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    अब हवाई यात्रियों की बारी, जेट और स्पाइस जेट का किराया हुआ काफी महंगा

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    Updated: Mon, 30 Mar 2015 06:40 PM (IST)

    रुपये की कीमत में गिरावट और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में वृद्धि से हलकान जेट एयरवेज ने भी स्पाइस जेट की तर्ज पर अपने किरायों में 25 फीसद का भारी इजाफा कर दिया है। बढ़े किराये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

    नई दिल्ली, [जागरण ब्यूरो]। रुपये की कीमत में गिरावट और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में वृद्धि से हलकान जेट एयरवेज ने भी स्पाइस जेट की तर्ज पर अपने किरायों में 25 फीसद का भारी इजाफा कर दिया है। बढ़े किराये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। बजट एयरलाइन स्पाइसजेट पहले ही अपने किरायों में इतनी बढ़ोतरी कर चुकी है। अब एयर इंडिया समेत दूसरी एयरलाइनों की ओर से भी किराया बढ़ाए जाने की संभावनाएं हैं।

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    सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को भी बुधवार को ही किरायों पर विचार करना था, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसके निर्णय की सूचना नहीं मिल सकी। इंडिगो और गो एयर भी अगले कुछ दिनों में कभी भी किराये में वृद्धि का एलान कर सकती हैं। एयरलाइनों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में जहां लागतें बढ़ीं, वहीं किराये कम हुए थे। इसलिए अब वृद्धि के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।

    हवाई किरायों में वृद्धि हाल के दिनों में एटीएफ की कीमतों में 6.7 फीसद की बढ़ोतरी तथा रुपये की कीमतों में तकरीबन 15 फीसद की गिरावट के मद्देनजर हो रही है। रुपये के लुढ़कने के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, उससे भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। इसके मद्देनजर तेल कंपनियों ने पहली सितंबर से एटीएफ कीमतों में 6.7 फीसद बढ़ोतरी करते हुए इसका दाम 75,031 रुपये प्रति किलोलीटर कर दिया था। इससे पहले जुलाई और अगस्त में भी एटीएफ के दाम बढ़ाए जा चुके थे। कुल मिलाकर तीन महीनों में एटीएफ के दाम 22 फीसद तक बढ़ चुके हैं। एटीएफ का एयरलाइनों की कुल लागत में 40 फीसद से ज्यादा योगदान होता है।

    बहरहाल, स्पाइस जेट और जेट एयरवेज के किरायों में वृद्धि के साथ ही दिल्ली-मुंबई सेक्टर का तुरंत बुकिंग किराया 7,000 रुपये से बढ़कर औसतन 10,000 रुपये हो गया है। किरायों में इस भारी बढ़ोतरी के बाद अब हवाई यात्रियों की संख्या में कमी का अंदेशा है। यातायात में गिरावट के संभावित रुख को थामने के लिए एयरलाइनें एक बार फिर सरकार पर एटीएफ पर बिक्री कर घटाने का दबाव बना सकती हैं।