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    राहुल की गेमचेंजर योजना ठंडे बस्ते में, बैंक खाते में एलपीजी सब्सिडी पर रोक

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    Updated: Thu, 30 Jan 2014 08:04 PM (IST)

    जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लोकलुभावन नीति लागू करने की संप्रग सरकार की खोखली कोशिश का गुरुवार को पर्दाफाश हो गया। जिस स्कीम को सरकार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आगामी आम चुनाव के लिए सबसे बड़ा 'गेमचेंजर' बता रहे थे उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में आधार कार्ड के जरिये देश भर में सीधे ग्राहकों के खाते में एलपीजी सब्सिडी देने की महत्वाकांक्षी योजना को स्थगित करने का फैसला किया गया।

    नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लोकलुभावन नीति लागू करने की संप्रग सरकार की खोखली कोशिश का गुरुवार को पर्दाफाश हो गया। जिस स्कीम को सरकार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आगामी आम चुनाव के लिए सबसे बड़ा 'गेमचेंजर' बता रहे थे उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में आधार कार्ड के जरिये देश भर में सीधे ग्राहकों के खाते में एलपीजी सब्सिडी देने की महत्वाकांक्षी योजना को स्थगित करने का फैसला किया गया।

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    बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि अब इस स्कीम की जांच-पड़ताल के लिए एक समिति का गठन होगा। समिति की रिपोर्ट के बाद ही सीधे बैंक खाते में एलपीजी सब्सिडी हस्तांतरित करने की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। समिति कब गठित होगी और इसकी रिपोर्ट कब तक आएगी, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। इससे साफ है कि संप्रग सरकार के शेष बचे कार्यकाल में इस योजना का अब कोई भविष्य नहीं बचा। सूचना व प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने यह जरूर स्पष्ट किया कि छात्रवृत्ति, वृद्धापेंशन आदि आधार से संबंधित बैंक खाते के जरिये भुगतान करने की स्कीमें जारी रहेंगी।

    बहरहाल, सरकार के इस फैसले से आधार के समूचे ढांचे और सरकारी स्कीमों को सीधे आम जनता तक पहुंचाने की कोशिशों पर कई सवाल उठ गए हैं। विपक्षी दल भाजपा आधार को लेकर पहले से ही आशंकित है। आधार का ढांचा तैयार करने में अभी तक जो हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं उसका क्या होगा? इसे अपनी सबसे अहम स्कीम बताने वाले विशिष्ट पहचान प्राधिकरण [यूआइडीएआइ] के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि की तैयारियों पर भी सवाल उठेंगे।

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    यह भी हास्यास्पद है कि इस स्कीम को लागू करने में दस दिन पहले तक पूरा सरकारी अमला लगा हुआ था। आधार से जुड़े बैंक खाते में सरकार ने कई तरह की सब्सिडी राशि डालने की स्कीम लागू की है। एलपीजी सब्सिडी इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। इस स्कीम को 289 जिलों में सरकार लागू कर चुकी है। वैसे देश के 14 करोड़ एलपीजी ग्राहकों में से 1.70 करोड़ ग्राहकों के बैंक खाते आधार नंबर के साथ जोड़े जा चुके हैं। अभी तक दो हजार करोड़ रुपये की राशि इन खातों में ट्रांसफर भी की जा चुकी है।

    माना जा रहा है कि इस स्कीम को लागू करने में आ रही दिक्कतों को देख कर ही सरकार ने इसे खारिज किया है। खास तौर पर आधार बनाने वाली एजेंसी, तेल कंपनियों और बैंकों के बीच अभी तक सही तालमेल नहीं बन पाया है। पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली का यह दावा था कि इससे सालाना 30 हजार करोड़ रुपये की एलपीजी सब्सिडी बचेगी।