सावधानी से हो तकनीक का इस्तेमाल
डिजिटल एवं ऑनलाइन विधि ने तो क्रांति ही ला दी है, लेकिन इस क्रांति में कुछ शिष्टाचार, नियम कायदे का भी ध्यान रखना जरूरी है।
कम्यूनिकेशन यानि विचारों का आदान- प्रदान, पहले मौखिक या चिट्ठी- पत्री के माध्यम से ही होता था, लेकिन समय के साथ-साथ इसमें बड़ा बदलाव आया है। मनुष्य ने इस क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति की है, डिजिटल एवं ऑनलाइन विधि ने तो इस क्षेत्र में क्रांति ही ला दी है, लेकिन इस क्रांति में कुछ शिष्टाचार, नियम कायदे का भी ध्यान रखना जरूरी है। जहां एक ओर तकनीक के कई लाभ हैं तो नुकसान भी कम नहीं हैं। इसी को देखते हुए कुछ नियम और फार्मेट बनाए गए हैं, जिन्हें प्रोटोकाल कहते हैं। आज हम कंप्यूटर तथा मोबाइल के युग में हैं, जिसमें नित्य नई तकनीक के द्वारा वीडियो, चित्र आदि तुरंत प्रेषित होते हैं।
एचटीटीपी,वैप,स जीएसएम, थ्री जी, फोर जी, जीपीआरएस, ब्यू टूथ ब्रॉड बैंड आदि अनेक प्रोटोकाल से हम परिचित हैं। वहीं अनेक विधियां हैं जिनके द्वारा हम कम्यूनिकेशन करते हैं। फोरम, वेबलॉग, ई मेल, एसएमएस, एमएमएस, वीडियो कांफ्रेंसिंग बर्चुअल वल्र्ड आदि इस तरह की विधियां हैं। हमें जहां इसका लाभ होता है वहीं हानि भी हो सकती है। र्हैंकग, क्र्लोंनग आदि ने अनेक लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया है। मैं यहां एक उदाहरण डिजिटल क्रांति के रूप में डिजिटल हस्ताक्षर का देना चाहता हूं जो आज हर दूसरे इंसान के लिए जरूरी हो गया है। वर्तमान में नागरिक द्वारा जमा किए जाने वाले कई सारे आवेदनों या प्रपत्रों पर भौतिक हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। डिजिटल हस्ताक्षर पारंपरिक कागज-आधारित हस्ताक्षर को लेता है और इसे इलेक्ट्रॉनिर्क फिंगर्रंप्रट में बदल देता है। यर्ह फिंगर्रंप्रट़ या कूट संदेश दस्तावेज और हस्ताक्षरकर्ता दोनों के लिए अद्वितीय है और उन्हें एक साथ ला देता है। संक्षेप में कहें तो डिजिटल हस्ताक्षर का वही कार्य है जो हस्तलिखित हस्ताक्षर का। डिजिटल हस्ताक्षर के कुछ मुख्य विशेषताओं में गैर-प्रत्याख्यान, समग्रता और प्रामाणिकता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सिस्टम पर आधारित डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए आवश्यक कानूनी वैधता प्रदान करता
ई-हस्ताक्षर सेवा का उद्देश्य कानूनी रूप से मान्य और नागरिकों को सुरक्षित रूप से अपने दस्तावेजों पर तत्काल हस्ताक्षर करने के लिए ऑन-लाइन मंच प्रदान करना है। इसमें शामिल दो प्रमुख चुनौतियां हैं, पहली तो उपयोगकर्ता का प्रमाणीकरण तथा दूसरी हस्ताक्षर करने व जांचने का विश्वसनीय तरीका। पहली चुनौती से पार पाने के लिए ‘आधार कार्ड’ आधारित ऑनलाइन अथांन्टिकेशन प्रणाली को अपनाया गया है। आइडी रखने वाले नागरिक अपने दस्तावेजों को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित करने के लिए
ई-हस्ताक्षर सेवा में अपने दस्तावेजों को अपलोड करने में सक्षम होंगे। दस्तावेज को अपलोड करने के बाद इसमें आधार सेवा के उपयोग से उपयोगकर्ता का सत्यापन किया जाएगा और उपयोगकर्ता तथा दस्तावेज पर हस्ताक्षर के लिए एक जोड़ी की (पब्लिक की और एक निजी की) जनरेट की जाएगी। तत्पश्चात उपयोगकर्ता को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।सी-डैक अपने ई-हस्ताक्षर पहल के माध्यम से वैध आधार आइडी तथा पंजीकृत मोबाइल नंबर रखने वाले नागरिकों को ऑनलाइन अपने दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर करने में सक्षम बनाता है।
ई-हस्ताक्षर सेवा के अनेक लाभ हैं। ई-हस्ताक्षर सेवा आईटी अधिनियम के अनुसार प्रमाणन प्राधिकारी नियंत्रक द्वारा लाइसेंसी सर्टिफाइंग अथॉरिटी द्वारा दी जाती है। सी-डैक इस प्रकार से सीए की भूमिका निभाता है तथा संपूर्ण हस्ताक्षर प्रक्रिया की सुरक्षा को सुनिश्चित कराता है। पारंपरिक सीए के लिए प्रत्यक्ष सत्यापन की आवश्यकता होती है और इसमें लोगों को असुविधा होती है। इसके विपरीत ई-हस्ताक्षर ‘आधार कार्ड’ की ई-अथांटिकेशन प्रणाली के माध्यम से एक ऑनलाइन एवं आसान सेवा मुहैया करता है। ई-हस्ताक्षर एक ऑनलाइन सेवा है और इसके लिए अब किसी पारंपरिक हार्डवेयर टोकन की आवश्यकता नहीं है। ई-हस्ताक्षर सेवा वन-टाइम-पासवर्ड (ओटीपी जो आधार डेटाबेस में पंजीकृत मोबाइल पर भेजा जाता है)
सोशल मीडिया कई बार अच्छी जानकारी देता है लेकिन कई बार अफवाहों को जन्म देती है। जिसकी वजह से बहुत सारी दिक्कतें खड़ी हो जाती है। हमें, खासतौर से युवाओं को ध्यान देना होगा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल वह अपने और देश के हित में करें न कि इनका दुरुपयोग कर युवाओं की जिंदगी खराब कर दे। इनसे केवल अच्छी बातें ही उन्हें सीखनी होंगी, जैसे पहले हमारे बुजुर्ग करते थे कि संगत में किसी की भी रहो लेकिन केवल उसके गुण ही अपनाओ, इसलिए इसका सकारात्मक इस्तेमाल ही किया जाना चाहिए और इसके इस्तेमाल में पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
के.के.भटनागर प्रधानाचार्य, कस्तूरीराम इंटरनेशनल स्कूल, नरेला
इंटरनेट का है लाभ
जब किसी विषय या व्यक्ति के बारे में जानना हो तो आसानी से इंटरनेट के माध्यम से जाना जा सकता है। इसके लिए किताबों की खाक छानने की
जरूरत नहीं पड़ती। पाठ्यक्रम को समझाने के लिए कक्षाओं में कई बार शिक्षक इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।
-जुगल, छात्र, कक्षा 11
तकनीक जीवन का हिस्सा मोबाइल, टीवी, इंटरनेट जैसे संचार के माध्यम तकनीक से जुड़े हुए हैं जो हमारे रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। आज हर कोई मोबाइल से सिर्फ बातें नहीं बल्कि इंटरनेट, वाट्स एप, कैमरा, वीडियो बहुत कुछ एक साथ इस्तेमाल कर सकता है।
-अमन, छात्र, कक्षा 10
वाट्सएप है फायदेमंद
तकनीक के क्षेत्र में वाट्स ऐप का निर्माण सभी के लिए फायदेमंद है। इससे न सिर्फ हम एक दूसरे से आसानी से जुड़ सकते हैं बल्कि महत्वपूर्ण बातें पता चलती है। वाट्स एप ग्रुप से जुड़े सभी लोग अपने स्तर से जुड़ी जानकारियां लोगों में फैलाते हैं।
-अभिषेक कुमार, छात्र, कक्षा 11
इंटरनेट से जुड़ना बेहतर
बदलते परिवेश के साथ घरों का भी माहौल भी बदल चुका है। अब स्कूल से पहले ही बच्चों को मोबाइल से जुड़ी कई जानकारियों का पता होता है। कक्षा के दौरान जब किसी विषय को चित्र से समझाने की जरूरत होती है तब तुरंत ही उसे गूगल के माध्यम से बच्चों को आसानी से समझाया जा सकता है। इंटरनेट की सुविधा न सिर्फ बच्चों बल्कि शिक्षकों के लिए भी फायदेमंद है। बच्चे घर में ही वॉट्सएप और कैमरे से जुड़ी बातें सीख लेते हैं। इसलिए उन्हें स्कूल में भी कंप्यूटर से जोड़ना अत्यंत
आवश्यक है। जिससे उन्हें इंटरनेट से जुड़ी बातों को अधिक जानने का मौका मिल सके।
-अलका तलवार, शिक्षिका, निगम प्रतिभा
विद्यालय, रोहिणी सेक्टर 8
डिजिटल इंडिया के निर्माण में छात्रों की भूमिका अहम
सरकार के डिजिटल इंडिया के निर्माण का सपना तभी सार्थक होगा जब स्कूली बच्चों को इससे जोड़ने की पहल होगी। तकनीक पर आधारित गतिविधियों से उन्हें रूबरू कराने के लिए समय समय पर विज्ञान मेला का आयोजन किया जाना चाहिए। इसके अलावा कक्षाओं में प्रश्नों के हल के लिए इसका प्रयोग बच्चों को सुविधा प्रदान करता है। दूसरी तरफ इंटरनेट के विस्तार से किसी भी विषय के तथ्य से जुड़ी बातों के लिए किताबों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। और छोटी से छोटी जानकारी भी
आसानी से इंटरनेट पर मिल जाती है। -
मधुर रावत, शिक्षिका, सर्वोदय सह शिक्षा
विद्यालय, रोहिणी सेक्टर 6
करियर के निर्माण में सहायक
यह आधुनिक और तकनीक का दौर है। यहां विषयों की जानकारी के साथ यदि तकनीक और डिजिटल से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें न पता हो तो आगे चलकर पिछड़ने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। बच्चों के भविष्य और उनके करियर के विस्तार के लिए इससे उनका जुड़ना बेहद महत्वूपर्ण है। मौजूदा वक्त में युवाओं की दिलचस्पी विज्ञान, कम्प्यूटर और तकनीक में अधिक है और यही उनके कल को संवार रहा है। इंटरनेट सिर्फ कम्यूनिकेशन का माध्यम नहीं बल्कि कई प्रकार के अध्ययन और रिसर्च में भी
सहायक है। बच्चे इंटरनेट के माध्यम से बिना किसी की मदद से जरूरी बातें जान लेते हैं। स्कूल में ही नींव को मजबूत बनाना जरूरी है।
-राम कंवर दहिया, शिक्षक, सर्वोदय बाल
विद्यालय, आर ब्लॉक, मंगोलपुरी
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