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संकल्पों के साथ सफलता की सौगात

वर्ष 2013 एक नया सबेरा लेकर आया है। जो युवा आने वाले कल को बेहतर बनाना चाहते हैं , उनके लिए जरूरी है कि इस वर्ष उन संकल्पों को वरीयता दें, जो उनकी सफलता का सारथी बन सकें..

By Edited By: Published: Tue, 01 Jan 2013 05:15 AM (IST)Updated: Tue, 01 Jan 2013 12:00 AM (IST)
संकल्पों के साथ सफलता की सौगात

सन 1974 में एक फिल्म आई थी, इम्तहान। इसमें किशोर कुमार ने एक गाना गाया था जिसके बोल थे, रुक जाना नहीं, तुम कहीं हार के। कांटों पे चलकर मिलेंगे साये बहार के।। इस गाने में जीवन की यह सच्चाई छिपी है कि कई बार कठिन परिस्थितियां और बाधाएं हमें आगे बढने से रोकेंगी लेकिन हमें इनसे डरना नहीं है। अपने मजबूत इरादों और रणनीति से इन बुरे हालातों पर विजय हासिल करनी है। जो लोग विपरीत परिस्थितियों के बाद भी सफलता की मिसाल कायम करते हैं, वे न केवल इतिहास में नाम दर्ज कराते हैं बल्कि आने वाली पीढियों के लिए मिसाल भी बन जाते हैं। अच्छे कॅरियर की तलाश एवं जॉब में प्रगति भला कौन नहीं चाहता है। समाज एवं परिवार में आदर्श स्थान हासिल करने के लिए सभी ऐसा ही सोचते हैं। निश्चित रूप से आप भी इसमें शामिल होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं, सपने देखने से ही पूरे नहीं होते हैं। इसके लिए कडी मेहनत और सटीक रणनीति की दरकार होती है। अगर आपको सपने साकार करने हैं तो नए साल में यह निश्चित करें कि इनकी पूर्ति के लिए न केवल सार्थक रणनीति बनाएंगे बल्कि उसके क्रियान्वयन की हर संभव कोशिश भी करेंगे। कॅरियर एवं जॉब की ओर बढ रहे लोग अगर न्यू ईयर में कुछ संकल्पों का ध्यान रखें तो वे सफलता के नए आयाम रचने में सफल हो सकते हैं ..

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पहले खुद को पहचानें

कॅरियर एवं जॉब की तलाश में असफल हो रहे अधिकतर लोगों को यही नहीं मालूम होता है कि उनके लिए सही क्षेत्र क्या है? यह भटकाव खतरनाक है। पहले तो हमें यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि कौन सा कार्य हमारी साम‌र्थ्य में है और कौन सा नहीं। हमारे कमजोर और मजबूत पहलू क्या हैं। जब तक हम इन चीजों का निर्धारण नहीं कर लेते हैं, भटकाव बना रहेगा। जिस काम में आपका मन लगे और संतुष्टि मिले, वही करें।

सार्थक प्रयास कभी निष्फल नहीं होते

बहुत से लोगों का मानना है कि जॉब और कॅरियर एक ही हैं लेकिन इसमें एक अंतर दिखाई देता है। जॉब बहुत हद तक केवल रोजगार के लिए होता है वहीं कॅरियर में संतुष्टि का समावेश है। इस बात को भारतीय रेसलर दिलीप सिंह राणा, दि ग्रेट खली के जीवन से समझा जा सकता है। लोग इनके खिताबों के बारे में आपको बता देंगे लेकिन शायद यह बात कम ही लोग जानते हैं कि रेसलिंग में आने से पहले यह सरकारी विभाग में नौकरी करते थे लेकिन दि ग्रेट खली रेसलिंग में कॅरियर बनाना चाहते थे। उन्हें इसी में संतुष्टि की तलाश थी और जब इन्हें इस फील्ड में आगे बढने का मौका मिला तो इन्होंने विश्व विजेता बनकर अपना और देश का नाम रोशन कर दिया। संभव है कि आप भी आजीविका चलाने के लिए कहीं जॉब कर रहे हों लेकिन आपका मन किसी दूसरी फील्ड में जाने का हो तो उस दिशा में आगे बढने का प्रयास करते रहें।

नए पर नजर, पुराने की खबर

समय किसी का इंतजार नहीं करता है। जो इसकी गति को पहचान कर इसके साथ कदम मिलाकर आगे चलता है, वही विजेता के तौर पर सामने आता है। इतिहास गवाह है, जिसने समय की गति को नहीं पहचाना वह हमेशा पीछे होता गया है। याद करिए जब युद्ध में घोडों का प्रयोग बढा तो तुकरें ने कई बडे साम्राज्यों को ध्वस्त कर दिया। बारूद का प्रयोग बढा तो मुगल साम्राज्य बढता गया। यूरोपीय देशों ने अच्छी बंदूकें और तीव्र गति से चलने वाले जलयान बनाए तो पूरी दुनिया उनके आगे नतमस्तक हो गई।

रोजगार के क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही है। कॅरियर की पुरानी फील्डों में आज क्या स्थिति है। क्या पहले की तरह इसमें अब जॉब निकल रहे हैं? समय परिवर्तन के साथ इस कॅरियर में कॅरियर की किन नई उप शाखाओं का जन्म हुआ है। इन बातों पर हमेशा नजर रखें साथ ही जो नए कॅरियर विकल्प तेजी से उभरकर सामने आ रहे हैं उनके बारे में भी जानकारी लेते रहें। कॅरियर का क्षेत्र नया हो या पुराना, पूरी जानकारी के बाद ही उस दिशा में कदम आगे बढाएं।

पथप्रदर्शक है प्राथमिकता

एक पुरानी कहावत है, चमत्कार को ही दुनिया नमस्कार करती है लेकिन यह भी सच है कि चमत्कार बिना मेहनत और मार्गदर्शन के संभव होते ही नहीं हैं। पथप्रदर्शक ही आपको सही मार्ग का बोध करा सकता है। भविष्य की राह तलाश रहे व्यक्तियों को किसी ऐसे व्यक्ति को अपना आदर्श बनाना चाहिए जिसने विपरीत परिस्थितियों एवं चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना करते हुए भी असंभव दिख रही सफलता की ऊंची से ऊंची इमारतों को भी अपने आगे बौना सिद्ध कर दिया हो। ऐसा व्यक्ति जीवित या फिर कोई इतिहास पुरुष भी हो सकता है। इन लोगों की जीवनी, हौसलों और विपरीत हालातों में वे कैसे आगे बढे, ये सब सीखने की कोशिश करें। उसके अच्छे गुणों को अपनाएं और ठान लें जब ये ऐसा करने में सफल हुए तो मैं भला यह क्यों नहीं कर सकता हूं। आत्मबल मजबूत कर कडी मेहनत करते हुए आगे बढे। ठीक उसी तरह जैसे शारीरिक रूप से अपंग तैमूर आगे बढा था। उसने दूर-दूर के देशों से युवकों को एकत्र कर सेना बनाई और एक के बाद एक कई बडी शक्तियों को अपने आगे नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया। आप भी चाह लें तो इस वर्ष अपनी कमजोरियों को पीछे छोड आगे बढ सकते हैं। महत्मा गांधी जी ने भी कहा था, कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जब कि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कडी मेहनत करते हैं।

नॉलेज ए टू जेड

आज कॅरियर में सफलता के लिए एक गुण का होना काफी नहीं है। आज आप अपने क्षेत्र से संबंधित जितनी जानकारी हासिल करते जाएंगे काम की गुणवत्ता में उतना ही सुधार होता जाएगा। कार्यक्षेत्र से संबंधित सभी चीजों को सीखें। देखें कि परिवर्तन किस जगह पर होता है और उसका स्वरूप कैसा है। ऐसी जानकारियां हमेशा आपको आगे बढाती रहेंगी। यह योग्यता हासिल करने के लिए जरूरी है कि अपनी फील्ड से संबंधित किताबों का अध्ययन किया जाए। आप अपने मूल कार्य से हटकर दूसरे संबंधित क्षेत्रों के ट्रेनिंग कार्यक्रमों का हिस्सा बनें। इस तरह आपकी कार्यक्षमता में विस्तार होगा और दूसरों पर निर्भरता भी कम हो जाएगी। हो सकता है आप शुरुआत में विफल हों लेकिन माइकल जॉर्डन के शब्दों को याद रखिए विफल होना मंजूर किया जा सकता है लेकिन सफल होने के लिए प्रयास न करना मंजूर नहीं किया जा सकता है।

शतप्रतिशत समर्पण

कार्य के प्रति समर्पित भावना, कठिन से कठिन काम को भी सरलता से पूर्ण कराने का माध्यम बन जाती है। आपने देखा होगा झील, नदी के किनारे या किसी तालाब में बगुला बिना हिले मिनटों क्या घंटों तक मछली के शिकार के लिए खडा रहता है। वह जानता है कि उसकी एक हलचल उसे उसके प्रिय भोजन से दूर कर सकती है। बगुले का एक ही लक्ष्य है मछली। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए भी कुछ ऐसा ही समर्पण कार्य के प्रति आपका भी होना चाहिए। कॅरियर और नौकरी में हम तभी बेहतर कर सकते हैं जब शतप्रतिशत समर्पण की भावना उसमें प्रदर्शित हो। यह बात ध्यान रखें कि कॅरियर और कंपनी की साख सीधे-सीधे आपके भविष्य और प्रतिष्ठा से जुडी है। नि:संदेह कंपनी जितना आगे बढेगी, उतना ही आगे आप भी जाएंगे। अपने प्रोफेशनल और पर्सनल व्यवहार से कार्यक्षेत्र में अच्छी पहचान बनाएं। क्रिकेट के बारे में आप में से अधिकतर बहुत कुछ जानते हैं। श्रीलंका के जयसूर्या ने अपना कॅरियर एक बॉलर के रूप में शुरू किया था। बैटिंग क्रम में वे सातवें या फिर आठवें नंबर के खिलाडी के तौर पर आते थे। इस क्रम में उन्होंने कई?मैचों में जोरदार हिटें लगाकर लोगों को हैरान कर दिया लेकिन उनका यह प्रदर्शन स्थिर नहीं था। टीम मैनेजमेंट ने उनकी काबिलियत को देखा और उन्हें वनडे मैचों में ओपनर के रूप में मैदान पर उतारा। जयसूर्या ने अपनी बैटिंग में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किया और अपने आप को बेहतरीन बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर लिया। ऐसा ही समर्पण आपको कार्यक्षेत्र में बडी जिम्मेदारियां दिला सकता है।

मानसिक एवं शारीरिक सचेतना

कार्यक्षेत्र में समय को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण काम करने के लिए जरूरी है कि शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही रूपों से पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त हों। किसी ने ठीक ही कहा है, स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिष्क निवास करता है। नियमित रूप से योगा, एक्सरसाइज, स्पो‌र्ट्स एक्टिविटीज आदि जहां शारीरिक रूप से आपको मजबूत करेंगी, वहीं मानसिक रूप से भी तरोताजा रखेंगी। म्यूजिक भी थकान दूर करने का माध्यम बन सकता है।

नकारात्मक लोगों से सकारात्मक दूरी

इस दुनिया में सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही तरह के लोग हैं। सकारात्मक व्यक्ति जहां अपने विचारों एवं अनुभवों से लोगों को आगे ले जाने का काम करते हैं वहीं नकारात्मक व्यक्ति अपने बुरे अनुभवों एवं विचारों से प्रगति की ओर बढते आपके कदमों पर ब्रेक लगा सकते हैं। अधिकतर नकारात्मक व्यक्ति वे हैं जो अपनी मंजिल हासिल नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों के अतीत को तलाशें। यह पता लगाएं कि किन कमियों के चलते वे असफल हो गए। कहीं कुछ ऐसी ही कमियां आप में भी तो नहीं हैं और हैं तो इन्हें तत्काल दूर करें। सफलता के लिए अच्छे हौसलों का होना बेहद जरूरी है। नकारात्मक सोच के लिए यहां कोई जगह नहीं है। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

सफलता है क्या?

अपनी मेहनत और परिश्रम से आपने जो अर्जित किया है उससे भलीभांति संतुष्ट हैं तो मान लीजिए कि आपको सफलता मिल गई है। संतुष्टि ही सफलता का नाम है। एक सफलता दूसरी सफलता का मार्ग खोलती है क्योंकि इसके बाद ही व्यक्ति अपने लिए दूसरे लक्ष्य का निर्धारण करता है। पूर्ण सफल व्यक्ति उसे कहा जाता है जो अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से असंभव को भी संभव कर देता है। ऐसे लोग इतिहास पुरुष बन जाते हैं।

दुनिया के सर्वाधिक सफलतम व्यक्तियों में कौटिल्य का नाम भी है जिन्हें हम चाणक्य के नाम से भी जानते हैं। इतिहास गवाह है कि इन्होंने समय, काल, परिस्थितियों पर येन-केन-प्रकारेण विजय हासिल की। क्रूर नंद के शासन एवं आक्रांता यूनानियों के आक्रमण से देश को मुक्ति दिलाई। एक संपूर्ण राष्ट्र का निर्माण किया।

नंद के यहां हुए अपने अपमान का बदला लेने के लिए इन्होंने नंद के नाश का प्रण किया था और उसी कालखंड में सिकंदर के आक्रमण को देख नि›य किया था कि वे एक ऐसे संगठित राष्ट्र का निर्माण करेंगे जो विदेशी आक्रांताओं के भय से जनता को मुक्त कर देगा। इन दोनों कार्यो की पूर्ति के लिए कौटिल्य दिन-रात घने वनों में भटकते रहे, गांव-गांव जाकर लोगों के मन में राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना का संचार करते रहे और देखते ही देखते इन्होंने नवयुवकों की एक छोटी सी सेना का गठन कर लिया। इस दौरान इन्होंने कई बार अपने जीवन को भी दांव पर लगाया। कौटिल्य के प्रिय शिष्य चंद्रगुप्त ने इन्हीं के मार्गदर्शन में नंद का नाश किया और यूनानी सेल्यूकस को पराजित कर आक्रांताओं के भय से देश को मुक्त कराया। कौटिल्य के जीवन के यही दो सबसे बडे लक्ष्य थे। इन दोनों की पूर्ति के बाद वे चाहते तो मगध का राज सिंहासन खुद हासिल कर सकते थे लेकिन इन्होंने अपनी सफलताओं से संतुष्टि हासिल कर ली थी। उनका जो ध्येय था वह पूरा हो गया था और इसकी पूर्ति के साथ ही कौटिल्य पुन: साधारण मनुष्य की तरह ही जीवन व्यतीत करने लगे थे।

शरद अगिन्होत्री


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