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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

..वे छोटे भाई हैं, उन्हें 'प्रतिद्वंद्वी' समझना निराशाजनक है

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Published: Tue, 06 Aug 2013 08:11 AM (IST)Updated: Tue, 06 Aug 2013 09:34 AM (IST)

सपा में दूसरी पंक्ति के नेताओं की कतार तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री और ...और पढ़ें

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लखनऊ। .वे छोटे भाई हैं, उनसे भयभीत होना, उन्हें 'प्रतिद्वंद्वी' समझना निराशाजनक है! युवकों को जोड़िए, उन्हें संगठन के कार्यो में मुस्तैद कीजिए। 31 अगस्त तक 14 प्रकोष्ठों की जिला, नगर इकाई का गठन करा लिया जाए। यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने कुछ इसी अंदाज में पार्टी नेताओं को पत्र भेजा है। सपा में दूसरी पंक्ति के नेताओं की कतार तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला अध्यक्षों और महासचिवों को (बुजुर्ग नेताओं) को सरकुलर भेज कर युवाओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे घबराएं नहीं, युवाओं को आगे बढ़ाएं। खत में वरिष्ठों को डांटने-फटकारने के साथ ही पुचकारने का प्रयास भी किया गया है, लेकिन बेकरारी युवकों को सपा से जोड़ने की है।

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प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में युवाओं को तवच्जो देने की वकालत करने के साथ ही तर्क दिया है कि अगर छात्र सभा अच्छा कार्य करेगी, कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा तो छात्र पार्टी से जुड़ेंगे। इसी प्रकार व्यापार सभा अगर युवा व्यापारियों को संगठन में मौके देगी, उनसे संगठन का कार्य कराएगी तो युवा कारोबारी सपा के साथ आएंगे। इस खत में खुलासा किया गया है कि जुलाई माह में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की समीक्षा बैठकों में प्रकोष्ठों से जुड़े कई निराशा जनक बातें सामने आई। यह जानकर आश्चर्य हुआ था कि 14 प्रकोष्ठों के जमीनी कार्यकलाप ना के बराबर हैं। ज्यादातर प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी तक गठित नहीं हुई है।

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इसके लिए प्रकोष्ठों के साथ मुख्य संगठन के जिलाध्यक्ष भी जिम्मेदार हैं। दरअसल, कई महानगर, जिलाध्यक्षों को भय रहता है कि कहीं युवक या प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्ष उनसे आगे न निकल जाएं। इसलिए उन्हें प्रतिद्वंदी समझ लिया जाता है, यह स्थिति निराशाजनक है। जिला, महानगर या विधानसभा कमेटियों की आंतरिक बैठक में इस खत को पढ़कर सुनाने की हिदायत देने के साथ ही प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्षों को माह में कम से कम सात जिलों का दौरा करने का टारगेट दिया है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष के इस खत को लोकसभा चुनावों की तैयारियों को धार देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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