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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जेएनयू: इस छोटे से झूठ से दोस्ती में आई दरार और छिन गई 'रोशनी'

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Published: Fri, 02 Aug 2013 08:49 AM (IST)Updated: Fri, 02 Aug 2013 10:29 AM (IST)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र के जानलेवा हमले की शिकार छात्र रोशनी सफदरजंग अस्पताल के आइसीयू में जिंदगी और ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र के जानलेवा हमले की शिकार छात्र रोशनी सफदरजंग अस्पताल के आइसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। दो सर्जरी के बाद उसकी हालत में मामूली सुधार हुआ है।

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बड़े भाई, बहन व जेएनयू के प्रोफसर द्वारा नाम लिए जाने पर उसने बृहस्पतिवार दोपहर को आंखें खोलीं। उसके हाथ-पांव में भी जान आ रही है। बावजूद इसके रोशनी की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे जीवनरक्षक उपकरण वेंटिलेटर के सहारे रखा गया है।

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जेएनयू के वाइस चांसलर एसके सोपोरी ने अस्पताल पहुंचकर रोशनी का हाल-चाल जाना। दोपहर में जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिट्रेचर एंड कल्चर स्टडीज के डीन प्रो. एम असलम व प्रो. मनु मित्तल ने भी अस्पताल पहुंचकर रोशनी को देखा। छात्र के भाई-बहन उससे मिलने के लिए तरसते रहे।

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जेएनयू प्रोफेसरों व एक डॉक्टर के कहने पर शाम करीब चार बजे भाई-बहन को मिलने दिया गया। दोनों करीब 10 मिनट आइसीयू में बहन के पास रहे। रोशनी से मिलकर लौटने के बाद बड़े भाई सुधीर ने बताया कि जब उसका नाम लिया तो उसने एक आंख खोली। सुधीर ने बताया कि उसके सिर, गर्दन व हाथ पर गंभीर चोट आई है।

अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, वह अब हाथ-पांव भी हिला रही है। फिलहाल वह अर्धबेहोशी की स्थिति में है। इलाज कर रहे डॉक्टरों को उम्मीद है कि उसकी सेहत में सुधार हो जाएगा। एक-दो दिन उसके लिए संवेदनशील हैं। डॉक्टरों को डर था कि उसके सिर में गंभीर चोट होने से पैरालिसिस हो सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी दवा नहीं चल रही है।

जेएनयू प्रकरण में वसंत कुंज उबरी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस की दो टीमें बृहस्पतिवार सुबह जेएनयू पहुंची। टीमों ने आकाश के झेलम छात्रवास स्थित कमरा नंबर 131 व रोशनी के शिप्रा छात्रवास स्थित कमरा नंबर 202 में घंटों तलाशी ली। पुलिस ने आकाश के रूम पार्टनर से भी पूछताछ की। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन, लैपटॉप व अन्य सामान जब्त किए। दोनों की कॉल डिटेल भी निकलवाई जा रही है। जेएनयू प्रशासन के अनुरोध पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अन्य छात्र के उकसाने पर तो आकाश ने यह कदम नहीं उठाया। हालांकि, डीसीपी बीएस जायसवाल का कहना है कि अगर ऐसा होता तो वह खुदकुशी नहीं करता।

डीसीपी के मुताबिक अब तक की जांच से पता चला है कि आकाश की रोशनी से गहरी दोस्ती थी। कुछ माह पूर्व रोशनी व उसकी बहन ने बातचीत के दौरान आकाश से झूठ बोल दिया कि गया में उनके रिश्तेदार रहते हैं। काफी कोशिश के बाद उसे पता चला कि दोनों बहनों ने उसे झूठ कहा था। इस झूठ से आकाश इतना आहत हुआ कि दोनों की दोस्ती में दरार पड़ गई। रोशनी के झूठ को लेकर वह गुमसुम रहने लगा और अचानक इतना बड़ा कदम उठा बैठा। सुसाइड नोट में उसने दोस्ती की पूरी कहानी बयां की है। इसमें कहीं भी प्यार होने, प्यार टूटने आदि का जिक्र नहीं है। उसने झूठ बोलने से दुख पहुंचने का बार-बार जिक्र किया है। दूसरी ओर, एम्स ट्रामा सेंटर में पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार को आकाश का शव परिजनों को सौंप दिया गया। शव को परिजन गया ले गए हैं।

कक्षा की टॉपर है रोशनी

डिपार्टमेंट ऑफ कोरियन लैंग्वेज में स्नातक तृतीय वर्ष की छात्र रोशनी चौथे सेमेस्टर में टॉप (करीब 86 फीसद अंक) की थी। उसके भाई सुधीर ने बताया कि जेएनयू से उसे छात्रवृत्ति भी मिल रही है। वह पढ़ाई के अलावा किसी चीज पर ध्यान नहीं देती थी।

रोशनी की बहन भी जेएनयू से कर रही पढ़ाई

मूलरूप से मुजफ्फरपुर के शंकर नगर के रहने वाली रोशनी के तीन भाई व दो बहन है। बड़ी बहन भी जेएनयू की छात्र है। बड़े भाई ने भी जेएनयू से पढ़ाई की थी। सुधीर चेन्नई में व्यवसाय करते हैं। उन्होंने कहा कि घटना की सूचना पाकर फ्लाइट से बुधवार रात दिल्ली पहुंचा। माता-पिता भी ट्रेन से आ रहे हैं।

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