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    AN-32 का अब तक न मिल पाना किसी अनहोनी की ओर इशारा: पर्रिकर

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Tue, 26 Jul 2016 05:55 PM (IST)

    लापता हुए एएन 32 विमान का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने सदन को बताया है कि इसको तलाशने में काेेई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

    नई दिल्ली (आईएएनएस)। बंगाल की खाड़ी में लापता हुए भारतीय वायुसेना के विमान एएन-32 का पांचवें दिन भी कुछ पता नहीं चला है। इस बीच सर्च ऑपरेशन का दायरा 300 नॉटिकल माइल से बढ़ाकर 360 नॉटिकल माइल कर दिया गया है। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि विमान का अब तक न मिल पाना किसी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं। उन्होंने इसको दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया है।

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    उन्होंने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि विमान को तलाशने के लिए कई संसाधन लगाए गए हैं। अभी तक मिली जानकारियां किसी अनहोनी की ओर इशारा कर रही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि जांच में जुटे दल किसी क्षेत्र से आई आवाज या कुछ कड़ियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विमान की तलाश के दौरान सामने आई कुछ जानकारियां गुमराह करने वाली हैं। उन्होंने बताया कि विमान को गहरे समुद्र में तलाशने के लिए राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान के हिम श्रेणी के अत्याधुनिक पोत सागर निधि को मॉरिशस से बुलाया गया है।

    उन्होंने बताया कि मॉरिशस से आने वाले पोत के लिए भी यह काम इतना आसान नहीं होगा। इसके लिए उसे एक निर्दिष्ट क्षेत्र की आवश्यकता होती है। क्योंकि पानी के भीतर गहराई में जा सकने वाले पोत दरअसल तब तक तलाश नहीं कर सकते, जब तक आपके पास कोई निश्चित छोटा क्षेत्र नहीं हो। इसलिए पहले हुई डोर्नियर दुर्घटना के दौरान भी जब पनडुब्बी ने उस स्थल की पहचान की थी उसके बाद ही इस पोत को वहां भेजा गया था।

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    गौरतलब है कि 22 जुलाई को यह विमान पोर्ट ब्लेयर की उड़ान पर था। लेकिन चेन्नई एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही यह विमान राडार से गायब हो गया था। इस विमान में कुल 29 लोग सवार थे। इस विमान की खोज में 17 जहाज, एक पनडुब्बी और 23 विमान लगे हुए हैं। अभी तक यह समुद्र की सतह पर लापता विमान के मलबे का पता लगाने में नाकाम रहे हैं, लिहाजा अब यह पूरा अभियान विमान में लगे इमरजेंसी लोकेटेर ट्रांसमीटर (ईएलटी) से मिलने वाले किसी सिग्नल पर भी निर्भर है।


    इमरजेंसी लोकेशन बीकन एक ऐसा उपकरण है जो विमान के क्रैश होने या इमरजेंसी लैंडिंग की स्थिति में एक खास फ्रिक्वेंसी पर तत्काल सिग्नल भेजता है। वायुसेना के विमान एएन-32 में जो बीकन लगा था, उसकी बैटरी क्षमता कम से कम 48 घंटे की है। बताया जाता है कि सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम को ट्रांसमीटर से कोई सिग्नल नहीं मिला है।