे पहले भोपाल गैस त्रासदी के दोषी एंडरसन को संरक्षण में देश से भगाए जाने का आरोप झेलती रही कांग्रेस ने माल्या की फरारी को भी वही रूप देने की कोशिश की और इलजाम राजग सरकार पर लगाया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल पूछा कि जब वकील बैंकों को 28 फरवरी को ही माल्या का पासपोर्ट जब्त करने की सलाह दे चुके थे तो देरी क्यों की गई। बैंक ने 3 मार्च को कार्रवाई शुरू की जबकि माल्या 2 मार्च को ही फरार हो चुका था। यह कोताही क्यों हुई?
बाहर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हमला और तेज करते हुए कहा- 'जनता जानना चाहती है कि नौ हजार करोड़ रुपये की देनदारी के बावजूद सरकार ने माल्या को देश कैसे छोड़ने दिया?' उनका रुख साफ बताता है कि आने वाले चुनावों में भी वह इसे मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल का जवाब जेटली ने भी संसद के बाहर ही दिया। उन्होंने कहा- 'क्वात्रोची और माल्या के फरार होने में फर्क है। तत्कालीन सीबीआइ निदेशक की ओर पासपोर्ट जब्त करने के पत्र के बावजूद क्वात्रोची पर कार्रवाई नहीं की गई। दो दिन बाद ही वह फरार हो गया। उसे किसने भगाया था?' दोनों सदनों में जेटली ने बताया कि माल्या को बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का ऋण संप्रग काल में ही दिया गया था। उसे हर तरह से मदद पहुंचाई गई। रही उसे भागने से रोकने की बात तो उसकी एक कानूनी प्रक्रिया होती है। या तो पासपोर्ट जब्त किए जाएं या फिर अदालत से आदेश हों। बैंक सुप्रीम कोर्ट गए थे तो इसी उम्मीद से कि पासपोर्ट जब्त किया जाए। जेटली ने स्पष्ट किया कि बैंक ने कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरी रकम वसूलने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। माल्या के अलावा ऐसे लोगों की सूची भी सरकार के पास है जो जानबूझकर कर्ज अदा नहीं कर रहे हैं। उनका संकेत था कि सरकार ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी।
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संसद सदस्यता रद करने की मांग
नई दिल्ली। फरार विजय माल्या की राज्यसभा सदस्यता रद करने की मांग भी सबसे पहले सदन में ही उठी। सपा सदस्य नरेश अग्रवाल ने कहा कि दिवालिया, भगौड़ा और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति संसद सदस्य नहीं हो सकता है। फिर माल्या कैसे सदस्य बना रह सकता है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान अग्रवाल ने कहा कि माल्या के उपर नौ हजार करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। वह फरार भी है। लिहाजा नियम तोड़े जाने पर मामले को आचार समिति के पास भेजकर सदस्यता रद्द करनी चाहिए थी।
उप सभापति पीजे कुरियन ने सहमति जताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संवैधानिक परंपरा का पूरी तरह पालन हो और नियमों का उल्लंघन न होने पाए।नियम के अनुसार राज्यसभा के किसी भी सदस्य को अगर भ्रष्टाचार में लिप्त में पाया जाता है तो उसे निष्कासित करने के लिए राष्ट्रपति की मजूंरी चाहिए होती है।
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