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    दोहरे अंक में पहुंची खाद्य महंगाई, 23 माह के उच्चतम स्तर

    By Kishor JoshiEdited By:
    Updated: Tue, 16 Aug 2016 10:13 PM (IST)

    जुलाई माह में थोक महंगाई दर बढ़कर 3.55 फीसदी पर पहुंच गई है।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। खाने पीने की चीजें महंगी होने से जुलाई में थोक महंगाई दर बढ़कर 3.55 प्रतिशत हो गयी है जो बीते 23 महीने में सबसे ज्यादा है। खास बात यह है कि खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर दोहरे अंक में पहुंचकर 11.82 प्रतिशत पर पहुंच गयी है।

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    प्याज को छोड़कर बाकी सभी खाद्य वस्तुओं के मूल्यों में तेजी से वृद्धि हुई है। थोक महंगाई में आए इस उछाल के मद्देनजर सरकार पर आपूर्ति सुधारने का दवाब बढ़ गया है। वहीं थोक महंगाई का असर आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है जिसके आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक अपनी ब्याज दरें तय करता है।

    महंगाई का चौतरफा हमला

    थोक महंगाई दर में यह उछाल खुदरा महंगाई दर में वृद्धि के साथ ही आया है। खुदरा महंगाई दर भी जुलाई में 23 माह के उच्चतम स्तर 6.07 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वैसे थोक महंगाई दर इस साल जून में 1.62 प्रतिशत तथा पिछले साल जुलाई में शून्य से चार फीसद नीचे थी। इससे पहले थोक महंगाई दर का उच्च स्तर अगस्त 2014 में दर्ज किया गया था। उस समय महंगाई दर 3.74 प्रतिशत थी। उल्लेखनीय है कि थोक महंगाई दर नवंबर 2014 से मार्च 2016 तक शून्य से नीचे रहने के बाद अप्रैल से शून्य से ऊपर गयी है।

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    अब आलू व दालों ने रुलाया

    वाणिज्य मंत्रालय से जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की कीमत में पिछले साल के मुकाबले सर्वाधिक 58.78 प्रतिशत उछाल आलू की कीमत में आया है। वहीं दालों की भी कीमतों में 35.76 प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि सब्जियां 28.05 प्रतिशत और अनाज 7.03 प्रतिशत महंगे हुए हैं। वहीं चीनी की महंगाई दर भी 32.33 प्रतिशत और फलों की 17.30 प्रतिशत बढ़ी है।

    बैंक ब्याज दरों में कमी मुश्किल

    इस तरह थोक और खुदरा महंगाई दर में वृद्धि का रुख रहते देख रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती न करने के अपने मौजूदा रवैये पर अडिग रह सकता है। वैसे भी सरकार और रिजर्व बैंक के बीच हुए समझौते के बाद केंद्र ने मौद्रिक नीति समिति का गठन किया है जिसकी जिम्मेदारी महंगाई दर को छह प्रतिशत से नीचे कायम रखना है। सरकार ने इस समिति के लिए अगले पांच साल का महंगाई का लक्ष्य चार प्रतिशत तय किया है।

    महंगाई दर इस लक्ष्य से दो प्रतिशत अधिक या दो प्रतिशत कम रह सकती है। इस तरह सरकार ने महंगाई बर्दाश्त करने की उच्चतम सीमा छह प्रतिशत तय कर दी है। यही समिति महंगाई के लक्ष्य के आधार पर ब्याज दरें तय करने के संबंध में फैसला करेगी।

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