यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अमरनाथ यात्रा में खलल डालना चाहते हैं आतंकी: परनायक
ऊधमपुर [जागरण संवाद केंद्र]। सेना के उत्तरी कमान प्रमुख केटी परनायक ने सोमवार को कहा कि खुफिया सूचना के मुताबिक ...और पढ़ें

ऊधमपुर [जागरण संवाद केंद्र]। सेना के उत्तरी कमान प्रमुख केटी परनायक ने सोमवार को कहा कि खुफिया सूचना के मुताबिक आतंकियों का इरादा इस बार अमरनाथ यात्रा में खलल डालने का है। इसके लिए आतंकी टूथपेस्ट या किताब जैसी चीजों में बम छिपाकर श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं, लेकिन सेना उनके नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने देगी। 'ऑपरेशन शिवा' नामक अभियान चलाकर सेना श्रद्धालुओं की सुरक्षा करेगी।
उत्तरी कमान के 42वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारवार्ता में परनायक ने कहा कि खुफिया सूचनाओं के बाद श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड, राज्य सरकार और सुरक्षाबल पूरी एहतियात बरत रहे हैं। यात्रा के दौरान पुलिस, सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षाबलों के साथ सेना भी मौजूद रहेगी और पूरी यात्रा की निगरानी करेगी। कश्मीर में लागू अफस्पा के बारे में उन्होंने कहा कि यह शक्तिशाली एक्ट है और सुरक्षाबलों को सुरक्षा प्रदान करता है। अफस्पा का कभी गलत प्रयोग नहीं हुआ है। पाकिस्तान में अब भी आतंकी ढांचे मौजूद हैं। लांचिंग पैड पर 300 से 400 आतंकी हर समय मौजूद रहते हैं। घुसपैठ रोकने के लिए पुलिस की मदद से संयुक्त टीम गठित की गई है। 2014 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हट रही है, लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की जरूरत है। सेना ने सरकार को अपना सुझाव भेज दिया है।
एक सवाल के जवाब में परनायक ने कहा कि सेना की माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने का प्रस्ताव है। कैबिनेट सुरक्षा समिति से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कोर खड़ी कर उसकी तैनाती की जाएगी। पुंछ जिले के मेंढर में भारतीय सीमा में घुसकर दो जवानों का सर काटने की घटना पर परनायक ने कहा कि घुसपैठ न कर पाने की बौखलाहट में पाक सेना व लश्कर ने घटना को अंजाम दिया था। इसका करारा जबाव दे दिया गया है।
चीनी घुसपैठ पर नहीं हुआ किसी तरह का समझौता
लद्दाख में चीनी सैनिकों की हालिया घुसपैठ पर जनरल परनायक ने कहा कि तनाव को पूरे संयम और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया। इसमें न तो सेना ने भारतीय क्षेत्र में बने अपने किसी ढांचे को गिराया और न ही अन्य किसी प्रकार का कोई समझौता किया। ऐसी स्थिति फिर न हो, इसके लिए बार्डर पर्सनल मीटिंग, हॉट लाइन व फ्लैग मीटिंग में चर्चा की जा रही है।
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