साहित्य

अम्मा रहना जरा संभल के

Posted on:Tue, 21 Mar 2017 10:12 AM (IST)
        

फिर बहसों की भेंट चढ़ेगी घर की सारी खुशियांऔर पढ़ें »

लोक-संवेदना और जायसी का पद्मावत

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 04:18 PM (IST)
        

अभी हाल ही में पद्मावती विषयक आख्यान के फिल्मीकरण को लेकर विवाद छिड़ा तो महाकवि जायसीकृत ‘पद्मावत’ भी चर्चा के केंद्र में आया। इस महाकाव्य में इतिहास औ... और पढ़ें »

पुस्तक चर्चा: अपनी मिट्टी से जुड़ी धारदार कहानियां

Posted on:Tue, 21 Mar 2017 10:24 AM (IST)
        

‘गर्दन तक कर्ज में डूबे किसान देवजी अपने पुत्र को टी.बी. से बचा नहीं पाते हैं। दूसरी ओर किसान सुकेश आत्महत्या कर लेता है और पढ़ें »

युवा प्रतिभा: वो दिल्ली वाली लड़की है

Posted on:Tue, 21 Mar 2017 10:16 AM (IST)
        

ना मानो कि मेरी आंखों के नीचे/एक पौध उग रहा है झुर्रियों काऔर पढ़ें »

कविता: अपने तरीके की लड़ाई

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 04:12 PM (IST)
        

महल-दुमहले होंगे तुम्हारे पर जिस पर टिक सकें पांव इत्ती जमीन मेरी भी हैऔर पढ़ें »

लघुकथा

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 03:55 PM (IST)
        

अचानक से बीती बातें नजरों के आगे कौंधने लगीं लेकिन तुरंत उसने झटक के गोलगप्पे का प्लेट थाम लिया।और पढ़ें »

कहानी: खोमचे वाला

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 03:27 PM (IST)
        

भेल का खोमचा लगाकर छात्र ने की लगन से पढ़ाई और बन गया डॉक्टर...और पढ़ें »

जीवन की बड़ी भूल

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 03:15 PM (IST)
        

अधिकारी बनने का सपना देखने वाली युवती को जब नहीं मिला नौकरी का मौका तो उसे हुआ अहसास कि अवसर नहीं करता किसी का इंतजार... और पढ़ें »

गरीब नहीं हिंदी के लेखक: स्वयं प्रकाश

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 03:02 PM (IST)
        

प्रेमचंद की परंपरा के प्रमुख कथाकार माने जाते हैं स्वयं प्रकाश। वे अपनी कहानियों में यथार्थ को संजोते हुए जीवन की वास्तविकता का चित्रण करते हैं। और पढ़ें »

गीत गोविन्द

Posted on:Mon, 20 Mar 2017 02:52 PM (IST)
        

अनुवाद में घनाक्षरी, आल्ह, दोहा, हरिगीतिका आदि विविध छंदों का प्रयोग हुआ है। भाषा तत्सम व प्रांजल तथा शैली प्रवाहमय और विषय के अनुरूप है। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: दूध का दाम

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 02:23 PM (IST)
        

कोई नर्स देहात में जाने पर राजी न हुई और बहुत कहने-सुनने से राजी भी हुई, तो इतनी लम्बी-चौड़ी फीस माँगी कि बाबू साहब को सिर झुकाकर चले आने के सिवा और कु... और पढ़ें »

आलपिन

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:41 PM (IST)
        

बड़े अफसर ने छोटे को डांटा‘आपऔर पढ़ें »

फागुनी दोहे

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:37 PM (IST)
        

कीचड़ उनके हाथ था, मेरे हाथ गुलाल।और पढ़ें »

रंग बरसे कमेटी की बैठक

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:22 PM (IST)
        

सब चाहते हैं कमेटी की होली हाइटेक हो, होलिका दहन का डिजिटल सीन रहे, मिलन के दिन डांसर बुलाई जाए मगर यह सब हो कैसे!और पढ़ें »

मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों ‘लाइक’ किया

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:11 PM (IST)
        

ध्यान रहे, लाइक और कमेंट के बीच ज्यादा गैप न रहे। कोई असर न हो, तो सोते-जागते, उठते-बैठते हरी बत्ती दिखाएं। और पढ़ें »

होलियाना हनकती हरकतें और चंद हेल्दी हिदायत

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 11:51 AM (IST)
        

होली की सुनामी होती ही ऐसी है। बड़े-बड़े बह जाया करते हैं। तन का ताप और हृदय का आंतरिक दाब बर्दाश्त कर पाना कठिन होता है। और पढ़ें »

लेखनकक्ष से: औरत अकेली नहीं

Posted on:Sun, 05 Mar 2017 03:58 PM (IST)
        

जब समाज की विषम परिस्थितियां अंतर्मन को झकझोरती हैं, तो वे बन जाती हैं ओड़िया कथाकार डॉ. प्रतिभा राय के उपन्यास की नई कड़ी। उनसे बातचीत के अंश- और पढ़ें »

एकाधिकार की निस्सारता

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 11:02 AM (IST)
        

आदिकाल से संचित होते आ रहे ज्ञान का अक्षयकोष तो पूरी मानवता की थाती है। इस पर वैयक्तिक एकाधिकार की अवधारणा और आग्रह को कूप-मंडूकता नहीं तो और क्या कहे... और पढ़ें »

लघुकथा: शक का घेरा

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:46 AM (IST)
        

मौका मिलते ही मुझे घूरने लगता है। पत्नी नहाने जाती है तो वह किसी बहाने रसोईघर में घुस आता है और मेरे इर्द-गिर्द मंडराने की फिराक में रहता है। और पढ़ें »

व्यंग्य: एंड्रायड फोन और मेरी फ्रीज्ड निजता

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:20 AM (IST)
        

हॉट केक की तरह आनन-फानन में बंटने और चखने के लिए तैयार माल जैसी बन गई। बस स्टॉप पर बिकने और चखने के लिए मुμत में बंटने वाले पाचक चूरन जैसी कुछ।और पढ़ें »

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