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    एच-1बी वीजा के लिए देने होंगे 6.6 लाख रुपये

    By Sachin MishraEdited By:
    Updated: Sun, 20 Dec 2015 08:17 AM (IST)

    तकरीबन सभी भारतीय आइटी कंपनियों को अगले साल एक अप्रैल से अमेरिका से एच-1बी वीजा पाने के लिए 8,000 से 10,000 डॉलर (5.36 लाख से 6.6 लाख रुपये) का भुगतान करना होगा। इससे इन कंपनियों पर खासा आर्थिक बोझ पड़ेगा।

    वाशिंगटन। तकरीबन सभी भारतीय आइटी कंपनियों को अगले साल एक अप्रैल से अमेरिका से एच-1बी वीजा पाने के लिए 8,000 से 10,000 डॉलर (5.36 लाख से 6.6 लाख रुपये) का भुगतान करना होगा। इससे इन कंपनियों पर खासा आर्थिक बोझ पड़ेगा।

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    असल में भारतीय आइटी कंपनियों पर केवल 4,000 डॉलर का नया शुल्क ही नहीं लगाया गया है, बल्कि कई अन्य शुल्क भी अमेरिकी संसद ने एच-1बी वीजा आवेदन में जोड़ दिए हैं। जिस कंसोलिडेटेड एप्रोप्रिएशंस एक्ट, 2016 के तहत वीजा शुल्क वृद्धि हुई है, उस पर राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस तरह यह कानून अमल में आ गया है।

    गौरतलब है कि मूल रूप से एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क महज 325 डॉलर है। मार्च, 2005 से इसमें रोकथाम एवं पहचान शुल्क के तौर पर 500 डॉलर और जोड़ दिए गए। फिर एंप्लॉयर सेंसरशिप फीस है, जिसके तहत 25 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को प्रति वीजा आवेदन 1500 डॉलर का भुगतान करना पड़ता है।

    जिन कंपनियों में 25 से कम कर्मी हैं, उन्हें इसका आधा 750 डॉलर का शुल्क देना होता है। यह राशि अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए जुटाई जाती है।

    नए कानून के मुताबिक जिन आइटी कंपनियों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं या जिन कंपनियों के 50 फीसद से अधिक कर्मचारी एच-1बी या एल1 वीजा धारक हैं, उन्हें प्रत्येक एच-1बी वीजा आवेदन के लिए 4,000 डॉलर अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

    एल1वीजा के मामले में यह राशि 4,500 डॉलर होगी। इसके अलावा 1,225 डॉलर की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस भी है। इसके अंतर्गत अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा 15 कारोबारी दिन के भीतर एच-1बी वीजा पर फैसला करेगा।

    भारतीय कंपनियां अक्सर अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के लिए त्वरित फैसला लेती है, लिहाजा उन्हें प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस चुकानी होगी। इसके अतिरिक्त ज्यादातर भारतीय कंपनियां एच-1बी वीजा आवेदन फीस फाइल करने के लिए बतौर अटॉर्नी फीस 1,000 डॉलर से 2,000 डॉलर के बीच भुगतान करती हैं।

    एच-1बी वीजा आवेदन फीस नॉन-रिफंडेबल होती है। यही नहीं भारतीय पेशेवर जो एच-1बी और एल1 वीजा पर अमेरिका पहुंचते हैं, उन्हें अपने पे रोल के हिस्से के तौर पर सोशल सिक्योरिटी तथा मेडिकेयर का भुगतान भी करना होता है।

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